घरेलू PNG कनेक्शन योजना: लागत वसूली 10 साल से घटकर 3 साल, 1 सितंबर से लागू
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार की नई घरेलू पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) प्रोत्साहन योजना के तहत सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) कंपनियों के लिए लागत वसूली की अवधि 10 साल से घटकर मात्र 3 साल रह जाएगी — यह बात सरकार ने रविवार, 13 सितंबर 2026 को कही। 18 अगस्त 2026 को लॉन्च की गई और 1 सितंबर 2026 से प्रभावी यह योजना, घरों तक स्वच्छ ईंधन की पहुँच तेज़ करने के उद्देश्य से तैयार की गई है।
योजना की मुख्य संरचना
नई प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत प्रत्येक भौगोलिक क्षेत्र के लिए घरेलू कनेक्शनों की एक न्यूनतम सीमा निर्धारित की गई है। जो पात्र CGD कंपनियाँ प्रदर्शन अवधि के दौरान इस निर्धारित सीमा से अधिक बिल किए गए घरेलू कनेक्शन जोड़ती हैं, उन्हें प्रत्येक अतिरिक्त कनेक्शन पर 200 स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर (SCM) घरेलू स्तर पर उत्पादित APM गैस का अतिरिक्त आवंटन दिया जाएगा।
यह योजना छह महीने की अवधि में दो चरणों में लागू की जाएगी। इसका डिज़ाइन CGD कंपनियों के व्यावसायिक हितों को स्वच्छ घरेलू ऊर्जा के विस्तार के व्यापक लक्ष्य से जोड़ने के लिए किया गया है।
LNG की जगह सस्ती APM गैस — कंपनियों को राहत
वर्तमान में CGD कंपनियाँ अपने कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) — परिवहन सेगमेंट — के लिए अपेक्षाकृत महँगी लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) का उपयोग करती हैं। नई योजना के तहत मिलने वाली अतिरिक्त APM गैस इस महँगी LNG का विकल्प बनेगी, जिससे कंपनियों की कुल गैस सोर्सिंग लागत में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है।
सरकार के अनुमान के अनुसार, सोर्सिंग लागत घटने से एक घरेलू PNG कनेक्शन पर पूंजीगत व्यय की वसूली अवधि 10 वर्षों से सिकुड़कर लगभग 3 वर्ष रह जाएगी — जो कंपनियों के लिए नए क्षेत्रों में विस्तार का मज़बूत आर्थिक प्रोत्साहन है।
मौजूदा स्थिति और नियामक ढाँचा
सरकार द्वारा जारी आँकड़ों के अनुसार, 18 अगस्त 2026 तक देशभर में लगभग 1.74 करोड़ सक्रिय घरेलू PNG कनेक्शन थे। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) ने देश की संपूर्ण मुख्यभूमि को कवर करने वाले 309 भौगोलिक क्षेत्रों में CGD कंपनियों को अधिकृत किया हुआ है।
गौरतलब है कि CGD नेटवर्क का विकास इन्हीं PNGRB-अधिकृत संस्थाओं के माध्यम से हो रहा है। बिना बिल वाले कनेक्शनों को सक्रिय, बिल किए गए कनेक्शनों में बदलना भी इस योजना के प्रमुख लक्ष्यों में से एक है।
आम जनता और ऊर्जा नीति पर असर
यह योजना ऐसे समय में आई है जब भारत अपने ऊर्जा मिश्रण में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। घरों में PNG कनेक्शन बढ़ने से रसोई गैस सिलेंडर पर निर्भरता कम होगी और खाना पकाने में स्वच्छ ईंधन का उपयोग बढ़ेगा, जो दीर्घकालिक रूप से पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों के लिए लाभदायक है।
आगे इस योजना के क्रियान्वयन की गति और CGD कंपनियों की भागीदारी पर बहुत कुछ निर्भर करेगा। दोनों चरणों के प्रदर्शन की समीक्षा के बाद सरकार संभावित रूप से योजना का दायरा और बढ़ा सकती है।