7 नवंबर 2026
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मदुरै में कुरुवई धान की खेती संकट में, वैगई-मुल्लापेरियार बांधों में पानी की कमी से 45,000 एकड़ प्रभावित

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मदुरै में कुरुवई धान की खेती संकट में, वैगई-मुल्लापेरियार बांधों में पानी की कमी से 45,000 एकड़ प्रभावित

सारांश

मदुरै में कुरुवई धान का मौसम शुरू हो गया है, लेकिन वैगई और मुल्लापेरियार बांधों में पानी की कमी के चलते 45,000 एकड़ पर बुवाई रुकी है। किसान निवेश करने से हिचकिचा रहे हैं — हर गुज़रता दिन फसल की अवधि और पैदावार दोनों को कम कर रहा है।

मुख्य बातें

मदुरै जिले में कुरुवई धान की खेती के लिए चिह्नित 45,000 एकड़ भूमि पर बुवाई अभी तक शुरू नहीं हुई है।
वैगई बांध का जलस्तर 1 जून को 21.29 फीट से बढ़कर 17 जून तक 28.08 फीट हुआ, फिर भी किसानों को भरोसा नहीं।
प्रभावित ब्लॉक: शोलावनंदन , वाडीपट्टी और कल्लंधिरी ।
किसान नेता कुरुंजी कुमारन ने कहा कि सिंचाई की गारंटी के बिना किसान निवेश करने से डर रहे हैं।
जल संसाधन विभाग (WRD) के अनुसार जलग्रहण क्षेत्र में बारिश जारी रही तो स्थिति में सुधार संभव है।

तमिलनाडु के मदुरै जिले में कुरुवई धान की खेती का मौसम शुरू हो चुका है, लेकिन वैगई और मुल्लापेरियार बांधों में पानी का स्तर पर्याप्त न होने के कारण किसान बुवाई का निर्णय नहीं ले पा रहे हैं। 18 जून 2026 तक मौसम के लगभग तीन सप्ताह बीत जाने के बाद भी जिले में बड़े पैमाने पर खेती शुरू नहीं हुई है, जिससे किसान समुदाय में गहरी चिंता व्याप्त है।

कितनी जमीन पर असर

कृषि विभाग के अधिकारियों ने इस मौसम में कुरुवई धान की खेती के लिए शोलावनंदन, वाडीपट्टी और कल्लंधिरी ब्लॉकों में लगभग 45,000 एकड़ भूमि चिह्नित की है। इस पूरे क्षेत्र में बुवाई का काम महीने की शुरुआत में ही शुरू होना था, लेकिन सिंचाई की अनिश्चितता ने किसानों को रोक रखा है। यह देरी खेती के कुल समय को कम कर सकती है और अंततः पैदावार पर प्रतिकूल असर डाल सकती है।

कुरुवई फसल क्या है और क्यों है खास

कुरुवई एक कम अवधि की धान की फसल है, जो जून से सितंबर के बीच उगाई जाती है। यह फसल मुख्य रूप से बड़े जलाशयों से समय पर पानी छोड़े जाने पर निर्भर करती है। गौरतलब है कि यह फसल मदुरै के किसानों की वार्षिक आय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसकी विफलता सीधे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती है।

किसानों की चिंता

किसान नेता कुरुंजी कुमारन ने कहा, 'कुरुवई की खेती आम तौर पर जून में शुरू होती है और सितंबर तक चलती है। हालांकि मौसम के लगभग तीन सप्ताह बीत चुके हैं, लेकिन किसानों ने खेती शुरू नहीं की है क्योंकि सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलने का कोई भरोसा नहीं है।'

कुमारन ने यह भी बताया कि किसान पूरी फसल अवधि के दौरान पानी की उपलब्धता को लेकर स्पष्टता के बिना जमीन तैयार करने, बीज खरीदने और अन्य निवेश करने से हिचकिचा रहे हैं। कई किसान डैम के जलस्तर और आगामी बारिश के रुझान पर नज़र रखने के बाद ही अंतिम निर्णय लेने की प्रतीक्षा में हैं।

बांधों की मौजूदा स्थिति

जल संसाधन विभाग (WRD) के आंकड़ों के अनुसार, वैगई बांध में पानी का स्तर 1 जून को 21.29 फीट था, जो जलग्रहण क्षेत्र में लगातार वर्षा के बाद 17 जून तक बढ़कर 28.08 फीट हो गया। WRD अधिकारियों ने संकेत दिया है कि यदि जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश का सिलसिला जारी रहा, तो आने वाले हफ्तों में जलस्तर और ऊपर जा सकता है और सिंचाई की संभावनाएं बेहतर हो सकती हैं।

आगे क्या

यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु के कई जिलों में मानसून की अनिश्चितता किसानों की आजीविका पर दबाव बना रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले दो सप्ताह में बांधों का जलस्तर नहीं बढ़ा, तो इस मौसम में कुरुवई खेती का क्षेत्रफल उल्लेखनीय रूप से घट सकता है। किसान समुदाय सरकार से स्पष्ट दिशानिर्देश और वैकल्पिक सिंचाई व्यवस्था की माँग कर रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन किसानों का भरोसा न बनना बताता है कि अकेले आँकड़े काफी नहीं होते — नीतिगत स्पष्टता और समय पर संचार की भी ज़रूरत है। सरकार को बांध जलस्तर की साप्ताहिक सार्वजनिक घोषणा और सिंचाई रिलीज़ की एक पारदर्शी समयसारणी देनी चाहिए, ताकि किसान निवेश का निर्णय तथ्यों के आधार पर कर सकें, अनुमान के आधार पर नहीं।
RashtraPress
7 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कुरुवई धान की खेती क्या है और यह कब होती है?
कुरुवई एक कम अवधि की धान की फसल है जो जून से सितंबर के बीच उगाई जाती है। यह मुख्य रूप से तमिलनाडु के मदुरै जैसे जिलों में बड़े जलाशयों से समय पर पानी छोड़े जाने पर निर्भर करती है।
मदुरै में इस साल कुरुवई खेती क्यों प्रभावित हुई है?
वैगई और मुल्लापेरियार बांधों में पानी का स्तर पर्याप्त न होने के कारण किसानों को सिंचाई की गारंटी नहीं मिल रही है। इसी अनिश्चितता के चलते किसानों ने 45,000 एकड़ चिह्नित भूमि पर बुवाई शुरू नहीं की है।
वैगई बांध का मौजूदा जलस्तर कितना है?
जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार वैगई बांध का जलस्तर 1 जून को 21.29 फीट था, जो 17 जून तक बढ़कर 28.08 फीट हो गया। अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि जलग्रहण क्षेत्र में बारिश जारी रहने पर यह और बढ़ सकता है।
इस देरी का किसानों पर क्या असर पड़ेगा?
बुवाई में देरी से कुरुवई फसल की खेती का समय कम हो जाता है, जिससे कुल पैदावार प्रभावित हो सकती है। साथ ही, किसान बीज, जमीन तैयारी और अन्य निवेश पर खर्च करने से हिचकिचा रहे हैं, जिससे आर्थिक नुकसान का खतरा बढ़ रहा है।
कौन से ब्लॉक इस संकट से सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं?
कृषि विभाग ने शोलावनंदन, वाडीपट्टी और कल्लंधिरी ब्लॉकों में लगभग 45,000 एकड़ भूमि को कुरुवई खेती के लिए चिह्नित किया था। इन्हीं ब्लॉकों में बुवाई रुकी हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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