कमर्शियल एलपीजी ₹183.50 सस्ता: विपक्ष का पलटवार — 'पहले दाम बढ़ाओ, फिर राहत का नाटक'
सारांश
मुख्य बातें
1 जुलाई 2026 को सरकार ने कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में ₹183.50 की कटौती की, जिससे होटल, ढाबा और छोटे व्यवसायों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। हालाँकि, विपक्षी दलों ने इस कदम पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे 'राहत का दिखावा' करार दिया और कहा कि जनता सरकार की असली नीयत भलीभाँति समझती है।
कटौती का ब्यौरा
जुलाई माह के पहले दिन लागू हुई इस कटौती के बाद कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर पहले की तुलना में करीब ₹184 सस्ता मिलेगा। यह कटौती केवल कमर्शियल श्रेणी तक सीमित है — घरेलू सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
कांग्रेस का पलटवार
लखनऊ से कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने कटाक्ष करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) पहले लोगों की आँखें छीनती है और फिर चश्मा दान करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पहले गैस के दाम बढ़ाती है और बाद में चंद रुपए की कटौती कर मरहम लगाने का काम करती है। राजपूत ने कहा, 'महंगाई से लोगों की कमर टूट चुकी है, खासकर जो कमर्शियल गैस का इस्तेमाल करते हैं — भले ही BJP कितनी भी कोशिश करे, जनता सब जानती है।'
सपा और राजद की तीखी प्रतिक्रिया
समाजवादी पार्टी के नेता फखरुल हसन चांद ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतें घटने पर भी पेट्रोल और डीज़ल के दाम नहीं घटाए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि गैस की किल्लत होने पर दाम बढ़ जाते हैं, लेकिन स्थिति सामान्य होने पर कम नहीं होते।
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद सुधाकर सिंह ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि पहले गैस की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए — कटौती का फायदा तभी होगा जब सिलेंडर मिले। उन्होंने स्वीकार किया कि कटौती होना अच्छी बात है, लेकिन ज़मीनी आपूर्ति की स्थिति पर सवाल उठाया।
RJD प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि सरकार पहले कीमतें बढ़ाती है और फिर मामूली कटौती को बड़ी उपलब्धि बताती है। उन्होंने महंगाई के व्यापक संदर्भ में इस कदम को अपर्याप्त बताया।
RJD स्थापना दिवस का संदर्भ
मृत्युंजय तिवारी ने यह भी बताया कि RJD अपना स्थापना दिवस 5 जुलाई की जगह 1 जुलाई को पटना में मुख्य कार्यक्रम के रूप में मना रहा है। यह आयोजन राज्य के सभी जिलों में भी आयोजित किया जा रहा है।
आगे क्या
विपक्षी दलों की एकजुट आलोचना यह संकेत देती है कि ईंधन मूल्य नीति आगामी राजनीतिक बहसों में केंद्रीय मुद्दा बनी रहेगी। घरेलू एलपीजी और पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों पर राहत की माँग अभी भी बरकरार है।