तृणमूल के ₹440 करोड़ के बैंक खाते फ्रीज, कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका दायर
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के तीन बैंक खाते पुलिस द्वारा फ्रीज किए जाने के बाद, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी ने सोमवार, 22 जून को कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका दायर की। पार्टी ने अदालत से हस्तक्षेप की माँग करते हुए यह स्पष्ट करने का अनुरोध किया कि किस अधिकार के तहत और किन आधारों पर ये खाते सीज किए गए। कथित तौर पर इन तीनों खातों में कुल ₹440 करोड़ जमा हैं।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद पार्टी के भीतर उपजे वित्तीय कलह से शुरू हुआ। राज्य विधानसभा चुनावों में करारी हार के बाद, तृणमूल कांग्रेस ने 5 जून को संगठनात्मक फेरबदल की घोषणा की और पूर्व सांसद सुभाषिश चक्रवर्ती को पार्टी का नया कोषाध्यक्ष नियुक्त किया। इसमें पूर्व कोषाध्यक्ष अरूप बिस्वास की जगह ली गई।
हालाँकि, अरूप बिस्वास ने एक निजी बैंक को हालिया पत्र लिखकर दावा किया कि वे अभी भी पार्टी के वैध कोषाध्यक्ष हैं। उन्होंने इससे पहले उसी बैंक को पत्र लिखकर कोलकाता की सेंट्रल प्लाजा शाखा में स्थित तृणमूल के तीन खातों को फ्रीज करने का अनुरोध किया था — यह कदम पार्टी के भीतर नेतृत्व विवाद के कारण उठाया गया था।
अरूप बिस्वास का पक्ष
अपने तीन-पृष्ठीय जवाब में अरूप बिस्वास ने पार्टी के आंतरिक वित्तीय लेनदेन पर कई गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि यद्यपि वे बहीखाता संभालते थे, परंतु सभी वित्तीय लेनदेन उनकी जानकारी के बिना किए गए। इस जवाब के बाद पार्टी नेतृत्व ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया।
बागी विधायकों की भूमिका
19 जून को तृणमूल के लगभग 10 बागी विधायकों ने बिधाननगर दक्षिण पुलिस स्टेशन पहुँचकर बैंक खातों को तत्काल फ्रीज करने का अनुरोध किया। इसके बाद पुलिस ने जाँच शुरू की और तीनों खाते सीज कर दिए।
तृणमूल के बागी विधायकों के नेता और राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने अरूप बिस्वास के पत्र का समर्थन करते हुए कहा, 'कौन जानता है कि उस खाते में अवैध कमीशन का पैसा है या नहीं। मैं अरूप बिस्वास से सहमत हूँ; इसकी जाँच होनी चाहिए।'
अदालत में सुनवाई
तृणमूल के वकीलों ने न्यायमूर्ति सौगता भट्टाचार्य की पीठ के समक्ष मामला दायर करने की अनुमति माँगी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। औपचारिक सुनवाई इस सप्ताह के अंत तक शुरू होने की संभावना है।
आगे क्या होगा
यह मामला तृणमूल कांग्रेस के लिए एक साथ कानूनी और संगठनात्मक संकट बन गया है। गौरतलब है कि चुनावी हार के बाद पार्टी पहले से ही आंतरिक दबाव में है, और ₹440 करोड़ के खातों पर कानूनी लड़ाई इस संकट को और गहरा कर सकती है। हाई कोर्ट का फैसला तय करेगा कि पुलिस की कार्रवाई वैध थी या नहीं।