24 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

एलपीजी से पीएनजी पर स्विच: केंद्र ने राज्यों से जिला स्तर पर प्रशासनिक सहयोग माँगा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
एलपीजी से पीएनजी पर स्विच: केंद्र ने राज्यों से जिला स्तर पर प्रशासनिक सहयोग माँगा

सारांश

केंद्र ने राज्यों को निर्देश दिया है कि घरेलू एलपीजी कनेक्शन को पीएनजी पर स्थानांतरित करने के लिए जिला स्तर पर नोडल अधिकारी नामित करें। पश्चिम एशिया संकट में होर्मुज मार्ग से 50% एलपीजी आयात बाधित होने के बाद यह कदम भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मज़बूत करने की दिशा में उठाया गया है।

मुख्य बातें

पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर एलपीजी से पीएनजी ट्रांजिशन में जिला स्तरीय प्रशासनिक सहयोग माँगा।
पश्चिम एशिया संकट के दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारत के करीब 50% एलपीजी आयात प्रभावित हुए थे।
संकट के दौरान 7.99 लाख पीएनजी कनेक्शन गैसीफाई हुए; अतिरिक्त 2.87 लाख के लिए बुनियादी ढाँचा तैयार — कुल क्षमता 10.86 लाख कनेक्शन।
लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (सप्लाई एंड डिस्ट्रीब्यूशन का रेगुलेशन) संशोधन आदेश, 2026 अधिसूचित; पीएनजी अपनाने वालों को अतिरिक्त राहत।
प्रत्येक भौगोलिक क्षेत्र में पीएनजी समन्वय समिति (पीसीसी) गठन का निर्देश; राज्यों से जिला नोडल अधिकारी नामित करने को कहा।
एलपीजी और पीएनजी दोनों कनेक्शन एक साथ रखने की व्यवस्था पर रोक लगाने का नियामकीय ढाँचा लागू किया जाएगा।

केंद्र सरकार ने 23 अगस्त 2026 को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से घरेलू रसोई गैस उपभोक्ताओं को एलपीजी (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) से पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) पर तेज़ी से स्थानांतरित करने के लिए जिला स्तर पर ठोस प्रशासनिक सहयोग सुनिश्चित करने को कहा है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय का तर्क है कि पीएनजी न केवल सुरक्षित और स्वच्छ ईंधन है, बल्कि यह तेल विपणन कंपनियों पर एलपीजी वितरण के भारी लॉजिस्टिक्स बोझ को भी कम करता है।

मुख्य घटनाक्रम

पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर उन क्षेत्रों में जिला स्तरीय हस्तक्षेप की माँग की है जहाँ पाइपलाइन गैस पहले से उपलब्ध है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि ऐसा नियामकीय ढाँचा लागू किया जाए जिसके तहत किसी घर में एलपीजी और पीएनजी दोनों कनेक्शन एक साथ रखने की व्यवस्था को रोका जा सके।

पेट्रोलियम सचिव ने पत्र में लिखा, 'पीएनजी एक अधिक सुरक्षित, स्वच्छ और कुशल खाना पकाने का ईंधन उपलब्ध कराती है। यह देश के एनर्जी ट्रांजिशन के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसका तेज़ी से इस्तेमाल एलपीजी वितरण से जुड़े लॉजिस्टिक्स के बोझ को कम करने, उपभोक्ताओं की सुविधा बढ़ाने और बड़े सार्वजनिक एवं निजी निवेश से तैयार किए गए सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (सीजीडी) बुनियादी ढाँचे के बेहतर उपयोग में मदद करता है।'

पश्चिम एशिया संकट का सबक

यह पहल ऐसे समय में आई है जब पश्चिम एशिया संकट के दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते एलपीजी आपूर्ति बाधित हुई थी — इसी मार्ग से भारत के करीब 50 प्रतिशत एलपीजी आयात होते हैं। उस संकट के दौरान करीब 7.99 लाख पीएनजी कनेक्शनों को गैसीफाई किया गया और अतिरिक्त 2.87 लाख कनेक्शनों के लिए बुनियादी ढाँचा तैयार हुआ, जिससे कुल क्षमता 10.86 लाख कनेक्शन तक पहुँच गई। गौरतलब है कि यह संकट भारत की आयात-निर्भर ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला की कमज़ोरी को उजागर करता है।

नई नियामकीय व्यवस्था

सरकार ने लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (सप्लाई एंड डिस्ट्रीब्यूशन का रेगुलेशन) संशोधन आदेश, 2026 भी अधिसूचित किया है, जिसका उद्देश्य पीएनजी अपनाने वाले घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं को अतिरिक्त राहत और सुविधा देना है। इसके साथ ही, मंत्रालय ने अधिकृत सीजीडी कंपनियों और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों को प्रत्येक भौगोलिक क्षेत्र में पीएनजी समन्वय समिति (पीसीसी) गठित करने का निर्देश दिया है।

ये समितियाँ पात्र हाउसिंग सोसाइटियों और घरों की पहचान करेंगी, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) और व्यक्तिगत उपभोक्ताओं को वैधानिक नोटिस जारी करेंगी तथा जागरूकता शिविर आयोजित करेंगी।

जिला प्रशासन की भूमिका

जिला प्रशासन से अपेक्षा है कि वह आरडब्ल्यूए और हाउसिंग सोसाइटियों से राइट ऑफ वे एवं राइट ऑफ यूज दिलाने में मदद करे। साथ ही, एलपीजी वितरकों और सीजीडी कंपनियों के बीच ट्रांजिशन को सुगम बनाने, उपभोक्ताओं की शिकायतों के समाधान और अधिसूचित क्षेत्रों में पीएनजी अपनाने की निगरानी की ज़िम्मेदारी भी जिला प्रशासन पर होगी। मंत्रालय के अनुसार, जहाँ आवश्यक हो वहाँ गैर-सार्वजनिक क्षेत्रों में प्रवेश से इनकार किए जाने पर संबंधित अधिकारी नियंत्रण आदेशों के तहत शक्तियों का प्रयोग कर सकेंगे।

मंत्रालय ने खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के अधिकारियों को इस कार्य के लिए सबसे उपयुक्त बताया है, क्योंकि एलपीजी वितरकों के साथ उनका पूर्व नियामकीय संपर्क और जमीनी स्तर पर मजबूत प्रशासनिक नेटवर्क पहले से मौजूद है। राज्य सरकारों से कहा गया है कि वे जिला स्तर पर एक नोडल अधिकारी नामित करें जो स्थानीय पीसीसी के साथ औपचारिक रूप से समन्वय करे।

आगे की राह

मंत्रालय ने राज्यों से इस मामले को प्राथमिकता देने का आग्रह किया है। यह कदम भारत की व्यापक एनर्जी ट्रांजिशन नीति का हिस्सा है, जो आयात-निर्भर एलपीजी से घरेलू पाइपलाइन नेटवर्क की ओर बदलाव को गति देने पर केंद्रित है। आने वाले महीनों में पीसीसी की सक्रियता और जिला नोडल अधिकारियों की नियुक्ति इस योजना की सफलता की कसौटी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह नई नहीं थी; विशेषज्ञ वर्षों से होर्मुज निर्भरता की चेतावनी देते रहे हैं। असली परीक्षा यह है कि क्या जिला प्रशासन — जो पहले से ही कई योजनाओं के बोझ तले दबा है — इस ट्रांजिशन को वास्तविक गति दे सकता है, या यह भी कागज़ी समितियों की एक और परत बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केंद्र सरकार एलपीजी से पीएनजी पर स्विच क्यों करा रही है?
सरकार का कहना है कि पीएनजी अधिक सुरक्षित, स्वच्छ और किफ़ायती ईंधन है और एलपीजी वितरण के लॉजिस्टिक्स बोझ को कम करता है। पश्चिम एशिया संकट के दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारत के करीब 50% एलपीजी आयात बाधित होने के बाद ऊर्जा सुरक्षा की दृष्टि से यह बदलाव और ज़रूरी हो गया है।
पीएनजी समन्वय समिति (पीसीसी) क्या है और यह कैसे काम करेगी?
पीसीसी अधिकृत सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों द्वारा प्रत्येक भौगोलिक क्षेत्र में गठित की जाएगी। यह समिति पात्र हाउसिंग सोसाइटियों की पहचान करेगी, आरडब्ल्यूए को वैधानिक नोटिस जारी करेगी और जागरूकता शिविर आयोजित करेगी।
क्या घर में एलपीजी और पीएनजी दोनों कनेक्शन एक साथ रखे जा सकते हैं?
नहीं। सरकार ऐसा नियामकीय ढाँचा लागू करने की योजना बना रही है जिसके तहत एक घर में एलपीजी और पीएनजी दोनों कनेक्शन एक साथ रखने की व्यवस्था पर रोक लगाई जाएगी। लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (सप्लाई एंड डिस्ट्रीब्यूशन का रेगुलेशन) संशोधन आदेश, 2026 इसी दिशा में अधिसूचित किया गया है।
जिला प्रशासन की इस ट्रांजिशन में क्या भूमिका होगी?
जिला प्रशासन आरडब्ल्यूए से राइट ऑफ वे दिलाने, एलपीजी वितरकों और सीजीडी कंपनियों के बीच समन्वय, उपभोक्ता शिकायत निवारण और पीएनजी अपनाने की निगरानी करेगा। राज्यों से एक नोडल अधिकारी नामित करने को कहा गया है।
पश्चिम एशिया संकट के दौरान पीएनजी कनेक्शन की स्थिति क्या रही?
संकट के दौरान करीब 7.99 लाख पीएनजी कनेक्शनों को गैसीफाई किया गया और अतिरिक्त 2.87 लाख कनेक्शनों के लिए बुनियादी ढाँचा तैयार किया गया, जिससे कुल क्षमता 10.86 लाख कनेक्शन तक पहुँच गई।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 महीने पहले
  2. 4 महीने पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 5 महीने पहले
  8. 5 महीने पहले