कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर 1 जून से महंगा: दिल्ली में ₹42, कोलकाता में ₹53.50 की बढ़ोतरी
सारांश
मुख्य बातें
तेल मार्केटिंग कंपनियों ने 1 जून 2026 से 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में एक बार फिर इजाफा कर दिया है। नई दिल्ली में यह सिलेंडर अब ₹3,113.50 प्रति सिलेंडर का हो गया है — यानी पिछली दर से ₹42 की सीधी बढ़ोतरी। ईंधन और परिवहन लागत में वृद्धि को इस मूल्य-संशोधन का कारण बताया गया है।
प्रमुख शहरों में नई कीमतें
कोलकाता में सबसे अधिक ₹53.50 की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे वहाँ 19 किलो कमर्शियल सिलेंडर की कीमत ₹3,255.50 प्रति सिलेंडर हो गई है। मुंबई में यह दर ₹3,024.50, चेन्नई में ₹3,232, हैदराबाद में ₹3,294 और पटना में ₹3,322 प्रति सिलेंडर निर्धारित की गई है।
पाँच महीनों में ₹1,400 से अधिक की छलांग
आँकड़ों के अनुसार, जनवरी 2026 में दिल्ली में 19 किलो कमर्शियल सिलेंडर की कीमत ₹1,691.50 थी। इसके बाद फरवरी में ₹49, मार्च में ₹115 और अप्रैल में एकमुश्त ₹993 की बढ़ोतरी की गई — जो एकल माह की सबसे बड़ी वृद्धि थी। अब जून की बढ़ोतरी जोड़ने के बाद, महज पाँच महीनों में कुल वृद्धि ₹1,400 से अधिक हो चुकी है। यह ऐसे समय में आया है जब होटल, ढाबा और छोटे रेस्तरां संचालकों की परिचालन लागत पहले से दबाव में है।
एफटीएल सिलेंडर और घरेलू उपभोक्ता
तेल मार्केटिंग कंपनियों ने 5 किलो वाले फ्री ट्रेड एलपीजी (FTL) सिलेंडर की कीमत में भी ₹11 की बढ़ोतरी की है। दिल्ली में FTL सिलेंडर अब ₹821.50 में मिलेगा। गौरतलब है कि घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में इस बार कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे घरेलू उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत बनी हुई है।
ईंधन की व्यापक मूल्यवृद्धि का संदर्भ
कमर्शियल एलपीजी की यह बढ़ोतरी ईंधन क्षेत्र में व्यापक मूल्य-संशोधन की कड़ी का हिस्सा है। 15 मई से कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) की कीमतों में चार अलग-अलग संशोधनों में कुल ₹6 प्रति किलो की बढ़ोतरी हो चुकी है, जिसमें ताज़ा संशोधन ₹2 प्रति किलो का था। इसके अलावा, हाल के हफ्तों में पेट्रोल की दरें ₹7.35 प्रति लीटर और डीजल की कीमतें कई चरणों में ₹7.53 प्रति लीटर बढ़ाई गई हैं।
आम जनता और व्यवसायों पर असर
कमर्शियल एलपीजी का सीधा असर होटल, रेस्तरां, ढाबा, कैटरिंग और छोटे खाद्य उद्यमों पर पड़ता है, जो बड़े पैमाने पर 19 किलो सिलेंडर पर निर्भर हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि लागत का यह बोझ अंततः खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों के रूप में उपभोक्ताओं तक पहुँच सकता है। आने वाले हफ्तों में तेल मार्केटिंग कंपनियाँ अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों की समीक्षा के आधार पर अगला मूल्य-संशोधन तय करेंगी।