टीएमसी में वित्तीय संकट: पूर्व कोषाध्यक्ष अरूप बिस्वास ने ₹675 करोड़ के बैंक खाते पर रोक की मांग की
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) का आंतरिक संकट अब सीधे पार्टी की वित्तीय धमनियों तक पहुँच गया है। पार्टी के पूर्व कोषाध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास ने 12 जून 2026 को एक निजी बैंक को पत्र लिखकर TMC के बैंक खाते में जमा ₹675 करोड़ पर तत्काल लेनदेन-रोक लगाने की माँग की। यह पत्र बैंक को 16 जून को प्राप्त हुआ और 18 जून को सार्वजनिक हुआ। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी में मचे घमासान के बीच यह कदम TMC की आंतरिक दरारों को और गहरा करता है।
पत्र में क्या कहा अरूप बिस्वास ने
बिस्वास ने अपने पत्र में बैंक को सूचित किया कि पार्टी के अधिकार और नियंत्रण को लेकर गंभीर विवाद जारी है। उन्होंने लिखा, 'मैं, अरूप बिस्वास, अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (AITC) के कोषाध्यक्ष के रूप में आपको सूचित कर रहा हूँ कि पार्टी के अधिकार और नियंत्रण को लेकर गंभीर विवाद चल रहा है। ऐसे में संगठन की निधि की सुरक्षा के लिए बैंक खाते में किसी भी प्रकार के डेबिट लेनदेन या संचालन संबंधी बदलाव की अनुमति न दी जाए, जब तक कि सक्षम प्राधिकारी की ओर से स्पष्ट निर्देश न मिल जाएँ।' उन्होंने यह भी अपील की कि उनके द्वारा पहले से हस्ताक्षरित चेकों के संभावित दुरुपयोग को भी रोका जाए।
नेतृत्व विवाद की जड़
5 जून 2026 को विधानसभा चुनाव में हार के बाद TMC ने संगठनात्मक फेरबदल करते हुए पूर्व सांसद सुभाषिष चक्रवर्ती को नया कोषाध्यक्ष नियुक्त किया था। हालाँकि बिस्वास ने अपने पत्र में दावा किया कि वह अब भी पार्टी के वैध कोषाध्यक्ष हैं। इस पर चक्रवर्ती ने कहा कि उन्हें इस पत्र की जानकारी नहीं है और उन्होंने स्पष्ट किया कि वह राज्य संगठन के कोषाध्यक्ष हैं, जबकि बिस्वास अखिल भारतीय स्तर के कोषाध्यक्ष थे। उल्लेखनीय है कि जब चक्रवर्ती से यह पूछा गया कि क्या राज्य और अखिल भारतीय संगठन के अलग-अलग बैंक खाते हैं, तो उन्होंने स्वीकार किया कि पार्टी का केवल एक ही बैंक खाता है — जो इस विवाद को और पेचीदा बनाता है।
तीन गुटों में बंटी TMC
विधानसभा चुनाव में हार के बाद TMC अब तीन धड़ों में विभाजित नजर आ रही है। पहला गुट बागी विधायकों का है, जिसका नेतृत्व विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के समर्थक कर रहे हैं और जो खुद को 'असली तृणमूल' बता रहे हैं। दूसरा गुट बागी सांसदों का है — सुदीप बंद्योपाध्याय और काकोली घोष दस्तिदार समर्थक सांसद, जो नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय कर चुके हैं और TMC के चुनाव चिह्न पर दावा ठोकने की कोशिश जारी रखे हैं। तीसरा गुट ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला है, जो पार्टी की मूल संरचना को थामे हुए है।
अरूप बिस्वास की राजनीतिक स्थिति
बिस्वास का यह कदम इसलिए भी राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है क्योंकि मौजूदा बगावत के दौरान उन्हें ममता बनर्जी का करीबी माना जाता रहा है। 5 जून के संगठनात्मक फेरबदल में उन्हें कोषाध्यक्ष पद से हटाया गया, लेकिन पार्टी महासचिव पद पर बरकरार रखा गया। इसके अलावा, अपने भाई स्वरूप बिस्वास की गिरफ्तारी और मेसी प्रकरण में पुलिस समन के बाद सार्वजनिक जीवन से दूर रहे अरूप बिस्वास गुरुवार को तीन बार समन टालने के बाद अंततः बिधाननगर दक्षिण पुलिस थाने में अधिकारियों के सामने पेश हुए। गौरतलब है कि चुनाव आयोग को सौंपी गई ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार इस विवादित खाते में लगभग ₹675 करोड़ जमा हैं।
आगे क्या होगा
अब सवाल यह है कि बैंक इस पत्र पर क्या रुख अपनाता है और क्या TMC का नेतृत्व विवाद न्यायिक या चुनाव आयोग के दरवाजे तक पहुँचता है। यह ऐसे समय में आया है जब पार्टी पहले से ही चुनाव चिह्न को लेकर कानूनी लड़ाई के मुहाने पर खड़ी है। TMC के आंतरिक संकट का यह वित्तीय आयाम पार्टी के भविष्य के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।