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एलपीजी कीमतें: भारत में रसोई गैस की दरें दुनिया में सबसे कम, पेट्रोलियम मंत्रालय का दावा

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एलपीजी कीमतें: भारत में रसोई गैस की दरें दुनिया में सबसे कम, पेट्रोलियम मंत्रालय का दावा

सारांश

वैश्विक एलपीजी बेंचमार्क फरवरी से अब तक 46% उछल चुका है और आपूर्ति लागत ₹1,600 पार कर गई है — फिर भी भारत सरकार घरेलू उपभोक्ताओं को ₹942 और उज्ज्वला लाभार्थियों को ₹642 में सिलेंडर दे रही है। यह अंतर सब्सिडी के बोझ और ऊर्जा नीति की असली परीक्षा है।

मुख्य बातें

पेट्रोलियम मंत्रालय ने 7 जून 2026 को कहा कि भारत में एलपीजी की दरें अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और पड़ोसी देशों से कम हैं।
घरेलू सिलेंडर ( 14.2 किग्रा ) की वास्तविक आपूर्ति लागत ₹1,600 से अधिक; उपभोक्ता को ₹942 में मिल रहा है।
उज्ज्वला योजना लाभार्थियों को सालाना पहले 4 रिफिल पर ₹300 प्रति सिलेंडर सब्सिडी; प्रभावी दर ₹642 ।
अंतरराष्ट्रीय एलपीजी बेंचमार्क फरवरी के $543/टन से बढ़कर जून में $790/टन — 46% की वृद्धि।
भारत अपनी एलपीजी ज़रूरत का लगभग 60% आयात करता है; कीमत सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस पर आधारित।

पेट्रोलियम मंत्रालय ने 7 जून 2026 को कहा कि भारत में घरेलू रसोई गैस (एलपीजी) की कीमतें पड़ोसी देशों के साथ-साथ अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे विकसित देशों की तुलना में भी काफी कम हैं। मंत्रालय के अनुसार, वास्तविक आपूर्ति लागत ₹1,600 प्रति सिलेंडर से अधिक हो जाने के बावजूद उपभोक्ताओं को यह सुविधा नियंत्रित दरों पर दी जा रही है।

उपभोक्ताओं को कितना देना पड़ता है

मंत्रालय के बयान के अनुसार, दिल्ली में एक सामान्य उपभोक्ता 14.2 किलोग्राम का घरेलू सिलेंडर ₹942 में खरीद सकता है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को प्रत्येक वर्ष पहले चार रिफिल पर ₹300 प्रति सिलेंडर की प्रत्यक्ष सब्सिडी दी जाती है, जिससे उनकी प्रभावी कीमत घटकर लगभग ₹642 प्रति सिलेंडर रह जाती है।

गौरतलब है कि गैर-उज्ज्वला परिवारों को भी बाज़ार-आधारित वास्तविक लागत से लगभग ₹700 कम पर सिलेंडर मिलता है। अलग-अलग स्थानों पर वितरण लागत के कारण कीमतों में मामूली अंतर संभव है।

अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेज़ उछाल

भारत अपनी एलपीजी ज़रूरतों का लगभग 60 प्रतिशत आयात करता है। इसका आयात मूल्य सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस (Saudi Contract Price) पर आधारित होता है, जो हर महीने की शुरुआत में सऊदी अरब द्वारा निर्धारित किया जाता है।

मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार, फरवरी 2026 में एलपीजी का अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क मूल्य लगभग $543 प्रति टन था। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने के बाद अप्रैल में यह बढ़कर $775 प्रति टन और जून में लगभग $790 प्रति टन हो गया — यानी फरवरी के स्तर की तुलना में लगभग 46 प्रतिशत की वृद्धि। मंत्रालय ने कहा कि इसी कारण आयातित एलपीजी की घरेलू लागत भी बढ़ी है।

घरेलू और वाणिज्यिक सिलेंडर में अंतर

वाणिज्यिक सिलेंडर — जो होटलों और व्यवसायों में उपयोग होता है — की कीमत हर महीने अंतरराष्ट्रीय बाज़ार के अनुरूप संशोधित की जाती है। इसके विपरीत, घरेलू सिलेंडर की कीमत हर महीने सीधे नहीं बदली जाती। यह नीतिगत अंतर सरकार की उपभोक्ता-संरक्षण प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की स्थिति

मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि उज्ज्वला लाभार्थियों को मिलने वाली सब्सिडी सहायता पहले की तरह जारी है। कोई भी परिवार अपनी ज़रूरत के अनुसार ₹942 प्रति सिलेंडर की दर से असीमित सिलेंडर खरीद सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में अस्थिरता बनी हुई है और घरेलू उपभोक्ताओं पर मूल्य वृद्धि का दबाव बढ़ रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह पूरी तस्वीर नहीं है — ₹1,600 की आपूर्ति लागत और ₹942 की उपभोक्ता कीमत के बीच का अंतर सरकारी खज़ाने पर भारी सब्सिडी बोझ डालता है, जिसका ज़िक्र बयान में नहीं है। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क में 46% की वृद्धि के बाद भी घरेलू कीमतें स्थिर रखना राजनीतिक दृष्टि से समझ में आता है, लेकिन यह तेल कंपनियों के वित्तीय स्वास्थ्य पर सवाल खड़े करता है। उज्ज्वला योजना की सब्सिडी केवल साल के पहले चार सिलेंडर तक सीमित है — यानी जो परिवार अधिक गैस इस्तेमाल करते हैं, उन्हें बाकी सिलेंडर पूरी दर पर खरीदने पड़ते हैं, जो गरीब परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बनी रहती है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में एलपीजी सिलेंडर की कीमत अभी कितनी है?
दिल्ली में 14.2 किलोग्राम का घरेलू एलपीजी सिलेंडर सामान्य उपभोक्ता को ₹942 में मिलता है। उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को ₹300 प्रति सिलेंडर सब्सिडी मिलती है, जिससे उनकी प्रभावी कीमत लगभग ₹642 रह जाती है।
उज्ज्वला योजना में एलपीजी सब्सिडी कितनी मिलती है?
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को हर साल पहले चार रिफिल पर ₹300 प्रति सिलेंडर की प्रत्यक्ष सब्सिडी सीधे उनके बैंक खाते में मिलती है। इससे उनकी प्रभावी एलपीजी दर ₹642 प्रति सिलेंडर हो जाती है।
एलपीजी की वास्तविक आपूर्ति लागत और उपभोक्ता मूल्य में इतना अंतर क्यों है?
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार घरेलू एलपीजी की वास्तविक आपूर्ति लागत ₹1,600 प्रति सिलेंडर से अधिक हो गई है, जबकि उपभोक्ता को यह ₹942 में दिया जा रहा है। यह अंतर सरकारी नीति के तहत उपभोक्ताओं को दी जाने वाली सब्सिडी और मूल्य नियंत्रण के कारण है।
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में एलपीजी की कीमतें इतनी क्यों बढ़ीं?
मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार, फरवरी 2026 में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने के बाद एलपीजी का अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क $543 प्रति टन से बढ़कर जून में $790 प्रति टन हो गया — करीब 46% की वृद्धि। भारत अपनी ज़रूरत का 60% एलपीजी आयात करता है, इसलिए इस वृद्धि का सीधा असर आपूर्ति लागत पर पड़ा।
घरेलू और वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर की कीमत तय करने का तरीका अलग क्यों है?
वाणिज्यिक सिलेंडर (होटल, रेस्तराँ, व्यवसाय) की कीमत हर महीने अंतरराष्ट्रीय बाज़ार के अनुसार संशोधित की जाती है। घरेलू सिलेंडर की कीमत हर महीने नहीं बदली जाती और इसे नियंत्रित दर पर रखा जाता है ताकि आम परिवारों पर वैश्विक उतार-चढ़ाव का तत्काल असर न पड़े।
राष्ट्र प्रेस
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