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पश्चिम बंगाल में कोयला-बालू की अवैध लूट रोकने से राजस्व में 33% की बढ़ोतरी: दिलीप घोष

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पश्चिम बंगाल में कोयला-बालू की अवैध लूट रोकने से राजस्व में 33% की बढ़ोतरी: दिलीप घोष

सारांश

पश्चिम बंगाल में कोयला, बालू और लकड़ी की अवैध लूट पर नकेल कसने के बाद राज्य के राजस्व में 33 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है — यह दावा मंत्री दिलीप घोष ने किया। साथ ही उन्होंने यूपीआई चार्ज को जायज ठहराया और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला।

मुख्य बातें

मंत्री दिलीप घोष ने 16 सितंबर को न्यूटाउन में कहा कि कोयला, बालू और लकड़ी की अवैध लूट रोकने से राजस्व में 33% की वृद्धि हुई।
अवैध खनन और तस्करी पर सख्ती का सीधा लाभ राज्य के खजाने को मिला, यह रुझान जारी रहने की उम्मीद।
₹2,000 से अधिक के व्यापारिक लेनदेन पर 0.4% यूपीआई चार्ज को घोष ने उचित ठहराया, कहा — सेवा के लिए शुल्क जरूरी।
घोष ने कांग्रेस पर निशाना साधा, राहुल गांधी और पी.
चिदंबरम का नाम लेते हुए ब्रिक्स भोजन विवाद का उल्लेख किया।
राज्य सरकार के राजस्व वृद्धि के दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।

पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री दिलीप घोष ने 16 सितंबर को न्यूटाउन में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि राज्य में कोयला, बालू और लकड़ी जैसे प्राकृतिक संसाधनों की अवैध लूट पर सख्ती करने के बाद सरकारी राजस्व में 33 फीसदी की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने यूपीआई चार्ज और कांग्रेस पार्टी पर भी अपनी राय रखी।

राजस्व में उछाल: अवैध खनन पर नकेल का असर

मंत्री दिलीप घोष ने कहा, 'पश्चिम बंगाल में सालों से कोयला, बालू और लकड़ी जैसे प्राकृतिक संसाधनों की लूट हो रही थी, जिससे राज्य को कोई राजस्व नहीं मिल रहा था। इस चोरी पर रोक लगाने से सरकारी राजस्व में 33 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है और यह सकारात्मक रुझान आगे भी जारी रहेगा।' उन्होंने स्पष्ट किया कि अवैध खनन और तस्करी पर की गई सख्ती का सीधा लाभ राज्य के खजाने को मिला है।

यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में प्राकृतिक संसाधनों की अवैध निकासी लंबे समय से एक बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दा रही है। गौरतलब है कि कोयला और बालू माफिया से जुड़े मामले राज्य की जाँच एजेंसियों के सामने पहले भी आते रहे हैं।

यूपीआई चार्ज पर मंत्री का रुख

₹2,000 से अधिक के व्यापारिक लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत यूपीआई शुल्क लगाने के प्रस्ताव पर पूछे गए सवाल पर घोष ने कहा, 'कोई भी कंपनी जो सेवा देती है, वह फीस लेती है। सरकार की यूपीआई सेवा ने बहुत सुविधा दी है, इसलिए सिस्टम में अनुशासन बनाए रखने और राजस्व पैदा करने के लिए एक न्यूनतम शुल्क लिया जाना चाहिए।' उन्होंने जोड़ा कि यूपीआई के रखरखाव के लिए यह शुल्क आवश्यक है।

हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि यूपीआई चार्ज छोटे व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डाल सकता है, जो डिजिटल भुगतान को अपनाने की गति को धीमा कर सकता है।

कांग्रेस पर तीखा प्रहार

मंत्री दिलीप घोष ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, 'कांग्रेस ने लोगों को कुछ नहीं दिया, सिर्फ लूटा है। अगर जनता को लगता है कि बहुत ज्यादा हो रहा है, तो वह विरोध करेगी।' उन्होंने ब्रिक्स सम्मेलन में परोसे गए भोजन को लेकर कांग्रेस नेताओं की आपत्तियों का भी उल्लेख किया और कहा, 'वे हर चीज में कूद पड़ते हैं, यहाँ तक कि ब्रिक्स में विदेशी मेहमानों को क्या परोसा जाएगा, इस पर भी परेशानी जताते हैं।'

उन्होंने राहुल गांधी और पी. चिदंबरम का नाम लेते हुए कहा कि जिन्होंने वास्तव में खाना खाया उन्हें कोई समस्या नहीं हुई और वे भारतीय खाने की तारीफ करते हुए घर गए। घोष ने कहा, 'इसलिए, कांग्रेस को अपनी मानसिकता बदलने की जरूरत है।'

आगे क्या

मंत्री घोष के अनुसार, अवैध खनन पर सख्ती का यह सकारात्मक रुझान भविष्य में भी जारी रहने की उम्मीद है। राज्य सरकार के इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है, और विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया आने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी स्वतंत्र पुष्टि के बिना यह केवल एक राजनीतिक कथन बना रहता है। पश्चिम बंगाल में कोयला और बालू माफिया की जड़ें गहरी रही हैं और अतीत में कई सरकारों ने इस पर नकेल कसने के दावे किए हैं, पर नतीजे सीमित रहे। यूपीआई चार्ज पर उनका तर्क आर्थिक रूप से तर्कसंगत लग सकता है, किंतु छोटे व्यापारियों पर इसके असर का आकलन किए बिना यह नीति उल्टी पड़ सकती है। कांग्रेस पर हमला राजनीतिक रूप से परिचित है, लेकिन असली सवाल यह है कि राजस्व वृद्धि का लाभ आम नागरिक तक कैसे और कब पहुँचेगा।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल में राजस्व में 33% की बढ़ोतरी कैसे हुई?
मंत्री दिलीप घोष के अनुसार, राज्य में कोयला, बालू और लकड़ी जैसे प्राकृतिक संसाधनों की अवैध लूट और तस्करी पर सख्ती करने के बाद सरकारी राजस्व में 33 फीसदी की वृद्धि हुई है। यह दावा 16 सितंबर को न्यूटाउन में पत्रकारों से बातचीत में किया गया।
यूपीआई चार्ज को लेकर दिलीप घोष का क्या कहना है?
दिलीप घोष ने ₹2,000 से अधिक के व्यापारिक लेनदेन पर 0.4% यूपीआई शुल्क को उचित ठहराया। उनका तर्क है कि जो सेवा दी जाती है उसके लिए शुल्क लेना स्वाभाविक है और सिस्टम में अनुशासन बनाए रखने के लिए यह जरूरी है।
दिलीप घोष ने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाए?
घोष ने कहा कि कांग्रेस ने जनता को कुछ नहीं दिया, बल्कि लूटा है। उन्होंने ब्रिक्स सम्मेलन में परोसे गए भोजन को लेकर राहुल गांधी और पी. चिदंबरम की आपत्तियों को अनावश्यक बताया और कहा कि कांग्रेस को अपनी मानसिकता बदलने की जरूरत है।
पश्चिम बंगाल में अवैध खनन पर सख्ती का क्या असर हुआ?
मंत्री घोष के दावे के अनुसार, अवैध खनन और तस्करी पर नकेल कसने से राज्य के खजाने को सीधा फायदा हुआ और राजस्व में 33% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालाँकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।
क्या यूपीआई चार्ज से आम उपभोक्ताओं पर असर पड़ेगा?
प्रस्तावित 0.4% यूपीआई शुल्क केवल ₹2,000 से अधिक के व्यापारिक लेनदेन पर लागू होने की बात कही गई है। आलोचकों का कहना है कि इससे छोटे व्यापारियों और उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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