एलपीजी कीमतें: भारत में रसोई गैस की दरें दुनिया में सबसे कम, पेट्रोलियम मंत्रालय का दावा
सारांश
मुख्य बातें
पेट्रोलियम मंत्रालय ने 7 जून 2026 को कहा कि भारत में घरेलू रसोई गैस (एलपीजी) की कीमतें पड़ोसी देशों के साथ-साथ अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे विकसित देशों की तुलना में भी काफी कम हैं। मंत्रालय के अनुसार, वास्तविक आपूर्ति लागत ₹1,600 प्रति सिलेंडर से अधिक हो जाने के बावजूद उपभोक्ताओं को यह सुविधा नियंत्रित दरों पर दी जा रही है।
उपभोक्ताओं को कितना देना पड़ता है
मंत्रालय के बयान के अनुसार, दिल्ली में एक सामान्य उपभोक्ता 14.2 किलोग्राम का घरेलू सिलेंडर ₹942 में खरीद सकता है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को प्रत्येक वर्ष पहले चार रिफिल पर ₹300 प्रति सिलेंडर की प्रत्यक्ष सब्सिडी दी जाती है, जिससे उनकी प्रभावी कीमत घटकर लगभग ₹642 प्रति सिलेंडर रह जाती है।
गौरतलब है कि गैर-उज्ज्वला परिवारों को भी बाज़ार-आधारित वास्तविक लागत से लगभग ₹700 कम पर सिलेंडर मिलता है। अलग-अलग स्थानों पर वितरण लागत के कारण कीमतों में मामूली अंतर संभव है।
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेज़ उछाल
भारत अपनी एलपीजी ज़रूरतों का लगभग 60 प्रतिशत आयात करता है। इसका आयात मूल्य सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस (Saudi Contract Price) पर आधारित होता है, जो हर महीने की शुरुआत में सऊदी अरब द्वारा निर्धारित किया जाता है।
मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार, फरवरी 2026 में एलपीजी का अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क मूल्य लगभग $543 प्रति टन था। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने के बाद अप्रैल में यह बढ़कर $775 प्रति टन और जून में लगभग $790 प्रति टन हो गया — यानी फरवरी के स्तर की तुलना में लगभग 46 प्रतिशत की वृद्धि। मंत्रालय ने कहा कि इसी कारण आयातित एलपीजी की घरेलू लागत भी बढ़ी है।
घरेलू और वाणिज्यिक सिलेंडर में अंतर
वाणिज्यिक सिलेंडर — जो होटलों और व्यवसायों में उपयोग होता है — की कीमत हर महीने अंतरराष्ट्रीय बाज़ार के अनुरूप संशोधित की जाती है। इसके विपरीत, घरेलू सिलेंडर की कीमत हर महीने सीधे नहीं बदली जाती। यह नीतिगत अंतर सरकार की उपभोक्ता-संरक्षण प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की स्थिति
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि उज्ज्वला लाभार्थियों को मिलने वाली सब्सिडी सहायता पहले की तरह जारी है। कोई भी परिवार अपनी ज़रूरत के अनुसार ₹942 प्रति सिलेंडर की दर से असीमित सिलेंडर खरीद सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में अस्थिरता बनी हुई है और घरेलू उपभोक्ताओं पर मूल्य वृद्धि का दबाव बढ़ रहा है।