बंगाल उपचुनाव से पहले TMC के नाम और चुनाव चिह्न पर फैसला अनिश्चित, 16 सितंबर है नामांकन की अंतिम तिथि
सारांश
मुख्य बातें
चुनाव आयोग (ECI) ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के दो विरोधी गुटों — ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले 'बागी-बहुमत' गुट और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले 'मूल-अल्पमत' गुट — के साथ अलग-अलग बैठकें कर पार्टी के नाम व चुनाव चिह्न पर उनके दावे सुने। बावजूद इसके, पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों के उपचुनावों के लिए 16 सितंबर 2026 की नामांकन अंतिम तिथि से पहले आयोग के किसी निर्णय को लेकर गहरी अनिश्चितता बनी हुई है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि केवल तीन दिन शेष रहते ऐसा कोई फैसला अब लगभग असंभव जान पड़ता है।
मुख्य घटनाक्रम
शुक्रवार को ऋतब्रत के नेतृत्व वाले बागी गुट के साथ बैठक के बाद आयोग ने शनिवार को उस गुट से अपने दावों के समर्थन में नया स्पष्टीकरण और दस्तावेज़ माँगे। सूत्रों के अनुसार, ऋतब्रत गुट ने शनिवार शाम तक सभी अपेक्षित दस्तावेज़ आयोग को सौंप दिए।
आयोग के एक अंदरूनी सूत्र ने बताया कि बागी गुट के दस्तावेज़ों की समीक्षा के बाद शनिवार रात आयोग ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को संदेश भेजकर इस मामले पर उनका पक्ष माँगा। इसके साथ ही ममता गुट की ओर से भी आयोग को एक संदेश भेजा गया है, जिसमें ऋतब्रत गुट द्वारा जमा किए गए दस्तावेज़ों का विवरण माँगा गया है — यह दर्शाता है कि दोनों पक्षों के बीच कागज़ी जंग अभी जारी है।
नामांकन की समयसीमा और व्यावहारिक चुनौती
नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा उपचुनावों के लिए नामांकन की अंतिम तिथि 16 सितंबर 2026 है, जबकि मतदान 6 अक्टूबर 2026 को और परिणाम 9 अक्टूबर 2026 को आएंगे। एक राजनीतिक जानकार ने कहा, 'केवल तीन दिन बचे हैं — ऐसे में नाम और चुनाव चिह्न पर आयोग का कोई निर्णय आना बहुत मुश्किल लगता है।'
उनके अनुसार, ऐसी स्थिति में दोनों गुटों को या तो आयोग द्वारा आवंटित फ्री सिंबल (मुक्त चुनाव चिह्न) के साथ या आयोग द्वारा दिए गए अलग चुनाव चिह्नों के साथ अपने उम्मीदवार उतारने होंगे। यह स्थिति मतदाताओं के बीच भ्रम और पार्टी के पारंपरिक समर्थन आधार को विभाजित करने का जोखिम पैदा करती है।
अन्य दलों की तैयारी
जहाँ TMC के दोनों गुट आयोग के चक्कर में उलझे हुए हैं, वहीं प्रतिद्वंद्वी दल पहले ही मैदान में उतर चुके हैं। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [CPI(M)] के नेतृत्व वाले लेफ्ट फ्रंट और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) दोनों ने नंदीग्राम और रेजीनगर के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। इसके अलावा हुमायूँ कबीर द्वारा गठित आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) ने भी रेजीनगर से अपने उम्मीदवार की घोषणा कर दी है।
पृष्ठभूमि: TMC में विभाजन की कहानी
यह ऐसे समय में आया है जब तृणमूल कांग्रेस पार्टी के भीतर बहुमत बनाम अल्पमत के दावों पर गहरा आंतरिक संकट झेल रही है। गौरतलब है कि भारत के चुनावी इतिहास में पार्टी विभाजन के बाद नाम और चुनाव चिह्न पर विवाद के मामले असाधारण नहीं हैं — 1969 में कांग्रेस विभाजन से लेकर एनसीपी और शिवसेना के हालिया विवादों तक, ऐसे मामलों में चुनाव आयोग के फैसलों ने पार्टियों की राजनीतिक किस्मत पलटी है।
ऋतब्रत गुट का दावा है कि उनके पास पार्टी का बहुमत है, जबकि ममता गुट खुद को 'मूल' पार्टी बताता है। आयोग दोनों पक्षों के दस्तावेज़ी साक्ष्यों की जाँच कर रहा है, लेकिन कानूनी पेचीदगियाँ और कागज़ी लड़ाई अभी थमती नहीं दिख रही।
आगे क्या होगा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि 16 सितंबर तक आयोग का फैसला नहीं आता, तो दोनों गुट अपने-अपने उम्मीदवार अलग चुनाव चिह्नों के साथ उतारेंगे — जिससे TMC का पारंपरिक जनाधार दो हिस्सों में बँट सकता है। यह विभाजन न केवल इन दो सीटों पर, बल्कि पश्चिम बंगाल की आगामी राजनीति पर भी दूरगामी असर डाल सकता है।