30 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को लिखा पत्र, ऋतब्रत गुट के TMC दावों की जांच तुरंत पूरी करने की मांग

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को लिखा पत्र, ऋतब्रत गुट के TMC दावों की जांच तुरंत पूरी करने की मांग

सारांश

ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को सीधा संदेश दिया है — देरी अब बर्दाश्त नहीं। ऋतब्रत गुट दो बार समयसीमा मिलने के बाद भी चुप है, और TMC का तर्क है कि यह चुप्पी खुद एक स्वीकृति है। पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस फैसले के दूरगामी परिणाम हो सकते हैं।

मुख्य बातें

ममता बनर्जी ने 29 जुलाई 2026 को चुनाव आयोग (ECI) को पत्र लिखकर TMC पर ऋतब्रत बनर्जी गुट के दावों की जांच तुरंत पूरी करने की मांग की।
ऋतब्रत गुट को पहले 10 जुलाई , फिर 25 जुलाई 2026 तक समयसीमा दी गई, लेकिन दोनों बार कोई जवाब नहीं आया।
TMC का तर्क है कि जवाब न देने से 6 जुलाई 2026 के उनके पत्र की सभी बातें स्वतः स्वीकृत मानी जानी चाहिए।
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि बार-बार समय विस्तार से ऋतब्रत गुट को झूठे साक्ष्य जुटाने का मौका मिल रहा है।
इस विवाद के पश्चिम बंगाल की राजनीति पर गंभीर दूरगामी प्रभाव पड़ सकते हैं।

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी ने 29 जुलाई 2026 को भारत के चुनाव आयोग (ECI) को पत्र लिखकर मांग की कि ऋतब्रत बनर्जी गुट द्वारा TMC पर लगाए गए दावों की जांच बिना किसी और देरी के जल्द से जल्द पूरी की जाए। यह पत्र ऐसे समय में आया है जब ऋतब्रत गुट को आयोग द्वारा दो बार समय विस्तार दिए जाने के बाद भी कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया है।

मुख्य घटनाक्रम

ममता बनर्जी ने अपने पत्र में बताया कि चुनाव आयोग ने ऋतब्रत बनर्जी को पहले 10 जुलाई 2026 तक जवाब देने का समय दिया था, परंतु उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद ऋतब्रत गुट ने 15 दिन का अतिरिक्त समय मांगा, जिसे आयोग ने 13 जुलाई को स्वीकार करते हुए समयसीमा 25 जुलाई 2026 तक बढ़ा दी।

पत्र के अनुसार, 25 जुलाई की नई समयसीमा बीत जाने के बाद भी TMC को यह नहीं बताया गया कि ऋतब्रत गुट ने जवाब दिया है या नहीं, और यदि दिया भी है तो उसकी कोई प्रति TMC को नहीं सौंपी गई।

ममता बनर्जी का तर्क

ममता बनर्जी ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि दो बार समय विस्तार के बावजूद कोई जवाब न मिलने से यह माना जा सकता है कि 6 जुलाई 2026 के TMC के पत्र में उठाई गई सभी बातें और बयान स्वीकार कर लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि ऋतब्रत गुट 22 जून को लिखे गए अपने पत्रों से परे कोई नया मामला नहीं बना सकता।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आयोग द्वारा बार-बार समय दिए जाने के कारण ऋतब्रत बनर्जी और उनके समर्थक अपने मामले को मजबूत करने के लिए झूठे साक्ष्य जुटाने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि उनके मूल आरोपों में कोई ठोस आधार नहीं है।

समान अवसर और निष्पक्षता की मांग

ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग से अनुरोध किया कि दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का बराबरी का मौका मिलना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि TMC ने अपने सभी तर्क 6 जुलाई को ही आयोग के समक्ष प्रस्तुत कर दिए हैं और अब ऋतब्रत गुट को और अधिक समय देना न्यायसंगत नहीं होगा।

पत्र में उन्होंने लिखा कि इस मामले के पश्चिम बंगाल की राजनीति पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं, इसलिए आयोग को अपनी 2 जुलाई के पत्र में तय की गई प्रक्रिया के अनुसार जांच शीघ्र पूरी करनी चाहिए।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि यह विवाद TMC के भीतर उस गुटबाजी का हिस्सा है जिसमें ऋतब्रत बनर्जी गुट ने पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर दावा ठोका है। इस तरह के अंतर-पार्टी विवाद चुनाव आयोग के समक्ष पहले भी आ चुके हैं — जैसे शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के मामले — और इनके परिणाम किसी भी दल के लिए दूरगामी हो सकते हैं।

ममता बनर्जी ने अपने पत्र का समापन करते हुए कहा कि 'न्याय भरोसे पर टिका होता है' और आयोग से अपेक्षा जताई कि वह बिना किसी और विलंब के इस मामले का निपटारा करे।

आगे क्या

अब सभी की निगाहें चुनाव आयोग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि आयोग ऋतब्रत गुट को और समय नहीं देता और जांच प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो इसके नतीजे TMC की आंतरिक राजनीति और पश्चिम बंगाल के आगामी राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

उसकी आलोचना हुई थी; TMC मामले में भी बार-बार समय विस्तार से सवाल उठते हैं कि क्या आयोग सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के आंतरिक विवादों में एक समान मानदंड अपनाता है। ममता का 'न्याय भरोसे पर टिका होता है' वाला वाक्य सिर्फ आयोग के लिए नहीं, बल्कि उस जनता के लिए भी है जो देख रही है कि संस्थागत प्रक्रियाएँ किसके पक्ष में झुकती हैं। आयोग की अगली कार्रवाई यह तय करेगी कि क्या वह इस मामले को समयबद्ध तरीके से निपटा सकता है।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को यह पत्र क्यों लिखा?
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग से मांग की है कि TMC पर ऋतब्रत बनर्जी गुट के दावों की जांच बिना किसी और देरी के पूरी की जाए। ऋतब्रत गुट को दो बार समयसीमा दी गई — पहले 10 जुलाई, फिर 25 जुलाई 2026 — लेकिन दोनों बार कोई जवाब नहीं आया।
ऋतब्रत बनर्जी गुट का TMC पर क्या दावा है?
ऋतब्रत बनर्जी गुट ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और चुनाव चिह्न पर दावा ठोका है। यह विवाद चुनाव आयोग के समक्ष विचाराधीन है और इसकी जांच जारी है।
TMC ने ऋतब्रत गुट के जवाब न देने को किस रूप में देखा?
TMC का तर्क है कि दो बार समयसीमा बढ़ाने के बाद भी जवाब न देने से 6 जुलाई 2026 के उनके पत्र में उठाई गई सभी बातें स्वतः स्वीकृत मानी जानी चाहिए। ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि ऋतब्रत गुट 22 जून के अपने मूल पत्रों से परे कोई नया मामला नहीं बना सकता।
इस विवाद का पश्चिम बंगाल की राजनीति पर क्या असर पड़ सकता है?
ममता बनर्जी ने खुद अपने पत्र में स्वीकार किया है कि इस मामले के पश्चिम बंगाल में गंभीर राजनीतिक परिणाम हो सकते हैं। पार्टी के नाम और चिह्न पर फैसला TMC के संगठनात्मक ढांचे और आगामी चुनावी रणनीति को सीधे प्रभावित करेगा।
चुनाव आयोग अब इस मामले में आगे क्या कदम उठा सकता है?
चुनाव आयोग के पास विकल्प है कि वह ऋतब्रत गुट को और समय दिए बिना जांच प्रक्रिया आगे बढ़ाए और अपना फैसला सुनाए। ममता बनर्जी ने आयोग से अनुरोध किया है कि 2 जुलाई के अपने पत्र में तय की गई प्रक्रिया के अनुसार शीघ्र निर्णय लिया जाए।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 3 सप्ताह पहले
  4. 3 सप्ताह पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 2 महीने पहले