कोयंबटूर में वडमल्ली किसान संकट में: बारिश की कमी से 500 एकड़ फसल खतरे में, ओणम बाज़ार पर असर
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के कोयंबटूर जिले के थोंडामुथुर ब्लॉक में वडमल्ली (गोम्फ्रेना ग्लोबोसा) की खेती करने वाले किसान इस समय गंभीर संकट में हैं। 2 जुलाई 2026 तक की स्थिति के अनुसार, गर्मियों में अपर्याप्त वर्षा और उसके बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून की कमज़ोर शुरुआत ने 500 एकड़ से अधिक भूमि पर लगी फसल को सूखने की कगार पर पहुँचा दिया है। ओणम के लिए केरल को फूलों की आपूर्ति करने वाले इस क्षेत्र के किसानों को अब भारी आर्थिक नुकसान की आशंका सता रही है।
फसल की स्थिति और नुकसान का दायरा
वडिवेलमपालयम, मुगासिमंगलम, मोलापालयम और कलिमंगलम गाँवों में वडमल्ली की व्यापक खेती होती है। यह फसल लगभग 150 दिनों में तैयार होती है और 120 दिनों के बाद फूल देना शुरू करती है। ओणम के मौसम में केरल की त्योहारी माँग को पूरा करने के लिए इसकी खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। हालाँकि यह फसल अन्य व्यावसायिक फसलों की तुलना में कम सिंचाई माँगती है, लेकिन किसानों के अनुसार लगातार सूखे मौसम ने पौधों को गंभीर रूप से कमज़ोर कर दिया है।
किसानों की आवाज़
वडिवेलमपालयम के किसान आर. कार्तिकेयन ने बताया कि शुरुआत में फसल की बढ़वार अच्छी थी, परंतु निरंतर सूखे ने स्थिति पलट दी। उन्होंने कहा, 'हमें उम्मीद थी कि अब तक मानसून की कुछ बारिश हो जाएगी, लेकिन खेत एक सप्ताह से सूखे पड़े हैं। पौधे हर दिन कमज़ोर हो रहे हैं और अगर तुरंत बारिश नहीं हुई, तो उनमें से कई शायद बच न पाएँ।'
किसानों के अनुसार, वडमल्ली की खेती की लागत लगभग ₹30,000 प्रति एकड़ आती है, जिसमें भूमि तैयारी, बीज, मज़दूरी और अन्य खर्च शामिल हैं। थोंडामुथुर ब्लॉक के कई हिस्सों में स्थायी सिंचाई सुविधाओं का अभाव है, जिससे किसान पूरी तरह वर्षा पर निर्भर हैं। यह ऐसे समय में आया है जब छोटे और सीमांत किसान पहले से ही इनपुट लागत के बोझ तले दबे हैं।
जंगली जानवरों का बढ़ता खतरा
सूखे की मार से एक और संकट उभरा है। उसी इलाके के किसान एस. मणिकंदन ने बताया कि आस-पास के जंगलों में भोजन की कमी के कारण जंगली सूअर खेतों में घुसने लगे हैं। उन्होंने कहा, 'जंगली सूअर आम तौर पर इस फसल से दूर रहते हैं, लेकिन जंगलों में खाने-पीने की चीज़ों की कमी के कारण वे हमारे खेतों में आ गए हैं। वे पहले से ही कमज़ोर हो चुके पौधों को नुकसान पहुँचा रहे हैं।' गौरतलब है कि यह दोहरी मार — मौसम और वन्यजीव — छोटे किसानों के लिए विशेष रूप से विनाशकारी साबित हो रही है।
अन्य फसलों पर भी असर
वडमल्ली के अलावा, इस क्षेत्र में उगाई जाने वाली मक्का, अरहर दाल, सेम और कद्दू की फसलें भी कम वर्षा के कारण प्रभावित हुई हैं। इससे किसानों की आय का कोई वैकल्पिक स्रोत भी सिकुड़ता जा रहा है।
ओणम बाज़ार और सरकार से अपील
उत्पादकों का अनुमान है कि इस वर्ष ओणम के मौसम में कोयंबटूर से फूलों की आवक में भारी कमी आ सकती है, जिससे बाज़ार में कीमतें बढ़ने की संभावना है। किसानों ने तमिलनाडु सरकार से फसल नुकसान का शीघ्र आकलन कर मुआवज़े की घोषणा करने की माँग की है — विशेष रूप से उन छोटे और सीमांत किसानों के लिए जिनकी आजीविका पूरी तरह इस मौसमी फसल पर टिकी है। यदि आने वाले दिनों में वर्षा नहीं होती, तो थोंडामुथुर ब्लॉक के फूल उत्पादकों का ओणम सीज़न पूरी तरह चौपट हो सकता है।