घरेलू LPG सिलेंडर ₹29 महंगा: NDA नेताओं ने वैश्विक ऊर्जा संकट को बताया कारण
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्रियों और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के नेताओं ने घरेलू एलपीजी (LPG) सिलेंडर की कीमतों में हुई ताज़ा बढ़ोतरी के लिए वैश्विक ऊर्जा संकट और अंतरराष्ट्रीय ईंधन बाज़ार में उथल-पुथल को ज़िम्मेदार ठहराया है। रविवार, 7 जून को 14.2 किलोग्राम के घरेलू सिलेंडर की कीमत में ₹29 की वृद्धि के बाद नई दिल्ली में इसका दाम ₹913 से बढ़कर ₹942 हो गया। यह बढ़ोतरी मार्च में हुई ₹60 की वृद्धि के बाद आई है।
मुख्य घटनाक्रम
उद्योग सूत्रों के अनुसार, सरकारी तेल विपणन कंपनियों को रियायती घरेलू एलपीजी की बिक्री पर लगातार घाटा हो रहा था। अनुमानों के मुताबिक, हालिया संशोधन से पहले प्रति सिलेंडर लगभग ₹703 का नुकसान हो रहा था। वैश्विक स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और कच्चे तेल की ऊँची कीमतों ने इस स्थिति को और गंभीर बना दिया।
सरकार की प्रतिक्रिया
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने इस बढ़ोतरी को वैश्विक रुझान का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा, 'अगर हम पूरी दुनिया को देखें, तो पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें 30% से 130% तक बढ़ गई हैं, और एलपीजी व सीएनजी की कीमतें 30% से 300% तक बढ़ गई हैं। वैश्विक संकट के कारण, सभी देश किसी न किसी तरह से प्रभावित हो रहे हैं।'
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने इस स्थिति को अस्थायी करार दिया। उनके अनुसार, 'यह एक अस्थायी समस्या है और इसे स्थायी मुद्दा नहीं समझा जाना चाहिए।' उन्होंने चल रहे वैश्विक युद्ध-जनित संकट को इसकी प्रमुख वजह बताया।
बिहार के मंत्री संतोष कुमार सुमन ने आश्वासन दिया कि प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री स्थिति को संतुलित करने की दिशा में काम करेंगे। उन्होंने कहा, 'यदि कीमतें बढ़ी हैं, तो हमें विश्वास है कि स्थिति को संतुलित करने के प्रयास किए जाएंगे।'
जनता दल-यूनाइटेड (JD-U) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि वैश्विक परिस्थितियाँ सभी अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित कर रही हैं और भारत के नागरिक अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में हैं।
आम जनता पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब महँगाई का बोझ पहले से ही मध्यम और निम्न-मध्यम वर्गीय परिवारों पर भारी है। गौरतलब है कि मार्च और जून की दोनों बढ़ोतरियों को मिलाकर इस वर्ष घरेलू सिलेंडर की कीमत में कुल ₹89 की वृद्धि हो चुकी है। पेट्रोल और डीजल भी उद्योग अनुमानों के अनुसार लागत मूल्य से कम पर बेचे जा रहे हैं, जिससे तेल कंपनियों पर दबाव बना हुआ है।
क्या होगा आगे
NDA नेताओं के बयानों से यह स्पष्ट नहीं होता कि सरकार निकट भविष्य में कोई राहत पैकेज या सब्सिडी बहाल करने की योजना बना रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें स्थिर नहीं होतीं, तब तक घरेलू ऊर्जा कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।