ममता बनर्जी की सुरक्षा विवाद पर सियासत गरम, हुमायूं कबीर बोले — 'टीएमसी की यह हालत किसी ने नहीं सोची थी'
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की व्यक्तिगत सुरक्षा में बदलाव और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कोषाध्यक्ष अरूप बिस्वास द्वारा पार्टी के बैंक खाते फ्रीज कराने की कथित मांग को लेकर कोलकाता में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। 18 जून को विभिन्न दलों के नेताओं ने इस मुद्दे पर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दर्ज कराईं।
हुमायूं कबीर का तीखा बयान
आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) के प्रमुख हुमायूं कबीर ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, 'ममता बनर्जी की स्थिति ऐसी हो गई है कि वह जो भी करना चाहती हैं, वह हो नहीं पा रहा है। तृणमूल कांग्रेस की ऐसी स्थिति हो जाएगी, यह किसी ने नहीं सोचा था। ममता बनर्जी की सुरक्षा के मामले में अब देखना होगा कि आगे क्या होता है।' उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब टीएमसी के भीतर और बाहर दोनों तरफ से दबाव बढ़ता दिख रहा है।
बैंक खाता फ्रीज विवाद की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि टीएमसी के कोषाध्यक्ष अरूप बिस्वास की ओर से एचडीएफसी बैंक की सेंट्रल प्लाजा शाखा को पत्र लिखकर ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के बैंक खातों को तत्काल फ्रीज करने की मांग किए जाने की बात सामने आई है। इस पत्र ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है और विपक्षी दलों को निशाना साधने का अवसर दे दिया है।
भाजपा विधायकों की प्रतिक्रिया
भारतीय जनता पार्टी (BJP) विधायक सजल घोष ने ममता की सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव पर कहा, 'किसी को क्या समस्या है? केवल पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर (पीएसओ) को बदला गया है। पुराने पीएसओ में ऐसी क्या बात थी कि उसके बदले जाने पर सवाल उठाए जा रहे हैं?' अरूप बिस्वास के पत्र पर उन्होंने कहा, 'जब बैंक खाते में हजारों करोड़ रुपये हों तो विवाद होना स्वाभाविक है।'
BJP विधायक रुद्रनील घोष ने और आगे जाते हुए कहा, 'हर मुद्दे से भागने की उनकी प्रवृत्ति यह साबित करती है कि उनकी पार्टी कमजोर हो चुकी है। बंगाल की जनता ने टीएमसी से छुटकारा पाने के लिए मतदान किया। टीएमसी के लोगों ने गलत काम किए हैं, इसलिए वे भाग रहे हैं। देश के कानून से कौन भागता है?'
सीपीआई(एम) का संयमित रुख
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के विधायक मो. मुस्तफिजुर रहमान ने इस मामले पर अपेक्षाकृत तटस्थ रुख अपनाया। उन्होंने कहा, 'इन लोगों को जो उचित लगा, उन्होंने वही किया। यदि उन्हें लगा कि खाते को फ्रीज करना जरूरी है तो उन्होंने ऐसा किया होगा। इस पर हमारी कोई विशेष प्रतिक्रिया नहीं है।' उन्होंने यह भी कहा कि राज्यपाल के अभिभाषण में यदि उनके दल के मुद्दे शामिल नहीं हुए तो वे उन्हें सदन में उठाएंगे।
आगे क्या होगा
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में राजनीतिक माहौल पहले से तनावपूर्ण है। सुरक्षा बदलाव और बैंक खाता फ्रीज की मांग — दोनों मुद्दों पर टीएमसी की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है। आलोचकों का कहना है कि इन घटनाक्रमों से पार्टी की आंतरिक स्थिति को लेकर सवाल खड़े होते हैं, जिनका जवाब आने वाले दिनों में देना होगा।