आरपी सिंह का विपक्ष पर हमला: 'छात्रों की गूंज' सनातन विरोधी, कूटनीति में भी राजनीति
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने 27 अगस्त 2026 को विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि विपक्ष को कूटनीति में भी राजनीति नज़र आती है। उन्होंने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) में भारत की भागीदारी, नेपाल बाढ़ संकट, कांग्रेस के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम और महाराष्ट्र में मराठी भाषा विवाद — इन सभी मुद्दों पर अपनी स्पष्ट राय रखी।
SCO और कूटनीतिक भागीदारी पर BJP का रुख
आरपी सिंह ने कहा कि भारत शंघाई सहयोग संगठन का अभिन्न हिस्सा है और निरंतर इसमें सक्रिय भागीदारी करता आया है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी SCO कार्यक्रम के तहत किर्गिस्तान जा रहे हैं, जहाँ वे भारत का पक्ष प्रभावी ढंग से रखेंगे। सिंह के अनुसार, इस तरह के बहुपक्षीय आयोजनों से भारत को कूटनीतिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर लाभ होता है।
उन्होंने आलोचना करते हुए कहा कि विपक्ष इन राजनयिक पहलों को भी राजनीतिक चश्मे से देखता है, जो राष्ट्रीय हितों के विरुद्ध है। गौरतलब है कि SCO में भारत की भागीदारी पर विपक्ष पहले भी सवाल उठाता रहा है।
नेपाल बाढ़ त्रासदी पर संवेदना और राहत
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ पर आरपी सिंह ने कहा कि भारत सरकार लगातार नेपाल के संपर्क में है और राहत सामग्री भेजी जा रही है। उन्होंने बताया कि कई भारतीय नागरिक इस बाढ़ की चपेट में आए हैं, जिनमें कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जा रहे श्रद्धालु भी शामिल हैं।
सिंह ने उम्मीद जताई कि नेपाल सरकार फँसे हुए भारतीय नागरिकों की सहायता में पूरा सहयोग करेगी। यह ऐसे समय में आया है जब नेपाल में मानसून के कारण बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति गंभीर बनी हुई है।
'छात्रों की गूंज' पर BJP का पलटवार
कांग्रेस सांसद और विपक्ष के नेता राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम पर BJP प्रवक्ता ने सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा, "वे जानबूझकर 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम का इस्तेमाल सनातन और हिंदू धर्म को गलत तरीके से दिखाने के लिए कर रहे हैं।"
सिंह ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने हाल ही में मनुस्मृति का संदर्भ दिया, जबकि उनके अनुसार आज देश का हर नागरिक बाबासाहेब अंबेडकर के संविधान की बात करता है, मनुस्मृति की नहीं। BJP ने इस कार्यक्रम को 'झूठ की गूंज' करार देते हुए अपना जवाबी अभियान चलाया है।
महाराष्ट्र में मराठी भाषा विवाद
महाराष्ट्र में ऑटो-कैब चालकों के लिए मराठी भाषा सीखने की समयसीमा बढ़ाए जाने के मुद्दे पर आरपी सिंह ने कहा कि जो व्यक्ति जिस राज्य में रहता है, उसके लिए वहाँ की भाषा सीखना स्वाभाविक और आवश्यक है। उन्होंने विशेष रूप से ऑटो-कैब चालकों के लिए इसे अनिवार्य बताया, क्योंकि उनका सीधा संपर्क स्थानीय यात्रियों से होता है।
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब महाराष्ट्र में भाषाई अस्मिता का मुद्दा राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना हुआ है। आगे देखना होगा कि इस मुद्दे पर विभिन्न दलों की प्रतिक्रिया किस दिशा में जाती है।