टीएमसी बैंक खाता फ्रीज मांग: विपक्ष नेता ऋतब्रत बनर्जी ने अरूप बिस्वास का समर्थन किया
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता में राज्य विधानसभा के विपक्ष नेता ऋतब्रत बनर्जी ने 18 जून 2026 को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पूर्व कोषाध्यक्ष अरूप बिस्वास की उस माँग का खुलकर समर्थन किया, जिसमें बिस्वास ने एक निजी बैंक को पत्र लिखकर पार्टी के बैंक खाते को तत्काल फ्रीज करने का अनुरोध किया था। यह घटनाक्रम TMC के भीतर उस बड़े संगठनात्मक विभाजन की पृष्ठभूमि में सामने आया है, जिसमें कथित तौर पर लगभग 58 विधायक पार्टी नेतृत्व के विरुद्ध बगावत की मुद्रा में हैं।
ऋतब्रत बनर्जी का बयान
बनर्जी ने गुरुवार को आयोजित एक प्रेस वार्ता में कहा, 'अरूप बिस्वास के पत्र में दम है। क्या गारंटी है कि इस अकाउंट में चोरी का या गबन किया हुआ पैसा नहीं है? मैं तृणमूल का अकाउंट फ्रीज करने की माँग का समर्थन करता हूँ।' उनके इस बयान ने TMC के आंतरिक संकट को और गहरा कर दिया है।
अरूप बिस्वास का पत्र और बैंक खाते का विवाद
पूर्व कोषाध्यक्ष अरूप बिस्वास — जो TMC के पूर्व मंत्री भी रहे हैं — ने 12 जून की तारीख वाला एक पत्र एक निजी बैंक की सेंट्रल प्लाजा शाखा को भेजा, जो बैंक को 16 जून को प्राप्त हुआ। इस पत्र में उन्होंने बैंक अधिकारियों से अनुरोध किया कि खाते से धनराशि की निकासी पर तत्काल रोक लगाई जाए और यथास्थिति बनाए रखी जाए, जब तक पार्टी के नेतृत्व एवं नियंत्रण को लेकर चल रहा विवाद नहीं सुलझता।
पार्टी द्वारा चुनाव आयोग को सौंपी गई ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, इस खाते में ₹675 करोड़ जमा हैं। बिस्वास ने पत्र में बैंक को यह भी सचेत किया कि पहले से हस्ताक्षरित चेकों के दुरुपयोग से बचाव के उपाय किए जाएँ और अनधिकृत व्यक्तियों द्वारा किसी भी लेन-देन को रोका जाए।
संगठनात्मक फेरबदल और दावेदारी का टकराव
गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव में हार के बाद 5 जून को TMC ने संगठनात्मक फेरबदल की घोषणा की थी, जिसमें बिस्वास की जगह पूर्व सांसद सुभाशीष चक्रवर्ती को नया कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया। हालाँकि, बिस्वास ने अपने पत्र में दावा किया कि वे अभी भी पार्टी के वैध कोषाध्यक्ष हैं। इसी दावेदारी के टकराव ने यह संवैधानिक अनिश्चितता पैदा की है कि बैंक खाता संचालित करने का अधिकार किसे है।
राजनीतिक विश्लेषण
एक राजनीतिक विश्लेषक के अनुसार, ऋतब्रत बनर्जी इस पूरे घटनाक्रम का उपयोग अपने गुट को 'असली' तृणमूल कांग्रेस के रूप में स्थापित करने के लिए कर रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब पार्टी के भीतर लगभग 58 विधायकों के विद्रोही रुख ने नेतृत्व की वैधता पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।
आगे क्या होगा
बैंक खाते के नियंत्रण का यह विवाद अब कानूनी और संगठनात्मक — दोनों स्तरों पर सुलझाया जाना बाकी है। चुनाव आयोग की भूमिका और न्यायिक हस्तक्षेप की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि दोनों गुट खुद को पार्टी का असली प्रतिनिधि बता रहे हैं।