क्या भारतीय तेल कंपनियां कम कीमतों और एलपीजी घाटे में कमी के चलते वित्त वर्ष 2026 में मजबूत आय करेंगी?

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क्या भारतीय तेल कंपनियां कम कीमतों और एलपीजी घाटे में कमी के चलते वित्त वर्ष 2026 में मजबूत आय करेंगी?

सारांश

भारतीय तेल कंपनियाँ वित्त वर्ष 2026 में तेल की कीमतों में कमी और एलपीजी घाटे में सुधार के चलते मजबूत आय की उम्मीद कर रही हैं। एचएसबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, इससे ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को लाभ होगा। जानिए इस रिपोर्ट में क्या खास है।

Key Takeaways

  • तेल की कीमतों में कमी से ओएमसी की आय में सुधार संभावित है।
  • एलपीजी घाटे में कमी से कंपनियों को अतिरिक्त लाभ मिलेगा।
  • ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन में स्थिरता देखी जा रही है।
  • आर्थिक कारणों से रूसी कच्चे तेल के मिश्रण में बदलाव संभव है।
  • कम तेल की कीमतें उधारी की जरूरतें घटाएंगी।

नई दिल्ली, 27 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (ओएमसी) चालू वित्त वर्ष (वित्त वर्ष 26) में तेल की घटती कीमतों और एलपीजी घाटे में कमी के चलते मजबूत आय प्राप्त करेंगी।

एचएसबीसी ग्लोबल इन्वेस्टमेंट रिसर्च ने जानकारी दी है कि, "तेल की कम कीमतों और बड़े पूंजीगत व्यय योजनाओं के कारण ओएमसी के पास अब सुरक्षा का एक बड़ा मार्जिन है, जिससे हमें विश्वास है कि आय का एक मानक स्तर (अनुमानित) बना रहेगा।"

तेल की कम कीमतें मजबूत ऑटो फ्यूल मार्केटिंग मार्जिन (वर्तमान में 5-9 रुपए प्रति लीटर) को समर्थन दे रही हैं और यह वित्त वर्ष 26 की आय के लिए एक सकारात्मक संकेत है।

इसके अतिरिक्त, ग्लोबल एलपीजी की कीमतों में भी कमी आई है, जिससे वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही की तुलना में वर्तमान में प्रति सिलेंडर एलपीजी घाटे में 30-40 प्रतिशत की कमी आई है।

रिपोर्ट में कहा गया है, "इससे वित्त वर्ष 26 में अंडर-रिकवरी कम होगी। हालाँकि, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को एलपीजी के नुकसान की भरपाई के लिए सरकार द्वारा प्रावधानित 300 अरब रुपए के भुगतान तंत्र पर अधिक विवरण का इंतजार है (जिसका अभी तक कोई हिसाब नहीं है), ये रुझान आय पूर्वानुमानों के लिए ऊपर की ओर जोखिम पैदा करते हैं।"

ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (जीआरएम) दीर्घकालिक औसत से कम बना हुआ है, लेकिन प्रोडक्ट क्रैक स्वस्थ और वित्त वर्ष 25 से अधिक बना हुआ है। यह दर्शाता है कि यदि रूसी कच्चे तेल में अधिक बदलाव नहीं होता है, तो रिफाइनिंग लाभप्रदता पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर हो सकती है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही में पहले ही इन्वेंट्री लॉस दर्ज किया जा चुका है और ब्रेंट की कीमतें 65-67 डॉलर प्रति बैरल, स्थिर तेल कीमतों के साथ, इन्वेंट्री लॉस से होने वाले झटके की संभावना को कम कर रही हैं।

कम तेल की कीमतें कार्यशील पूंजी की आवश्यकता को भी कम करेंगी, जिससे उधारी की जरूरतें घटेंगी।

तिमाही आधार पर (पहली तिमाही में), एचपीसीएल/बीपीसीएल के लिए प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (पीएटी) 30 प्रतिशत/90 प्रतिशत बढ़ा, जबकि आईओसीएल के लिए इन्वेंट्री प्रभाव के कारण 20 प्रतिशत कम रहा।

रिपोर्ट में कहा गया है कि तीनों ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के लिए रूसी कच्चे तेल का मिश्रण अलग-अलग है, लेकिन सभी ने संकेत दिया है कि मिश्रण में कोई भी बदलाव पूरी तरह से आर्थिक कारणों से प्रेरित होगा।

वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में रूसी कच्चे तेल की छूट घटकर 1.5-2 डॉलर प्रति बैरल रह गई है और वित्त वर्ष 2025 की चौथी तिमाही में 120 अरब रुपये की तुलना में एलपीजी घाटा कम होकर 80 अरब रुपए रह गया है। साथ ही मार्केटिंग मार्जिन में सुधार हुआ है।

रिपोर्ट में कहा गया है, "कच्चे तेल की कम कीमतों के कारण आय में वृद्धि को देखते हुए हम मार्केटिंग मार्जिन का अनुमान बढ़ा रहे हैं।"

Point of View

यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि हम देश की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए तेल कंपनियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करें। यह रिपोर्ट हमें अवसर और चुनौतियों दोनों का संकेत देती है।
NationPress
30/08/2025

Frequently Asked Questions

क्या एलपीजी की कीमतों में कमी का ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर असर पड़ेगा?
हाँ, एलपीजी की कीमतों में कमी से ओएमसी के घाटे में कमी आएगी, जिससे उनकी आय में सुधार होगा।
तेल की कीमतों में गिरावट का क्या प्रभाव है?
तेल की कीमतों में गिरावट से ऑटो फ्यूल मार्केटिंग मार्जिन में सुधार होगा और कंपनियों की आय बढ़ेगी।