कुरुवाई संकट: कावेरी डेल्टा के किसानों ने ₹25,000 प्रति एकड़ मुआवजे की माँग, नागपट्टिनम में 96% खेती घटी
सारांश
मुख्य बातें
कावेरी डेल्टा के हज़ारों किसानों ने तमिलनाडु सरकार से कुरुवाई धान मौसम में हुई फसल बर्बादी के लिए प्रति एकड़ ₹25,000 मुआवजे की माँग की है। नागपट्टिनम और तिरुवरूर जिलों में पानी की भारी कमी के कारण लाखों किसान इस सीज़न में बुवाई ही नहीं कर पाए, जबकि जो बोया उसमें से भी बड़ा हिस्सा सूख गया। आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, नागपट्टिनम में कुरुवाई के तहत खेती योग्य रकबा 2025 के लगभग 30,000 हेक्टेयर से घटकर 2026 में मात्र 1,720 हेक्टेयर रह गया — यानी लगभग 96% की गिरावट।
मुख्य घटनाक्रम
सरकार ने 12 जून को मेटूर बांध से पानी न छोड़े जाने के बाद ₹134 करोड़ के कुरुवाई विशेष पैकेज की घोषणा की थी। इस पैकेज का उद्देश्य फ़िल्टर पॉइंट कुओं सहित वैकल्पिक सिंचाई स्रोतों के ज़रिए धान की खेती को प्रोत्साहित करना था। हालाँकि, पानी की कमी के कारण जो किसान खेती ही शुरू नहीं कर सके, उन्हें इस योजना के दायरे से बाहर रखा गया — जिससे हज़ारों कृषि परिवार आय से वंचित रह गए।
आँकड़ों में संकट की गहराई
नागपट्टिनम में 2025 में लगभग 28,000 किसानों ने करीब 30,000 हेक्टेयर में धान उगाया था। 2026 में यह संख्या सिमटकर केवल लगभग 1,100 किसान और 1,720 हेक्टेयर रह गई। तिरुवरूर में कुरुवाई किसानों की संख्या 2025 के 59,885 से घटकर 2026 में 38,330 हो गई, और खेती का रकबा 77,573 हेक्टेयर से घटकर 46,338 हेक्टेयर रह गया। आँकड़ों के अनुसार, नागपट्टिनम में लगभग 26,900 और तिरुवरूर में 21,555 किसान कुरुवाई पैकेज का लाभ नहीं उठा सके क्योंकि वे खेती शुरू ही नहीं कर पाए।
किसानों का नुकसान और माँगें
कई किसानों ने बताया कि कुरुवाई धान की खेती न हो पाने के कारण उन्हें प्रति एकड़ लगभग ₹10,000 का नुकसान हुआ। तिरुमारुगल में एक किसान की पाँच एकड़ में से तीन एकड़ की फसल कथित तौर पर सिंचाई स्रोत सूख जाने के कारण नष्ट हो गई। भीषण गर्मी, अपर्याप्त वर्षा और तेज़ी से गिरते भूजल स्तर को फसल बर्बादी का प्रमुख कारण बताया जा रहा है। किसान प्रतिनिधियों ने डेल्टा जिलों को कृषि संकटग्रस्त घोषित करने और ₹25,000 प्रति एकड़ मुआवजे की माँग रखी है — यह राहत उन किसानों को भी मिलनी चाहिए जो बुवाई नहीं कर सके और उन्हें भी जिनकी खड़ी फसलें बाद में बर्बाद हो गईं।
सांबा फसल पर मँडराता खतरा
किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि पानी की लगातार कमी और बढ़ते कृषि खर्च से आगामी सांबा फसल मौसम भी प्रभावित हो सकता है। उन्होंने मेटूर जलाशय से पानी छोड़े जाने के बाद सांबा खेती के लिए एक अलग विशेष पैकेज की भी माँग की है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब डेल्टा क्षेत्र में भूजल स्तर लगातार गिर रहा है और वैकल्पिक सिंचाई स्रोत भी अपर्याप्त साबित हो रहे हैं।
आगे की राह
किसान प्रतिनिधियों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है ताकि सांबा सीज़न में खेती फिर से पटरी पर आ सके और आजीविका का और नुकसान रोका जा सके। अब तक तमिलनाडु सरकार ने इन नई माँगों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। यदि सरकार ने समय पर कदम नहीं उठाए, तो डेल्टा क्षेत्र के कृषि संकट के और गहराने की आशंका है।