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मीनाक्षी अम्मन मंदिर का महाकुम्भाभिषेकम संपन्न: 184 अग्निकुंड, 400 शिवाचार्य, ₹25 करोड़ का जीर्णोद्धार

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मीनाक्षी अम्मन मंदिर का महाकुम्भाभिषेकम संपन्न: 184 अग्निकुंड, 400 शिवाचार्य, ₹25 करोड़ का जीर्णोद्धार

सारांश

मदुरै के मीनाक्षी अम्मन मंदिर में 17 सितंबर को महाकुम्भाभिषेकम संपन्न हुआ — 184 अग्निकुंड, 400 से अधिक शिवाचार्य और ₹25 करोड़ के जीर्णोद्धार का समापन। आग से क्षतिग्रस्त वीरवसंतरायर मंडपम के पुनर्निर्माण के बाद यह ऐतिहासिक धार्मिक पुनर्प्रतिष्ठा हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में हुई।

मुख्य बातें

मीनाक्षी अम्मन मंदिर का महाकुम्भाभिषेकम 17 सितंबर 2026 को मदुरै में संपन्न हुआ।
₹25 करोड़ की लागत से हुए जीर्णोद्धार के बाद आयोजित इस समारोह में 400 से अधिक शिवाचार्यों ने अनुष्ठान संपन्न कराए।
नॉर्थ आदि स्ट्रीट पर 184 पवित्र अग्निकुंडों वाली यज्ञशाला स्थापित की गई; कलशों में गंगा, यमुना, कावेरी और वैगई का पवित्र जल भरा गया।
आग लगने की घटना में क्षतिग्रस्त 'वीरवसंतरायर मंडपम' का पुनर्निर्माण कर पुनः खोला गया।
यज्ञशाला पूजा 11 सितंबर से आरंभ हुई; समापन अनुष्ठान तड़के 3.45 बजे शुरू होकर सुबह 7.40 बजे कुम्भाभिषेकम के साथ पूर्ण हुए।
शाम 7 बजे मीनाक्षी अम्मन और सुंदरेश्वरर की शोभायात्रा चारों मासी सड़कों पर निकाली जाएगी।

मदुरै के विश्वविख्यात मीनाक्षी अम्मन मंदिर का महाकुम्भाभिषेकम गुरुवार, 17 सितंबर 2026 को अलसुबह भव्य धार्मिक समारोह के साथ संपन्न हुआ। ₹25 करोड़ की लागत से महीनों तक चले विस्तृत जीर्णोद्धार कार्य के बाद आयोजित इस ऐतिहासिक अनुष्ठान में हजारों श्रद्धालु देश-विदेश से मदुरै पहुँचे।

जीर्णोद्धार और आयोजन की पृष्ठभूमि

यह महाकुम्भाभिषेकम ₹25 करोड़ के व्यापक जीर्णोद्धार प्रोजेक्ट के समापन पर आयोजित किया गया। इस परियोजना के अंतर्गत आग लगने की घटना में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए 'वीरवसंतरायर मंडपम' का पुनर्निर्माण कर उसे फिर से श्रद्धालुओं के लिए खोला गया। मंदिर के 12 गोपुरमों, स्वर्ण विमानों और गर्भगृह के शिखरों की भी इस अवसर पर प्राण-प्रतिष्ठा की गई।

मुख्य अनुष्ठान एवं यज्ञशाला का वैभव

अनुष्ठानों के लिए नॉर्थ आदि स्ट्रीट पर 184 पवित्र अग्निकुंडों वाली एक भव्य यज्ञशाला स्थापित की गई। वहाँ प्रमुख देवताओं मीनाक्षी अम्मन और सुंदरेश्वरार को समर्पित विशेष स्वर्ण मृदय स्थापित किए गए थे।

कलशों को गंगा, यमुना, कावेरी और वैगई सहित अनेक पवित्र नदियों के जल से भरा गया। 400 से अधिक शिवाचार्यों ने इन विस्तृत वैदिक अनुष्ठानों को संपन्न कराया। यज्ञशाला पूजा का पहला चरण 11 सितंबर को प्रारंभ हुआ था और उसके बाद प्रार्थनाओं तथा अग्नि-अनुष्ठानों के कई दौर चले। इससे पहले 414 पारिवारिक देवताओं की प्रतिष्ठा भी स्थापित की गई थी।

समापन समारोह का क्रमिक विवरण

समापन अनुष्ठान 17 सितंबर की तड़के सुबह 3.45 बजे बारहवीं 'काल यज्ञशाला पूजा' के साथ आरंभ हुए। सुबह 5.45 बजे पवित्र कलशों का भव्य जुलूस निकाला गया, जिसमें हाथियों, मंदिर के मवेशियों और पारंपरिक संगीत ने समाँ बाँधा। शिवाचार्यों ने कलशों को चार राजगोपुरमों सहित सभी 12 गोपुरमों तक ले जाया।

भक्तिमय मंत्रोच्चार के बीच मीनारों का कुम्भाभिषेकम सुबह 7.40 बजे सम्पन्न हुआ। इसके पश्चात मीनाक्षी अम्मन और सुंदरेश्वरर के मुख्य गर्भगृहों पर पवित्र जल अर्पित किया गया, जिससे महाकुम्भाभिषेकम की पूर्णाहुति हुई।

देवी-देवताओं को जल समर्पण और श्रद्धालुओं की भागीदारी

सिद्धि विनायक, कूडल कुमारर, दक्षिणामूर्ति, दुर्गा, महालक्ष्मी, भद्रकाली, अग्नि वीरभद्र, 63 नयनमारों और नवग्रहों सहित अनेक देवी-देवताओं के मंदिरों पर पवित्र जल चढ़ाया गया। हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में सोने के विमानों और गर्भगृह के शिखरों की भी प्राण-प्रतिष्ठा हुई।

प्राण-प्रतिष्ठा के उपरांत विशेष सजावट और दीपाराधना की गई। गुरुवार सुबह 10 बजे से श्रद्धालु बिना किसी रोक-टोक के मुख्य देवी-देवताओं के दर्शन कर सकेंगे।

शाम की शोभायात्रा और उत्सव का माहौल

जो भक्त प्रातःकालीन समारोह में सम्मिलित नहीं हो पाए, उनके लिए मंदिर प्रशासन ने शाम 7 बजे मीनाक्षी अम्मन और सुंदरेश्वरर की शोभायात्रा का आयोजन किया है, जो चारों मासी सड़कों से होकर गुजरेगी। इस ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन के उपलक्ष्य में मदुरै की सड़कें रोशनी और सजावट से जगमगा रही हैं, और पूरा शहर उत्सव के रंग में डूबा हुआ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सांस्कृतिक विरासत के पुनरुद्धार का प्रतीक है — आग की तबाही के बाद ₹25 करोड़ खर्च कर वीरवसंतरायर मंडपम को पुनर्जीवित करना इसका प्रमाण है। गौरतलब है कि ऐसे बड़े मंदिर-पुनरुद्धार आयोजन जनभागीदारी और पर्यटन दोनों दृष्टियों से दीर्घकालिक असर रखते हैं, जिसका आर्थिक लाभ स्थानीय व्यापार को भी मिलता है। हालाँकि मंदिर प्रशासन और राज्य सरकार के बीच जीर्णोद्धार की निगरानी और फंडिंग के विवरण की पारदर्शिता पर ध्यान देना ज़रूरी है। इस तरह के भव्य आयोजन तमिलनाडु की आगम परंपरा की जीवंतता को रेखांकित करते हैं, लेकिन दीर्घकालिक संरक्षण की जवाबदेही भी उतनी ही महत्त्वपूर्ण है।
RashtraPress
17 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मीनाक्षी अम्मन मंदिर का महाकुम्भाभिषेकम क्या है?
महाकुम्भाभिषेकम एक पारंपरिक वैदिक पुनःप्रतिष्ठा समारोह है जिसमें मंदिर के शिखरों, गोपुरमों और देवताओं पर पवित्र नदियों का जल चढ़ाया जाता है। यह समारोह आमतौर पर बड़े जीर्णोद्धार या नवीकरण कार्य के बाद आयोजित किया जाता है और इसे अत्यंत शुभ माना जाता है।
इस बार का महाकुम्भाभिषेकम क्यों आयोजित किया गया?
मदुरै के मीनाक्षी अम्मन मंदिर में ₹25 करोड़ की लागत से महीनों तक जीर्णोद्धार कार्य चला, जिसमें आग से क्षतिग्रस्त 'वीरवसंतरायर मंडपम' का पुनर्निर्माण प्रमुख था। इस जीर्णोद्धार की पूर्णाहुति के उपलक्ष्य में 17 सितंबर 2026 को यह भव्य महाकुम्भाभिषेकम आयोजित किया गया।
समारोह में कितने शिवाचार्य और अग्निकुंड शामिल थे?
400 से अधिक शिवाचार्यों ने इन विस्तृत वैदिक अनुष्ठानों को संपन्न कराया। नॉर्थ आदि स्ट्रीट पर 184 पवित्र अग्निकुंडों वाली एक भव्य यज्ञशाला स्थापित की गई थी।
क्या जो श्रद्धालु सुबह के समारोह में नहीं आ सके, वे बाद में दर्शन कर सकते हैं?
हाँ, गुरुवार सुबह 10 बजे से मंदिर के मुख्य देवी-देवताओं के दर्शन बिना किसी रोक-टोक के सभी भक्तों के लिए खुले हैं। इसके अलावा शाम 7 बजे मीनाक्षी अम्मन और सुंदरेश्वरर की शोभायात्रा चारों मासी सड़कों से निकाली जाएगी।
यज्ञशाला पूजा कब से कब तक चली?
यज्ञशाला पूजा का पहला चरण 11 सितंबर 2026 को आरंभ हुआ था। समापन अनुष्ठान 17 सितंबर की तड़के 3.45 बजे बारहवीं 'काल यज्ञशाला पूजा' के साथ शुरू हुए और सुबह 7.40 बजे कुम्भाभिषेकम के साथ पूर्ण हुए।
राष्ट्र प्रेस
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