पीएम मोदी के 76वें जन्मदिन पर फिनटेक लीडर्स का सम्मान, UPI एमडीआर और डिजिटल इकोसिस्टम पर अहम बातें
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन (17 सितंबर 2026) के अवसर पर देश के प्रमुख फिनटेक नेताओं ने उनकी डिजिटल पहलों की सराहना की और कहा कि बीते एक दशक से अधिक समय में मोदी के नेतृत्व में भारत में एक सशक्त डिजिटल वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र खड़ा हुआ है। साथ ही इन नेताओं ने यूपीआई एमडीआर (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) पर भी महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिए।
मोबिक्विक सीईओ का आकलन: 12 वर्षों में बदली तस्वीर
मोबिक्विक के सह-संस्थापक, एमडी एवं सीईओ बिपिन प्रीत सिंह ने कहा कि 2014 में प्रधानमंत्री मोदी के पदभार संभालने के बाद देश में स्टार्टअप, डिजिटल और पेमेंट इकोसिस्टम तेज़ी से मुख्यधारा में आ गए। उन्होंने कहा कि बीते 12 वर्षों में इस क्षेत्र में कई कंपनियाँ उभरी हैं, आम लोगों तक वित्तीय सेवाएँ पहुँची हैं और जीवन स्तर में सुधार आया है।
सिंह ने यह भी रेखांकित किया कि यह प्रगति प्रधानमंत्री की व्यक्तिगत रुचि और सक्रिय भागीदारी के बिना संभव नहीं होती। उनके अनुसार, डिजिटल इंडिया की नीतियों ने न केवल बड़े कारोबारियों को, बल्कि छोटे उद्यमियों और युवाओं को भी एक मज़बूत मंच दिया है।
UPI एमडीआर पर बिपिन प्रीत सिंह का रुख
यूपीआई एमडीआर के सवाल पर सिंह ने कहा कि यूपीआई इकोसिस्टम के कारण भारत पिछले एक दशक में रियल-टाइम पेमेंट में विश्व में प्रथम स्थान पर पहुँच गया है। हालाँकि, इस प्रणाली को बैंकों और वित्तीय कंपनियों द्वारा संचालित करने में बड़ी लागत आती है। उन्होंने तर्क दिया कि ₹2,000 से अधिक के लेनदेन पर यूपीआई एमडीआर लागू करने से इस इकोसिस्टम की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि छोटे कारोबारियों और छोटे लेनदेन पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
फोनपे सीईओ समीर निगम: ग्राहकों पर कोई बोझ नहीं
फोनपे के फाउंडर एवं सीईओ समीर निगम ने प्रधानमंत्री मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि मोदी डिजिटल पेमेंट, स्टार्टअप और डिजिटल इंडिया के सबसे बड़े प्रमोटर हैं। उन्होंने कहा कि बीते 13 वर्षों में प्रधानमंत्री ने अपनी योजनाओं के ज़रिये एक मज़बूत आधार तैयार किया है, जिससे बड़ी संख्या में युवाओं को उद्यमी बनने का मौका मिला है।
यूपीआई एमडीआर पर निगम ने स्पष्ट किया: 'एमडीआर में यूपीआई ग्राहकों के लिए कोई शुल्क नहीं है। ग्राहकों से यूपीआई इस्तेमाल करने के लिए कभी शुल्क नहीं लिया गया और भविष्य में भी नहीं लिया जाएगा।' उन्होंने बताया कि ₹1 लाख से कम वार्षिक कारोबार वाले छोटे व्यापारी भी एमडीआर व्यवस्था के दायरे से बाहर रहेंगे।
UPI एमडीआर की संरचना: 96% लेनदेन शुल्क-मुक्त
निगम ने बताया कि बड़े दुकानदारों के मामले में भी 96 प्रतिशत लेनदेन — जो ₹2,000 से कम राशि के होते हैं — किसी भी शुल्क के दायरे में नहीं आएंगे। केवल ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू होगा, और यह भुगतान ग्राहक नहीं बल्कि व्यापारी करेंगे।
गौरतलब है कि यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया है जब यूपीआई पर संभावित शुल्क को लेकर उपभोक्ताओं में भ्रम की स्थिति थी। उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, एमडीआर की यह संरचना छोटे व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं को बड़े पैमाने पर सुरक्षित रखते हुए डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को वित्तीय रूप से टिकाऊ बनाने का प्रयास है।
डिजिटल इंडिया की वैश्विक पहचान
फिनटेक नेताओं की यह प्रतिक्रिया भारत की उस उपलब्धि के संदर्भ में महत्वपूर्ण है, जहाँ देश ने रियल-टाइम डिजिटल पेमेंट में वैश्विक नेतृत्व हासिल किया है। आँकड़ों के अनुसार, यूपीआई के ज़रिये अब हर माह अरबों लेनदेन होते हैं, और यह प्रणाली दुनिया के कई देशों के लिए एक मॉडल बन चुकी है। आने वाले समय में एमडीआर के क्रियान्वयन की विस्तृत रूपरेखा और उसके असर पर उद्योग और नीति-निर्माताओं की नज़र बनी रहेगी।