3 अगस्त 2026
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टीएमसी में वित्तीय संकट: पूर्व कोषाध्यक्ष अरूप बिस्वास ने ₹675 करोड़ के बैंक खाते पर रोक की मांग की

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टीएमसी में वित्तीय संकट: पूर्व कोषाध्यक्ष अरूप बिस्वास ने ₹675 करोड़ के बैंक खाते पर रोक की मांग की

सारांश

TMC का संकट अब तिजोरी तक पहुँचा — पूर्व कोषाध्यक्ष अरूप बिस्वास ने ₹675 करोड़ के पार्टी खाते पर रोक की माँग कर दी। विधानसभा हार के बाद तीन गुटों में बँटी ममता बनर्जी की पार्टी अब वित्तीय नियंत्रण की जंग में भी उलझ गई है।

मुख्य बातें

पूर्व कोषाध्यक्ष अरूप बिस्वास ने 12 जून 2026 को बैंक को पत्र लिखकर TMC के ₹675 करोड़ के खाते पर लेनदेन-रोक की माँग की।
5 जून के संगठनात्मक फेरबदल में सुभाषिष चक्रवर्ती को नया कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया था, लेकिन बिस्वास ने खुद को अब भी वैध कोषाध्यक्ष बताया।
TMC अब तीन गुटों में विभाजित — बागी विधायक ( ऋतब्रत बनर्जी समर्थक), बागी सांसद (NCPI में विलय), और ममता बनर्जी नेतृत्व वाला गुट।
सुदीप बंद्योपाध्याय और काकोली घोष दस्तिदार समर्थक गुट TMC के चुनाव चिह्न पर दावा ठोकने की तैयारी में है।
अरूप बिस्वास गुरुवार को तीन बार समन टालने के बाद बिधाननगर दक्षिण पुलिस थाने में पेश हुए।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) का आंतरिक संकट अब सीधे पार्टी की वित्तीय धमनियों तक पहुँच गया है। पार्टी के पूर्व कोषाध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास ने 12 जून 2026 को एक निजी बैंक को पत्र लिखकर TMC के बैंक खाते में जमा ₹675 करोड़ पर तत्काल लेनदेन-रोक लगाने की माँग की। यह पत्र बैंक को 16 जून को प्राप्त हुआ और 18 जून को सार्वजनिक हुआ। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी में मचे घमासान के बीच यह कदम TMC की आंतरिक दरारों को और गहरा करता है।

पत्र में क्या कहा अरूप बिस्वास ने

बिस्वास ने अपने पत्र में बैंक को सूचित किया कि पार्टी के अधिकार और नियंत्रण को लेकर गंभीर विवाद जारी है। उन्होंने लिखा, 'मैं, अरूप बिस्वास, अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (AITC) के कोषाध्यक्ष के रूप में आपको सूचित कर रहा हूँ कि पार्टी के अधिकार और नियंत्रण को लेकर गंभीर विवाद चल रहा है। ऐसे में संगठन की निधि की सुरक्षा के लिए बैंक खाते में किसी भी प्रकार के डेबिट लेनदेन या संचालन संबंधी बदलाव की अनुमति न दी जाए, जब तक कि सक्षम प्राधिकारी की ओर से स्पष्ट निर्देश न मिल जाएँ।' उन्होंने यह भी अपील की कि उनके द्वारा पहले से हस्ताक्षरित चेकों के संभावित दुरुपयोग को भी रोका जाए।

नेतृत्व विवाद की जड़

5 जून 2026 को विधानसभा चुनाव में हार के बाद TMC ने संगठनात्मक फेरबदल करते हुए पूर्व सांसद सुभाषिष चक्रवर्ती को नया कोषाध्यक्ष नियुक्त किया था। हालाँकि बिस्वास ने अपने पत्र में दावा किया कि वह अब भी पार्टी के वैध कोषाध्यक्ष हैं। इस पर चक्रवर्ती ने कहा कि उन्हें इस पत्र की जानकारी नहीं है और उन्होंने स्पष्ट किया कि वह राज्य संगठन के कोषाध्यक्ष हैं, जबकि बिस्वास अखिल भारतीय स्तर के कोषाध्यक्ष थे। उल्लेखनीय है कि जब चक्रवर्ती से यह पूछा गया कि क्या राज्य और अखिल भारतीय संगठन के अलग-अलग बैंक खाते हैं, तो उन्होंने स्वीकार किया कि पार्टी का केवल एक ही बैंक खाता है — जो इस विवाद को और पेचीदा बनाता है।

तीन गुटों में बंटी TMC

विधानसभा चुनाव में हार के बाद TMC अब तीन धड़ों में विभाजित नजर आ रही है। पहला गुट बागी विधायकों का है, जिसका नेतृत्व विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के समर्थक कर रहे हैं और जो खुद को 'असली तृणमूल' बता रहे हैं। दूसरा गुट बागी सांसदों का है — सुदीप बंद्योपाध्याय और काकोली घोष दस्तिदार समर्थक सांसद, जो नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय कर चुके हैं और TMC के चुनाव चिह्न पर दावा ठोकने की कोशिश जारी रखे हैं। तीसरा गुट ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला है, जो पार्टी की मूल संरचना को थामे हुए है।

अरूप बिस्वास की राजनीतिक स्थिति

बिस्वास का यह कदम इसलिए भी राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है क्योंकि मौजूदा बगावत के दौरान उन्हें ममता बनर्जी का करीबी माना जाता रहा है। 5 जून के संगठनात्मक फेरबदल में उन्हें कोषाध्यक्ष पद से हटाया गया, लेकिन पार्टी महासचिव पद पर बरकरार रखा गया। इसके अलावा, अपने भाई स्वरूप बिस्वास की गिरफ्तारी और मेसी प्रकरण में पुलिस समन के बाद सार्वजनिक जीवन से दूर रहे अरूप बिस्वास गुरुवार को तीन बार समन टालने के बाद अंततः बिधाननगर दक्षिण पुलिस थाने में अधिकारियों के सामने पेश हुए। गौरतलब है कि चुनाव आयोग को सौंपी गई ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार इस विवादित खाते में लगभग ₹675 करोड़ जमा हैं।

आगे क्या होगा

अब सवाल यह है कि बैंक इस पत्र पर क्या रुख अपनाता है और क्या TMC का नेतृत्व विवाद न्यायिक या चुनाव आयोग के दरवाजे तक पहुँचता है। यह ऐसे समय में आया है जब पार्टी पहले से ही चुनाव चिह्न को लेकर कानूनी लड़ाई के मुहाने पर खड़ी है। TMC के आंतरिक संकट का यह वित्तीय आयाम पार्टी के भविष्य के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि संस्थागत विघटन का संकेत है। TMC का यह संकट उस पैटर्न को दोहराता है जो 2012 में NCP और 2023 में शिवसेना में देखा गया था, जहाँ पार्टी-विभाजन अंततः चुनाव चिह्न और संपत्ति की कानूनी लड़ाई में बदल गया। ₹675 करोड़ के खाते पर नियंत्रण की यह जंग बताती है कि TMC की दरारें अब वैचारिक नहीं, बल्कि संरचनात्मक हो चुकी हैं। चुनाव आयोग और न्यायालय अगला रणक्षेत्र बनेंगे — और उनका फैसला पश्चिम बंगाल की विपक्षी राजनीति का नक्शा फिर से खींच सकता है।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अरूप बिस्वास ने TMC के बैंक खाते पर रोक क्यों माँगी?
अरूप बिस्वास ने बैंक को लिखे पत्र में कहा कि पार्टी के नेतृत्व और नियंत्रण को लेकर गंभीर विवाद चल रहा है, जिससे यह स्पष्ट नहीं है कि खाते का संचालन करने का अधिकार किसके पास है। उन्होंने माँग की कि विवाद सुलझने तक किसी भी अनधिकृत व्यक्ति को निकासी या डेबिट लेनदेन की अनुमति न दी जाए।
TMC के इस बैंक खाते में कितनी राशि जमा है?
चुनाव आयोग को सौंपी गई ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, विवादित बैंक खाते में लगभग ₹675 करोड़ जमा हैं। पार्टी का यह एकमात्र बैंक खाता बताया जा रहा है।
TMC में अभी कितने गुट हैं और उनका नेतृत्व कौन कर रहा है?
विधानसभा चुनाव में हार के बाद TMC तीन गुटों में बँटी है — ऋतब्रत बनर्जी समर्थक बागी विधायक जो खुद को 'असली तृणमूल' बता रहे हैं; सुदीप बंद्योपाध्याय और काकोली घोष दस्तिदार समर्थक सांसद जो NCPI में विलय कर चुके हैं; और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला मूल गुट।
नया कोषाध्यक्ष कौन है और उनका क्या कहना है?
5 जून 2026 के संगठनात्मक फेरबदल में पूर्व सांसद सुभाषिष चक्रवर्ती को TMC का नया कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया। चक्रवर्ती ने कहा कि उन्हें बिस्वास के पत्र की जानकारी नहीं है और उन्होंने स्पष्ट किया कि वह राज्य संगठन के कोषाध्यक्ष हैं।
अरूप बिस्वास पुलिस थाने में क्यों पेश हुए?
अपने भाई स्वरूप बिस्वास की गिरफ्तारी और मेसी प्रकरण में पुलिस समन के बाद अरूप बिस्वास सार्वजनिक जीवन से दूर थे। तीन बार समन टालने के बाद वह गुरुवार को बिधाननगर दक्षिण पुलिस थाने में अधिकारियों के सामने पेश हुए।
राष्ट्र प्रेस
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