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कुरुवाई संकट: कावेरी डेल्टा के किसानों ने ₹25,000 प्रति एकड़ मुआवजे की माँग, नागपट्टिनम में 96% खेती घटी

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कुरुवाई संकट: कावेरी डेल्टा के किसानों ने ₹25,000 प्रति एकड़ मुआवजे की माँग, नागपट्टिनम में 96% खेती घटी

सारांश

कावेरी डेल्टा में इस बार कुरुवाई सीज़न महज़ आँकड़ों की बर्बादी नहीं — हज़ारों परिवारों की आजीविका का सवाल है। नागपट्टिनम में 96% रकबे की गिरावट और तिरुवरूर में 21,000 से अधिक किसानों का पैकेज से बाहर रहना बताता है कि ₹134 करोड़ की योजना ज़मीन पर कितनी खोखली साबित हुई।

मुख्य बातें

कावेरी डेल्टा के किसानों ने तमिलनाडु सरकार से ₹25,000 प्रति एकड़ मुआवजे और सांबा खेती के लिए अलग पैकेज की माँग की।
नागपट्टिनम में कुरुवाई खेती 2025 के 30,000 हेक्टेयर से घटकर 2026 में केवल 1,720 हेक्टेयर रह गई — लगभग 96% की गिरावट।
तिरुवरूर में किसानों की संख्या 59,885 से घटकर 38,330 और रकबा 77,573 से 46,338 हेक्टेयर हुआ।
लगभग 26,900 (नागपट्टिनम) और 21,555 (तिरुवरूर) किसान ₹134 करोड़ के कुरुवाई पैकेज का लाभ नहीं उठा सके।
किसानों ने प्रति एकड़ लगभग ₹10,000 के नुकसान की सूचना दी; तिरुमारुगल में 3 एकड़ की फसल कथित तौर पर नष्ट हुई।
किसान संगठनों ने चेतावनी दी कि बिना तत्काल हस्तक्षेप के सांबा फसल भी संकट में पड़ सकती है।

कावेरी डेल्टा के हज़ारों किसानों ने तमिलनाडु सरकार से कुरुवाई धान मौसम में हुई फसल बर्बादी के लिए प्रति एकड़ ₹25,000 मुआवजे की माँग की है। नागपट्टिनम और तिरुवरूर जिलों में पानी की भारी कमी के कारण लाखों किसान इस सीज़न में बुवाई ही नहीं कर पाए, जबकि जो बोया उसमें से भी बड़ा हिस्सा सूख गया। आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, नागपट्टिनम में कुरुवाई के तहत खेती योग्य रकबा 2025 के लगभग 30,000 हेक्टेयर से घटकर 2026 में मात्र 1,720 हेक्टेयर रह गया — यानी लगभग 96% की गिरावट।

मुख्य घटनाक्रम

सरकार ने 12 जून को मेटूर बांध से पानी न छोड़े जाने के बाद ₹134 करोड़ के कुरुवाई विशेष पैकेज की घोषणा की थी। इस पैकेज का उद्देश्य फ़िल्टर पॉइंट कुओं सहित वैकल्पिक सिंचाई स्रोतों के ज़रिए धान की खेती को प्रोत्साहित करना था। हालाँकि, पानी की कमी के कारण जो किसान खेती ही शुरू नहीं कर सके, उन्हें इस योजना के दायरे से बाहर रखा गया — जिससे हज़ारों कृषि परिवार आय से वंचित रह गए।

आँकड़ों में संकट की गहराई

नागपट्टिनम में 2025 में लगभग 28,000 किसानों ने करीब 30,000 हेक्टेयर में धान उगाया था। 2026 में यह संख्या सिमटकर केवल लगभग 1,100 किसान और 1,720 हेक्टेयर रह गई। तिरुवरूर में कुरुवाई किसानों की संख्या 2025 के 59,885 से घटकर 2026 में 38,330 हो गई, और खेती का रकबा 77,573 हेक्टेयर से घटकर 46,338 हेक्टेयर रह गया। आँकड़ों के अनुसार, नागपट्टिनम में लगभग 26,900 और तिरुवरूर में 21,555 किसान कुरुवाई पैकेज का लाभ नहीं उठा सके क्योंकि वे खेती शुरू ही नहीं कर पाए।

किसानों का नुकसान और माँगें

कई किसानों ने बताया कि कुरुवाई धान की खेती न हो पाने के कारण उन्हें प्रति एकड़ लगभग ₹10,000 का नुकसान हुआ। तिरुमारुगल में एक किसान की पाँच एकड़ में से तीन एकड़ की फसल कथित तौर पर सिंचाई स्रोत सूख जाने के कारण नष्ट हो गई। भीषण गर्मी, अपर्याप्त वर्षा और तेज़ी से गिरते भूजल स्तर को फसल बर्बादी का प्रमुख कारण बताया जा रहा है। किसान प्रतिनिधियों ने डेल्टा जिलों को कृषि संकटग्रस्त घोषित करने और ₹25,000 प्रति एकड़ मुआवजे की माँग रखी है — यह राहत उन किसानों को भी मिलनी चाहिए जो बुवाई नहीं कर सके और उन्हें भी जिनकी खड़ी फसलें बाद में बर्बाद हो गईं।

सांबा फसल पर मँडराता खतरा

किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि पानी की लगातार कमी और बढ़ते कृषि खर्च से आगामी सांबा फसल मौसम भी प्रभावित हो सकता है। उन्होंने मेटूर जलाशय से पानी छोड़े जाने के बाद सांबा खेती के लिए एक अलग विशेष पैकेज की भी माँग की है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब डेल्टा क्षेत्र में भूजल स्तर लगातार गिर रहा है और वैकल्पिक सिंचाई स्रोत भी अपर्याप्त साबित हो रहे हैं।

आगे की राह

किसान प्रतिनिधियों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है ताकि सांबा सीज़न में खेती फिर से पटरी पर आ सके और आजीविका का और नुकसान रोका जा सके। अब तक तमिलनाडु सरकार ने इन नई माँगों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। यदि सरकार ने समय पर कदम नहीं उठाए, तो डेल्टा क्षेत्र के कृषि संकट के और गहराने की आशंका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

उनके लिए यह योजना कागज़ पर ही रही। नागपट्टिनम में 96% रकबे की गिरावट केवल मौसमी विफलता नहीं, बल्कि नीतिगत खामी का प्रमाण है जहाँ राहत की पात्रता उत्पादन से जुड़ी है, न कि नुकसान से। जब तक मुआवजे की परिभाषा 'जो बो नहीं सका' को भी शामिल नहीं करती, डेल्टा का कृषि संकट हर सीज़न गहरा होता रहेगा। सांबा फसल पर मँडराता खतरा इस बात का संकेत है कि यदि अभी नहीं चेते, तो एक मौसमी संकट स्थायी कृषि पलायन में बदल सकता है।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कुरुवाई धान की खेती में इतनी भारी गिरावट क्यों आई?
आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, मेटूर बांध से 12 जून को निर्धारित तिथि पर पानी न छोड़े जाने, भीषण गर्मी, अपर्याप्त वर्षा और तेज़ी से गिरते भूजल स्तर के कारण नागपट्टिनम और तिरुवरूर जैसे डेल्टा जिलों में हज़ारों किसान कुरुवाई सीज़न में बुवाई ही नहीं कर सके। नागपट्टिनम में खेती का रकबा 2025 के लगभग 30,000 हेक्टेयर से घटकर 2026 में मात्र 1,720 हेक्टेयर रह गया।
तमिलनाडु सरकार का ₹134 करोड़ का कुरुवाई पैकेज किसे मिला?
यह पैकेज उन किसानों के लिए था जिन्होंने फ़िल्टर पॉइंट कुओं जैसे वैकल्पिक स्रोतों से सिंचाई कर धान की खेती की। जो किसान पानी की कमी के कारण खेती शुरू ही नहीं कर सके, उन्हें इस योजना के दायरे से बाहर रखा गया — जिससे नागपट्टिनम में लगभग 26,900 और तिरुवरूर में 21,555 किसान लाभ से वंचित रहे।
किसान प्रतिनिधियों ने सरकार से क्या माँगें रखी हैं?
किसान प्रतिनिधियों ने डेल्टा जिलों को कृषि संकटग्रस्त घोषित करने, प्रति एकड़ ₹25,000 मुआवजा देने और मेटूर जलाशय से पानी छोड़े जाने के बाद सांबा खेती के लिए एक अलग विशेष पैकेज लाने की माँग की है। यह राहत उन किसानों को भी मिलनी चाहिए जो बुवाई नहीं कर सके और उन्हें भी जिनकी खड़ी फसलें बाद में बर्बाद हो गईं।
सांबा फसल पर क्या खतरा है?
किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि पानी की लगातार कमी और बढ़ते कृषि खर्च से आगामी सांबा फसल मौसम भी प्रभावित हो सकता है। कई किसानों ने कहा कि सरकार के तत्काल हस्तक्षेप के बिना सांबा सीज़न में खेती फिर से शुरू करना और आजीविका के नुकसान को रोकना मुश्किल होगा।
तिरुमारुगल में किसानों की क्या स्थिति है?
तिरुमारुगल में एक किसान की पाँच एकड़ में से तीन एकड़ की फसल कथित तौर पर सिंचाई स्रोत सूख जाने के कारण नष्ट हो गई। कई किसानों ने कुरुवाई धान की खेती न हो पाने के कारण प्रति एकड़ लगभग ₹10,000 के नुकसान की सूचना दी है।
राष्ट्र प्रेस
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