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उज्ज्वला योजना: ₹1,200 के बाज़ार भाव में गरीब परिवारों को सिलेंडर मिल रहा ₹613 में, सरकार दे रही ₹587 की सब्सिडी

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उज्ज्वला योजना: ₹1,200 के बाज़ार भाव में गरीब परिवारों को सिलेंडर मिल रहा ₹613 में, सरकार दे रही ₹587 की सब्सिडी

सारांश

वैश्विक बाज़ार में एलपीजी ₹1,200 प्रति सिलेंडर पहुँच चुकी है, लेकिन उज्ज्वला लाभार्थियों को यही सिलेंडर ₹613 में मिल रहा है। सरकार ₹587 की सब्सिडी और 2025-26 में ₹30,000 करोड़ का बोझ उठाकर गरीब परिवारों को ईरान युद्ध की मूल्य वृद्धि से बचा रही है।

मुख्य बातें

उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को 14.2 किलोग्राम का एलपीजी सिलेंडर ₹613 में मिल रहा है, जबकि वैश्विक बाज़ार भाव ₹1,200 प्रति सिलेंडर है।
सरकार प्रति सिलेंडर ₹587 की सब्सिडी दे रही है; 2025-26 में एलपीजी सब्सिडी का कुल बोझ ₹30,000 करोड़ है।
तेल विपणन कंपनियों की कम वसूली 2024-25 के ₹41,338 करोड़ से बढ़कर 2025-26 में ₹60,000 करोड़ होने का अनुमान है।
भारत में आम उपभोक्ता ₹913 चुकाते हैं — श्रीलंका ( ₹1,241 ), नेपाल ( ₹1,207 ) और पाकिस्तान ( ₹1,046 ) से काफी कम।
पिछले 3 दिनों में 1.22 करोड़ सिलेंडर डिलीवर; घरेलू एलपीजी उत्पादन बढ़ाकर 52 टीएमटी/दिन किया गया।

पेट्रोलियम मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने 1 जून 2026 को बताया कि वैश्विक बाज़ार में एलपीजी की कीमत बढ़कर ₹1,200 प्रति सिलेंडर हो जाने के बावजूद, उज्ज्वला योजना के लाभार्थी परिवारों को 14.2 किलोग्राम का सिलेंडर केवल ₹613 में मिल रहा है। सरकार प्रति सिलेंडर ₹587 की सब्सिडी देकर यह अंतर वहन कर रही है — यानी लाभार्थी बाज़ार मूल्य का लगभग आधा ही चुका रहे हैं।

सब्सिडी का दायरा और वित्तीय भार

आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, 2024-25 में तेल विपणन कंपनियों की कम वसूली ₹41,338 करोड़ थी। मध्य पूर्व संघर्ष के चलते कीमतों में आई तेज़ वृद्धि के कारण यह आँकड़ा 2025-26 में बढ़कर ₹60,000 करोड़ तक पहुँचने का अनुमान है। घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सरकार ने 2025-26 के दौरान एलपीजी पर ₹30,000 करोड़ की सब्सिडी दी है।

अधिकारी ने स्पष्ट किया कि घरेलू सिलेंडर की कीमत अंतरराष्ट्रीय मानक से सीधे नहीं जुड़ी है — यही इसकी सुरक्षा-कवच है। वहीं, कमर्शियल सिलेंडर की कीमत हर महीने अंतरराष्ट्रीय दरों के अनुसार संशोधित होती है।

पड़ोसी देशों से तुलना

भारत में आम घरेलू उपभोक्ताओं को एलपीजी सिलेंडर के लिए ₹913 चुकाने पड़ते हैं, जबकि उज्ज्वला लाभार्थियों के लिए यह दर ₹613 है। तुलनात्मक रूप से, श्रीलंका में प्रति सिलेंडर ₹1,241, नेपाल में ₹1,207 और पाकिस्तान में ₹1,046 खर्च करने पड़ते हैं। यह आँकड़े दर्शाते हैं कि भारत में एलपीजी की कीमत पड़ोसी देशों की तुलना में उल्लेखनीय रूप से कम है।

आपूर्ति की स्थिति सामान्य

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के नवीनतम अपडेट के अनुसार, पिछले 3 दिनों में लगभग 1.21 करोड़ सिलेंडरों की बुकिंग के मुकाबले लगभग 1.22 करोड़ एलपीजी सिलेंडर घरों तक पहुँचाए गए हैं — यानी आपूर्ति माँग से थोड़ी अधिक है।

गुरुवार को ऑनलाइन एलपीजी बुकिंग में लगभग 99 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। अवैध व्यापार रोकने के लिए उपभोक्ताओं के पंजीकृत मोबाइल नंबरों पर आधारित प्रमाणीकरण कोड (डीएसी) डिलीवरी में भी लगभग 96 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

घबराहट में खरीदारी न करें: सरकार की अपील

मंत्रालय ने नागरिकों से अपील की है कि वे पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की घबराहट में खरीदारी से बचें। देश की सभी तेल रिफाइनरियाँ पर्याप्त कच्चे तेल के भंडार के साथ उच्च क्षमता पर काम कर रही हैं। घरेलू खपत पूरी करने के लिए रिफाइनरियों से घरेलू एलपीजी उत्पादन बढ़ाकर लगभग 52 टीएमटी/दिन कर दिया गया है।

इस वर्ष मई के दौरान कई ज़िलों में पेट्रोल और डीजल की बिक्री में 30 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई। सरकार ने अफवाहों से सावधान रहने और सही जानकारी के लिए केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करने की सलाह दी है। आने वाले हफ्तों में सब्सिडी व्यवस्था की समीक्षा और आपूर्ति की निगरानी जारी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 करोड़ की सब्सिडी और ₹60,000 करोड़ की कम वसूली का यह समीकरण दर्शाता है कि सरकार वैश्विक ऊर्जा संकट का बोझ फिलहाल राजकोष पर उठा रही है — लेकिन यह नीति कब तक टिकाऊ है, यह सवाल अनुत्तरित है। घरेलू सिलेंडर की कीमत को अंतरराष्ट्रीय दरों से अलग रखना गरीब परिवारों के लिए राहत है, पर इससे तेल कंपनियों की बैलेंस शीट पर दबाव बढ़ता है। पड़ोसी देशों से तुलना सरकार के पक्ष में है, लेकिन असली परीक्षा यह है कि बढ़ती कम वसूली के बीच यह सब्सिडी ढाँचा अगले बजट चक्र में किस रूप में बचेगा।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उज्ज्वला योजना के तहत एलपीजी सिलेंडर कितने में मिलता है?
उज्ज्वला योजना के लाभार्थी परिवारों को 14.2 किलोग्राम का एलपीजी सिलेंडर ₹613 में मिलता है, जबकि वैश्विक बाज़ार में इसकी कीमत ₹1,200 प्रति सिलेंडर है। सरकार ₹587 प्रति सिलेंडर की सब्सिडी देकर यह अंतर वहन करती है।
सरकार एलपीजी सब्सिडी पर कितना खर्च कर रही है?
2025-26 में सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए एलपीजी पर ₹30,000 करोड़ की सब्सिडी दी है। इसके अलावा, मध्य पूर्व संघर्ष के कारण कीमतों में वृद्धि से तेल विपणन कंपनियों की कम वसूली 2025-26 में ₹60,000 करोड़ तक पहुँचने का अनुमान है।
भारत में एलपीजी की कीमत पड़ोसी देशों से कितनी कम है?
भारत में आम उपभोक्ता ₹913 और उज्ज्वला लाभार्थी ₹613 चुकाते हैं, जबकि श्रीलंका में ₹1,241, नेपाल में ₹1,207 और पाकिस्तान में ₹1,046 प्रति सिलेंडर खर्च होते हैं। यानी भारत में एलपीजी की दर इन तीनों पड़ोसी देशों से काफी कम है।
क्या देश में एलपीजी की आपूर्ति सामान्य है?
हाँ, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार पिछले 3 दिनों में 1.22 करोड़ सिलेंडर डिलीवर किए गए, जो बुकिंग (1.21 करोड़) से अधिक है। रिफाइनरियों से घरेलू एलपीजी उत्पादन बढ़ाकर लगभग 52 टीएमटी/दिन कर दिया गया है।
घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में अंतर क्यों है?
कमर्शियल सिलेंडर की कीमत हर महीने अंतरराष्ट्रीय मानक के अनुसार संशोधित होती है, जबकि घरेलू सिलेंडर की कीमत इससे सीधे नहीं जुड़ी है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारी के अनुसार, यही व्यवस्था घरेलू उपभोक्ताओं को वैश्विक मूल्य उतार-चढ़ाव से बचाती है।
राष्ट्र प्रेस
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