एलपीजी अंडर-रिकवरी ₹61,900 करोड़ पर पहुँची, ओएमसी की Q1 FY27 कमाई पर भारी दबाव
सारांश
मुख्य बातें
सरकारी तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) को वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (Q1 FY27) में एलपीजी की बिक्री पर भारी नुकसान उठाना पड़ा है। केयरएज रेटिंग्स की एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया में संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विक एलपीजी आपूर्ति शृंखला बुरी तरह प्रभावित हुई, जिसने आयात लागत को तेज़ी से बढ़ाया और कंपनियों की लाभप्रदता को कमज़ोर किया। वित्त वर्ष 2026 में मज़बूत मुनाफ़े के बाद यह गिरावट उद्योग के लिए एक बड़ा झटका है।
अंडर-रिकवरी का बढ़ता बोझ
केयरएज रेटिंग्स की रिपोर्ट के अनुसार, देश की तीन प्रमुख ओएमसी को Q1 FY27 में एलपीजी बिक्री पर ₹13,700 करोड़ की संयुक्त अंडर-रिकवरी का सामना करना पड़ा। यह आँकड़ा सरकार की ओर से मिली ₹7,500 करोड़ की क्षतिपूर्ति को समायोजित करने के बाद का है। कंपनियाँ घरेलू उपभोक्ताओं को बाज़ार मूल्य से कम कीमत पर रसोई गैस सिलेंडर उपलब्ध कराती रही हैं, जिससे यह अंतर लगातार बढ़ता रहा।
कुल संचित एलपीजी अंडर-रिकवरी 31 मार्च 2026 के ₹48,200 करोड़ से बढ़कर 30 जून 2026 तक ₹61,900 करोड़ हो गई — यानी महज़ एक तिमाही में ₹13,700 करोड़ की वृद्धि। यह ऐसे समय में आया है जब रिफाइनिंग मार्जिन में सुधार के संकेत मिल रहे थे, लेकिन मार्केटिंग घाटे ने उस राहत को खा लिया।
पश्चिम एशिया संकट और अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उछाल
इस तेज़ वृद्धि की मुख्य वजह पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में आई रुकावट रही, जिसने वैश्विक एलपीजी आपूर्ति को अभूतपूर्व रूप से प्रभावित किया। अंतरराष्ट्रीय एलपीजी बेंचमार्क सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस (सऊदी सीपी) वित्त वर्ष 2025-26 के औसत $530 प्रति मीट्रिक टन से बढ़कर Q1 FY27 में $785 प्रति मीट्रिक टन पर पहुँच गया — लगभग 50 प्रतिशत की उछाल। इससे आयात लागत और खुदरा बिक्री मूल्य के बीच की खाई काफी चौड़ी हो गई।
गौरतलब है कि भारत अपनी एलपीजी ज़रूरतों का लगभग 60 प्रतिशत आयात करता है। पश्चिम एशिया से आपूर्ति बाधित होने के बाद भारत ने अमेरिका और अन्य वैकल्पिक बाज़ारों से एलपीजी खरीद बढ़ाई, लेकिन इससे लैंडेड कॉस्ट (आयात लागत) में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
घरेलू कीमतों में संशोधन
बढ़ती खरीद लागत के दबाव को कम करने के लिए सरकार और तेल कंपनियों ने Q1 FY27 के दौरान 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में ₹89 की बढ़ोतरी की। इस कदम का उद्देश्य अंडर-रिकवरी का कुछ बोझ उपभोक्ताओं पर स्थानांतरित करना था, हालाँकि विश्लेषकों के अनुसार यह वृद्धि लागत अंतर को पूरी तरह पाटने के लिए पर्याप्त नहीं थी।
आगे राहत के संकेत
बाद के महीनों में आपूर्ति स्थिति में सुधार आने से अंतरराष्ट्रीय कीमतों में कुछ नरमी आई। जुलाई 2026 में सऊदी सीपी घटकर $592 प्रति मीट्रिक टन और अगस्त 2026 में $632 प्रति मीट्रिक टन पर आ गया। केयरएज रेटिंग्स के अनुसार, इस गिरावट के चलते Q2 FY27 में एलपीजी अंडर-रिकवरी में लगभग 40 प्रतिशत की क्रमिक कमी आने की उम्मीद है। हालाँकि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक स्थिति अनिश्चित बनी रहने से दीर्घकालिक राहत की गारंटी नहीं दी जा सकती।