उज्ज्वला योजना: सब्सिडी वाले LPG सिलेंडर सालाना 9 से घटाकर 4 किए, वैश्विक कीमतों का दबाव
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 8 जून 2026 को घोषणा की कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत मिलने वाले सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडरों की संख्या प्रति वर्ष नौ से घटाकर चार कर दी गई है। वैश्विक ईंधन कीमतों में तीव्र उछाल और तेल विपणन कंपनियों के बढ़ते घाटे के चलते सरकार ने यह कदम सब्सिडी लागत पर अंकुश लगाने के लिए उठाया है। इस बदलाव से प्रति परिवार वार्षिक सब्सिडी सहायता प्रभावी रूप से ₹1,200 तक सीमित हो जाएगी।
नई व्यवस्था में क्या बदला
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव प्रवीण खानूजा ने मीडिया ब्रीफिंग में बताया कि पात्र PMUY लाभार्थियों को 14.2 किलोग्राम के सिलेंडर पर ₹300 की सब्सिडी मिलती रहेगी, लेकिन यह सुविधा अब केवल वर्ष में पहले चार रिफिल तक ही मान्य होगी। पाँचवें सिलेंडर से लाभार्थी को बाज़ार मूल्य पर खरीदना होगा।
वर्तमान में नई दिल्ली में PMUY उपभोक्ता 14.2 किलोग्राम का सिलेंडर ₹642 में खरीद रहे हैं, जबकि सामान्य उपभोक्ताओं के लिए यही सिलेंडर ₹942 का है। खानूजा ने स्पष्ट किया कि गैर-उज्ज्वला उपभोक्ताओं को भी सरकारी हस्तक्षेप के ज़रिए वैश्विक दरों के पूर्ण प्रभाव से बचाया जा रहा है।
घाटे की असली वजह
मंत्रालय के अनुसार, घरेलू एलपीजी आपूर्ति की लागत बढ़कर प्रति सिलेंडर ₹1,600 से अधिक हो चुकी है। तेल विपणन कंपनियाँ इस समय बेचे गए हर सिलेंडर पर लगभग ₹700 का घाटा उठा रही हैं। मंत्रालय ने बताया कि यह नुकसान मुख्यतः सऊदी अनुबंध मूल्य (CP) में आई उछाल से जुड़ा है, जो फरवरी से अब तक लगभग 46 प्रतिशत बढ़ चुका है।
गौरतलब है कि पिछले सप्ताह ही घरेलू कुकिंग गैस की कीमतों में ₹29 प्रति सिलेंडर की वृद्धि की गई थी, जो पिछले तीन महीनों में दूसरी बार हुई है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में अस्थिरता का दौर जारी है।
आम जनता पर असर
PMUY मुख्यतः देश के आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवारों — विशेषकर ग्रामीण महिलाओं — को स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई थी। सब्सिडी सिलेंडरों की संख्या घटने से उन परिवारों पर सबसे अधिक बोझ पड़ेगा जो पाँचवें सिलेंडर से आगे बाज़ार मूल्य वहन करने में सक्षम नहीं हैं। आलोचकों का कहना है कि यह कटौती योजना के मूल उद्देश्य — ग़रीब परिवारों को धुएँ से मुक्ति — को कमज़ोर कर सकती है।
यह ऐसे समय में आया है जब ग्रामीण भारत में एलपीजी की पहुँच और उपयोग दर पहले से ही चुनौतीपूर्ण रही है, और कई लाभार्थी परिवार ऊँची कीमतों के कारण पहले ही लकड़ी-कोयले जैसे पारंपरिक ईंधन की ओर लौट रहे हैं।
क्या होगा आगे
सरकार ने फिलहाल यह नहीं बताया कि नई सीमा कब से लागू होगी और मौजूदा लाभार्थियों को संक्रमण के लिए कोई राहत दी जाएगी या नहीं। तेल विपणन कंपनियों पर वैश्विक ऊर्जा लागत का दबाव बना रहा तो आने वाले महीनों में कीमतों में और संशोधन से इनकार नहीं किया जा सकता।