27 अगस्त 2026
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एनसीपीआई के 20 सांसदों की सदस्यता रद्द हो: अधीर रंजन चौधरी का तीखा हमला, 'भगोड़े' और 'अवसरवादी' बताया

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एनसीपीआई के 20 सांसदों की सदस्यता रद्द हो: अधीर रंजन चौधरी का तीखा हमला, 'भगोड़े' और 'अवसरवादी' बताया

सारांश

कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने एनसीपीआई के 20 सांसदों को 'भगोड़ा' और 'अवसरवादी' करार देते हुए उनकी सदस्यता समाप्त करने और दोबारा चुनाव लड़ने की माँग की। साथ ही नेपाल-तिब्बत आपदा में फँसे भारतीयों के बचाव और बिहार-बंगाल में बाढ़ की आशंका पर भी चेतावनी दी।

मुख्य बातें

कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने 27 अगस्त को एनसीपीआई के 20 सांसदों को 'अवसरवादी' और 'भगोड़ा' बताया।
चौधरी ने माँग की कि इन सांसदों की लोकसभा सदस्यता समाप्त कर उन्हें दोबारा चुनाव लड़ने पर मजबूर किया जाए।
नेपाल-तिब्बत में बाढ़-भूस्खलन से कई मौतें; मानसरोवर यात्रा पर गए भारतीय श्रद्धालुओं के फँसे होने पर चिंता।
बिहार और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों में बाढ़ की आशंका; प्रशासन से समय पर तैयारी की अपील।
मोहन भागवत के न्यूयॉर्क कार्यक्रम विरोध पर बोले — केंद्र को मुद्दा अमेरिकी प्रशासन के सामने उठाना चाहिए।

कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने 27 अगस्त 2026 को मुर्शिदाबाद में मीडिया से बात करते हुए एनसीपीआई के 20 सांसदों को 'अवसरवादी' और 'भगोड़ा' करार दिया और माँग की कि लोकसभा स्पीकर द्वारा जारी नोटिस के बाद इन सांसदों की सदस्यता तत्काल समाप्त की जाए। उन्होंने नेपाल-तिब्बत में आई भीषण प्राकृतिक आपदा और न्यूयॉर्क में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के कार्यक्रम के विरोध को लेकर भी अपनी राय रखी।

एनसीपीआई सांसदों पर तीखा प्रहार

चौधरी ने आरोप लगाया कि एनसीपीआई के इन नेताओं ने जनता से वोट लेकर बाद में भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया। उनके अनुसार, सत्ता और सरकारी सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए इन नेताओं ने भाजपा का साथ चुना, किन्तु सीधे भाजपा में जाने की झिझक के चलते एनसीपीआई को माध्यम बनाया गया। उन्होंने कहा, 'मैं चाहता हूँ कि ऐसे नेताओं की सदस्यता समाप्त हो और उन्हें दोबारा चुनाव लड़कर सदन में आने के लिए मजबूर किया जाए। अगर इन नेताओं में हिम्मत है तो वे सदस्यता छोड़कर जनता के बीच जाएँ और चुनाव जीतकर दोबारा संसद पहुँचें।'

गौरतलब है कि लोकसभा स्पीकर की ओर से इन 20 सांसदों को दल-बदल कानून के तहत नोटिस जारी किया गया है, जो इस राजनीतिक विवाद को संवैधानिक आयाम देता है।

नेपाल-तिब्बत आपदा पर गहरी चिंता

नेपाल और तिब्बत में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन को चौधरी ने 'बेहद गंभीर और दर्दनाक घटना' बताया। उन्होंने कहा कि तिब्बत में भूकंप के बाद हुए भूस्खलन, हिमस्खलन और नदियों में अचानक आए उफान ने बड़े क्षेत्र में तबाही मचाई है। नेपाल के साथ-साथ तिब्बत से सटे चीन के इलाकों में भी इसका असर पड़ा है — कई लोगों की मौत हुई है और बड़ी संख्या में लोग लापता हैं।

चौधरी ने मानसरोवर यात्रा पर गए भारतीय श्रद्धालुओं और पर्यटकों के फँसे होने पर विशेष चिंता जताई और कहा कि राहत एवं बचाव कार्य को और तेज़ करने की ज़रूरत है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत सरकार राहत अभियान जारी रखेगी और फँसे हुए भारतीयों को जल्द सुरक्षित निकाला जाएगा।

भारत के सीमावर्ती राज्यों पर बाढ़ का खतरा

चौधरी ने आगाह किया कि पहाड़ी क्षेत्रों में भारी मात्रा में जमा पानी नीचे की ओर ही आएगा और इसका असर बिहार और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों पर भी पड़ सकता है। उन्होंने प्रशासन से समय रहते तैयारी करने की अपील की, ताकि संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटा जा सके।

न्यूयॉर्क में भागवत कार्यक्रम विरोध पर प्रतिक्रिया

न्यूयॉर्क में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के कार्यक्रम के विरोध पर चौधरी ने कहा कि न्यूयॉर्क के मेयर वहाँ के निर्वाचित प्रतिनिधि हैं और यदि केंद्र सरकार को उनके बयान से आपत्ति हुई है, तो उसे इस मुद्दे को अमेरिकी प्रशासन और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समक्ष उठाना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि न्यूयॉर्क में मेयर का चुनाव धर्म के आधार पर नहीं होता।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब दल-बदल की राजनीति, पड़ोसी देशों में आपदा और विदेश में हिंदुत्व संगठनों की गतिविधियाँ एक साथ राष्ट्रीय विमर्श में केंद्र में हैं। आने वाले दिनों में लोकसभा स्पीकर का एनसीपीआई नोटिस पर अंतिम फैसला इस राजनीतिक विवाद की दिशा तय करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन निर्णय की समयसीमा तय नहीं करता, जिससे अनिश्चितता बनी रहती है। एनसीपीआई का मामला यह भी उजागर करता है कि छोटे दलों को 'पारगमन मार्ग' की तरह इस्तेमाल करने की प्रवृत्ति भारतीय राजनीति में कितनी गहरी जड़ें जमा चुकी है। नेपाल आपदा पर चिंता वाजिब है, लेकिन बिहार-बंगाल में बाढ़ की चेतावनी के साथ यह सवाल भी उठता है कि क्या राज्य सरकारें और केंद्र पहले से समन्वित तैयारी में हैं। भागवत-न्यूयॉर्क प्रकरण पर चौधरी का सुझाव कूटनीतिक रूप से सही दिशा में है, पर इसकी व्यावहारिकता इस पर निर्भर करती है कि केंद्र इसे द्विपक्षीय प्राथमिकता मानता है या नहीं।
RashtraPress
27 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनसीपीआई के 20 सांसदों को नोटिस क्यों जारी किया गया?
लोकसभा स्पीकर ने एनसीपीआई के 20 सांसदों को दल-बदल कानून के तहत नोटिस जारी किया है। कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी का आरोप है कि इन सांसदों ने जनता का वोट लेकर भाजपा का साथ चुना और एनसीपीआई को महज एक माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया।
अधीर रंजन चौधरी की एनसीपीआई सांसदों से क्या माँग है?
चौधरी ने माँग की है कि इन सांसदों की लोकसभा सदस्यता तत्काल समाप्त की जाए और उन्हें दोबारा उपचुनाव लड़कर जनादेश लेने के लिए बाध्य किया जाए। उनका कहना है कि यदि इन नेताओं में हिम्मत है तो वे जनता के बीच जाएँ।
नेपाल-तिब्बत आपदा का भारत पर क्या असर पड़ सकता है?
चौधरी ने चेतावनी दी है कि तिब्बत और नेपाल में जमा पानी नीचे की ओर बहेगा, जिससे बिहार और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बन सकती है। मानसरोवर यात्रा पर गए भारतीय श्रद्धालुओं के फँसे होने की भी खबर है और उन्होंने राहत-बचाव अभियान तेज़ करने की अपील की है।
न्यूयॉर्क में मोहन भागवत के कार्यक्रम के विरोध पर चौधरी का क्या कहना है?
चौधरी ने कहा कि यदि केंद्र सरकार को न्यूयॉर्क के मेयर के बयान से आपत्ति है, तो उसे यह मुद्दा अमेरिकी प्रशासन और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने उठाना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि न्यूयॉर्क में मेयर का चुनाव धर्म के आधार पर नहीं होता।
दल-बदल कानून के तहत सांसद की सदस्यता कब समाप्त होती है?
दल-बदल कानून (दसवीं अनुसूची) के अनुसार, यदि कोई सांसद अपने दल के निर्देश के विरुद्ध मतदान करे या स्वेच्छा से दल की सदस्यता छोड़े, तो लोकसभा स्पीकर उसकी सदस्यता समाप्त कर सकते हैं। नोटिस जारी होने के बाद स्पीकर का अंतिम फैसला ही सदस्यता रद्द करने का आधार बनता है।
राष्ट्र प्रेस
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