झारखंड में 300 बालू घाट जल्द होंगे चालू, ₹3,000 करोड़ राजस्व का लक्ष्य: हेमंत सोरेन
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 3 जून को राज्य में पहले से नीलाम हो चुके 300 बालू घाटों को शीघ्र संचालित करने के निर्देश जारी किए, जिनसे राज्य को अनुमानित ₹3,000 करोड़ का राजस्व मिल सकता है। रांची स्थित मंत्रालय में बुधवार को खान एवं भू-तत्व तथा भवन निर्माण विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने खनिज क्षेत्र में पारदर्शिता और राजस्व वृद्धि को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।
मुख्य घटनाक्रम
बैठक में सोरेन ने स्पष्ट किया कि खनिज संपदा राज्य की एक महत्वपूर्ण परिसंपत्ति है और इसके पारदर्शी उपयोग से न केवल राजस्व में बढ़ोतरी होगी, बल्कि स्थानीय निवासियों को भी सीधा लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने अवैध खनन, अवैध परिवहन, ओवरलोडिंग और बालू माफिया के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के आदेश दिए।
कोल ब्लॉक और बंद खदानों पर निर्देश
मुख्यमंत्री ने नीलाम हो चुके लेकिन विभिन्न अनुमतियों के अभाव में लंबित कोल ब्लॉकों को शीघ्र चालू कराने का निर्देश दिया। बीसीसीएल, सीसीएल और ईसीएल की बंद पड़ी खदानों के मामले में उन्होंने उत्पादन पुनः शुरू कराने अथवा लीज निरस्त कर पुनर्नीलामी की प्रक्रिया अपनाने का निर्देश दिया। साथ ही कार्यरत और गैर-कार्यरत खनन क्षेत्रों की मैपिंग कराने को कहा गया।
स्वर्ण खदानों पर विशेष ज़ोर
सोरेन ने राज्य की सात स्वर्ण खदानों की वर्तमान स्थिति का आकलन करते हुए गोल्ड माइनिंग सेक्टर को मज़बूत बनाने पर बल दिया। आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, इन खदानों से वर्तमान में लगभग 20 किलोग्राम स्वर्ण का वार्षिक उत्पादन हो रहा है। मुख्यमंत्री ने उत्पादन बढ़ाने, संचालन संबंधी बाधाओं को दूर करने और नए संभावित स्वर्ण खदानों की नीलामी प्रक्रिया तेज़ करने के निर्देश दिए।
जेएसएमडीसी और जेएमईसीएल को सशक्त करने की योजना
मुख्यमंत्री ने झारखंड स्टेट मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (जेएसएमडीसी) और झारखंड माइनिंग एंड एक्सप्लोरेशन कंपनी (जेएमईसीएल) के लिए अधिक खनिज क्षेत्र आरक्षित करने, रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्ति करने तथा दोनों संस्थाओं के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने को कहा। उन्होंने डीएमएफटी फंड के प्रभावी उपयोग तथा खनन क्षेत्र में रोज़गार सृजन पर भी ज़ोर दिया।
क्या होगा आगे
बैठक में मुख्य सचिव अविनाश कुमार, विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। गौरतलब है कि झारखंड लंबे समय से अवैध बालू खनन और राजस्व रिसाव की चुनौतियों से जूझ रहा है, और 300 घाटों के एक साथ चालू होने को राज्य के खनिज प्रशासन में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।