मदुरै में कुरुवई धान की खेती संकट में, वैगई-मुल्लापेरियार बांधों में पानी की कमी से 45,000 एकड़ प्रभावित
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के मदुरै जिले में कुरुवई धान की खेती का मौसम शुरू हो चुका है, लेकिन वैगई और मुल्लापेरियार बांधों में पानी का स्तर पर्याप्त न होने के कारण किसान बुवाई का निर्णय नहीं ले पा रहे हैं। 18 जून 2026 तक मौसम के लगभग तीन सप्ताह बीत जाने के बाद भी जिले में बड़े पैमाने पर खेती शुरू नहीं हुई है, जिससे किसान समुदाय में गहरी चिंता व्याप्त है।
कितनी जमीन पर असर
कृषि विभाग के अधिकारियों ने इस मौसम में कुरुवई धान की खेती के लिए शोलावनंदन, वाडीपट्टी और कल्लंधिरी ब्लॉकों में लगभग 45,000 एकड़ भूमि चिह्नित की है। इस पूरे क्षेत्र में बुवाई का काम महीने की शुरुआत में ही शुरू होना था, लेकिन सिंचाई की अनिश्चितता ने किसानों को रोक रखा है। यह देरी खेती के कुल समय को कम कर सकती है और अंततः पैदावार पर प्रतिकूल असर डाल सकती है।
कुरुवई फसल क्या है और क्यों है खास
कुरुवई एक कम अवधि की धान की फसल है, जो जून से सितंबर के बीच उगाई जाती है। यह फसल मुख्य रूप से बड़े जलाशयों से समय पर पानी छोड़े जाने पर निर्भर करती है। गौरतलब है कि यह फसल मदुरै के किसानों की वार्षिक आय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसकी विफलता सीधे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती है।
किसानों की चिंता
किसान नेता कुरुंजी कुमारन ने कहा, 'कुरुवई की खेती आम तौर पर जून में शुरू होती है और सितंबर तक चलती है। हालांकि मौसम के लगभग तीन सप्ताह बीत चुके हैं, लेकिन किसानों ने खेती शुरू नहीं की है क्योंकि सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलने का कोई भरोसा नहीं है।'
कुमारन ने यह भी बताया कि किसान पूरी फसल अवधि के दौरान पानी की उपलब्धता को लेकर स्पष्टता के बिना जमीन तैयार करने, बीज खरीदने और अन्य निवेश करने से हिचकिचा रहे हैं। कई किसान डैम के जलस्तर और आगामी बारिश के रुझान पर नज़र रखने के बाद ही अंतिम निर्णय लेने की प्रतीक्षा में हैं।
बांधों की मौजूदा स्थिति
जल संसाधन विभाग (WRD) के आंकड़ों के अनुसार, वैगई बांध में पानी का स्तर 1 जून को 21.29 फीट था, जो जलग्रहण क्षेत्र में लगातार वर्षा के बाद 17 जून तक बढ़कर 28.08 फीट हो गया। WRD अधिकारियों ने संकेत दिया है कि यदि जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश का सिलसिला जारी रहा, तो आने वाले हफ्तों में जलस्तर और ऊपर जा सकता है और सिंचाई की संभावनाएं बेहतर हो सकती हैं।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु के कई जिलों में मानसून की अनिश्चितता किसानों की आजीविका पर दबाव बना रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले दो सप्ताह में बांधों का जलस्तर नहीं बढ़ा, तो इस मौसम में कुरुवई खेती का क्षेत्रफल उल्लेखनीय रूप से घट सकता है। किसान समुदाय सरकार से स्पष्ट दिशानिर्देश और वैकल्पिक सिंचाई व्यवस्था की माँग कर रहा है।