पश्चिम बंगाल सरकार की बिना टैक्स बढ़ाए राजस्व बढ़ाने की रणनीति: खदान-खनन घोटाले पर शिकंजा
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल की सुवेंदु अधिकारी सरकार ने राज्य के नागरिकों पर कोई अतिरिक्त कर-भार डाले बिना अपना कर-राजस्व बढ़ाने की ठोस रणनीति अपनाई है। 24 जून 2026 को विधानसभा में प्रस्तुत आँकड़ों के अनुसार, कर संग्रहण की खामियों को दूर करने की यह प्रक्रिया पहले ही राज्य के खजाने में अतिरिक्त राजस्व जोड़ने लगी है। सरकार का मानना है कि भ्रष्टाचार और ई-चालान धोखाधड़ी पर नकेल कसकर ही यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
राजस्व वृद्धि की असली चाबी कहाँ है
राज्य के वित्त विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता द्वारा पेश 2026-27 के बजट प्रस्तावों में भले ही कर-राजस्व सुधार के लिए कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं दिखे, लेकिन राजस्व वृद्धि की असली नींव उन निर्णयों में छिपी है जो नई कैबिनेट ने 9 मई को कार्यभार संभालने के पहले दिन से लेने शुरू किए थे। अधिकारी के अनुसार इन फैसलों का असर अब दिखने लगा है और कुछ कर-श्रेणियों में संग्रहण में उल्लेखनीय सुधार दर्ज हुआ है।
ई-चालान धोखाधड़ी पर कार्रवाई
सरकार की प्राथमिकताओं में पत्थर खदानों और बालू खनन क्षेत्र में कर संग्रहण प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाना शामिल है। वित्त विभाग के अधिकारी ने बताया कि ई-चालान में होने वाली धोखाधड़ी की संभावना को समाप्त किया जा रहा है, जो कथित तौर पर पिछले तृणमूल कांग्रेस (TMC) शासनकाल में व्यापक रूप से प्रचलित थी। नदी के तल से बालू ले जाने वाले ट्रकों को विभिन्न चेक-पोस्टों पर जारी किए जाने वाले ये ई-चालान ऊपरी तौर पर सही दिखते थे, लेकिन इनकी तैयारी में धोखाधड़ी होती थी। इसके चलते खनन संचालक सरकार को सही कर चुकाने की बजाय भ्रष्ट अधिकारियों को रिश्वत देकर काम चलाते थे।
वित्त विभाग के अधिकारी ने कहा, 'अब ऐसी कमियों को दूर करने से एक तीर से दो निशाने लगेंगे। एक तरफ सिस्टम में रिश्वत के रूप में अवैध वसूली का सिलसिला खत्म हो जाएगा और साथ ही राज्य के अपने टैक्स सिस्टम में रेवेन्यू का प्रवाह अपने आप बढ़ जाएगा।' इस धोखाधड़ी में शामिल सरकारी अधिकारियों की पहचान की प्रक्रिया शुरू हो गई है और उनकी जगह ईमानदार अधिकारियों को लाया जाएगा।
बीरभूम खदानों से राजस्व में उछाल
मंगलवार को विधानसभा के बजट सत्र में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी द्वारा पेश आँकड़ों के अनुसार, पिछली TMC सरकार के दौरान मुख्य रूप से बीरभूम जिले में स्थित पत्थर की खदानों से राज्य सरकार की औसत कमाई लगभग ₹60 करोड़ थी। नई कैबिनेट के 9 मई को कार्यभार संभालने के बाद से इसी स्रोत से प्राप्त राजस्व बढ़कर ₹83 करोड़ हो गया है। यह वृद्धि यह दर्शाती है कि बिना कर-दरें बढ़ाए, केवल व्यवस्था में सुधार से राजस्व में उल्लेखनीय इज़ाफा संभव है।
सिंगल-विंडो प्रणाली से 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस'
22 जून को विधानसभा में बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने घोषणा की कि ₹100 करोड़ या उससे अधिक के सभी निवेश प्रस्तावों को राज्य सरकार की 'सिंगल-विंडो प्रणाली' के माध्यम से सभी आवश्यक मंजूरियाँ दी जाएंगी। इससे निवेशकों को अलग-अलग विभागों से अनुमतियाँ लेने की परेशानी से राहत मिलेगी। वित्त विभाग के अधिकारी के अनुसार, इस नीति का मुख्य उद्देश्य व्यवसाय करने में सुगमता बढ़ाना है, लेकिन इसके माध्यम से मंजूरी प्रक्रिया में रिश्वतखोरी समाप्त करने की भी पर्याप्त संभावना है।
मुख्यमंत्री अधिकारी ने कहा, 'अतीत में विभिन्न विभागों से अलग-अलग मंजूरियाँ प्राप्त करने की व्यवस्था में भ्रष्टाचार के कई मामले सामने आए हैं, लेकिन जब सभी मंजूरियाँ सिंगल-विंडो प्रणाली के माध्यम से दी जाएंगी, तो भ्रष्टाचार की ऐसी संभावनाएँ समाप्त हो जाएंगी।' उन्होंने कहा कि नए उद्यमी केवल वैध शुल्क चुकाकर अपना व्यवसाय शुरू कर सकेंगे, जिससे राज्य के राजस्व संग्रहण में भी वृद्धि होगी।
आगे क्या होगा
सरकार के इन कदमों की दीर्घकालिक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि ई-चालान सुधार और सिंगल-विंडो प्रणाली को ज़मीनी स्तर पर कितनी प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब राज्य के राजकोषीय स्वास्थ्य पर दबाव बना हुआ है और केंद्र से अनुदान को लेकर भी तनाव रहा है। आने वाले महीनों में खनन और निवेश क्षेत्र से राजस्व के आँकड़े इस रणनीति की असली परीक्षा होंगे।