सीबीजी कीमत में 43% बढ़ोतरी, फिर भी सीएनजी-पीएनजी उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा बड़ा बोझ: पेट्रोलियम मंत्रालय
सारांश
मुख्य बातें
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 29 अगस्त को स्पष्ट किया कि गोबरधन योजना के तहत संपीड़ित जैव गैस (सीबीजी) की संशोधित खरीद कीमत से सीएनजी और घरेलू पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) उपभोक्ताओं पर कोई बड़ा अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। मंत्रालय ने इस संबंध में फैल रही आशंकाओं को असंगत मान्यताओं पर आधारित बताते हुए खारिज किया और कहा कि वास्तविक प्रभाव काफी सीमित रहेगा।
मौजूदा और नई कीमतों का तुलनात्मक विश्लेषण
मंत्रालय के अनुसार, मौजूदा व्यवस्था में सीबीजी उत्पादकों को दिया जाने वाला भुगतान सीएनजी के खुदरा बिक्री मूल्य के 85 प्रतिशत से जुड़ा है, जो वर्तमान में लगभग ₹1,478 प्रति एमएमबीटीयू बैठता है। संशोधित गोबरधन ढाँचे के तहत यह खरीद कीमत बढ़ाकर ₹2,110 प्रति एमएमबीटीयू कर दी गई है — यानी मौजूदा कीमत से लगभग 43 प्रतिशत अधिक।
हालाँकि मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि यह खरीद कीमत सीधे उपभोक्ताओं पर नहीं डाली जाती। यह राशि केवल उत्पादकों को दी जाने वाली कीमत है और इसका सीएनजी या घरेलू पीएनजी के खुदरा दाम से सीधा संबंध नहीं है।
सरकारी सहायता से घटेगा उपभोक्ताओं पर असर
सीबीजी को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार ने ₹10 प्रति किलोग्राम की वहनीयता सहायता देने की घोषणा की है। 95 प्रतिशत मीथेन युक्त सीबीजी के लिए यह सहायता लगभग ₹215 प्रति एमएमबीटीयू के बराबर होगी, जिसे सरकार स्वयं वहन करेगी।
इस सहायता को समायोजित करने के बाद गैस उपभोक्ताओं के माध्यम से वसूली जाने वाली प्रभावी सीबीजी लागत लगभग ₹1,895 प्रति एमएमबीटीयू रहेगी। यह मौजूदा प्रभावी लागत ₹1,478 प्रति एमएमबीटीयू की तुलना में केवल लगभग 28 प्रतिशत अधिक है — खरीद मूल्य में दिखने वाली 43 प्रतिशत बढ़ोतरी से काफी कम।
गैस पूलिंग व्यवस्था से और घटेगा बोझ
मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि सीबीजी को सीधे उसकी खरीद कीमत पर सिटी गैस वितरण (सीजीडी) कंपनियों को नहीं बेचा जाता। इसे अन्य घरेलू प्राकृतिक गैस के साथ मिलाकर एक साझा गैस पूल में शामिल किया जाता है और लागत का वितरण पूरे घरेलू गैस पूल में होता है।
गौरतलब है कि पुरानी व्यवस्था में सीबीजी की लागत केवल प्रशासित मूल्य तंत्र (एपीएम) के तहत आवंटित सीमित गैस मात्रा पर वितरित होती थी, जिसका उपयोग मुख्यतः परिवहन क्षेत्र के सीएनजी और घरेलू पीएनजी उपभोक्ताओं के लिए होता था। नई व्यवस्था में यह लागत पहले की तुलना में लगभग 2.5 से 3 गुना बड़े घरेलू गैस आधार पर वितरित होगी, जिससे प्रति उपभोक्ता असर काफी कम हो जाएगा।
योजना का व्यापक उद्देश्य
मंत्रालय के अनुसार, संशोधित मूल्य व्यवस्था के तीन प्रमुख लक्ष्य हैं — सीबीजी उत्पादन को बढ़ावा देना, जैविक अपशिष्ट के बेहतर उपयोग को प्रोत्साहित करना और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को विस्तार देना। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी ऊर्जा टोकरी में हरित विकल्पों की हिस्सेदारी बढ़ाने की दिशा में तेज़ी से काम कर रहा है।
आने वाले समय में सीबीजी उत्पादन बढ़ने के साथ यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि गैस पूलिंग व्यवस्था उपभोक्ताओं को वास्तव में कितनी राहत दे पाती है और क्या सरकारी सहायता का प्रवाह निर्बाध बना रहता है।