झारखंड में छह साल में सिर्फ 3 खनिज ब्लॉक नीलाम: बाबूलाल मरांडी का हेमंत सरकार पर बड़ा हमला
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने गुरुवार, 16 जुलाई को रांची स्थित भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली राज्य सरकार खनिज प्रबंधन में पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2019-20 से अब तक देशभर में 434 खनिज ब्लॉकों की नीलामी हुई, जबकि खनिज-समृद्ध झारखंड में केवल तीन ब्लॉकों की नीलामी की गई।
मुख्य आरोप और आंकड़े
मरांडी के अनुसार झारखंड के पास देश के लगभग 40 प्रतिशत खनिज संसाधन हैं, फिर भी राज्य खनन उत्पादन, राजस्व और रोजगार के मामले में अपनी क्षमता से कोसों दूर है। उन्होंने पश्चिमी सिंहभूम के सारंडा क्षेत्र के हालिया दौरे का हवाला देते हुए कहा कि वहाँ कई लौह अयस्क खदानों की लीज समाप्त होने के बाद न तो नवीनीकरण हुआ और न ही पुनः नीलामी — जिससे वर्षों से खदानें बंद पड़ी हैं और स्थानीय रोजगार के अवसर लगातार घटे हैं।
ओडिशा से तुलना: नीतियों का फर्क
मरांडी ने जामदा बाजार का उदाहरण देते हुए कहा कि एक समय आर्थिक गतिविधियों का केंद्र रहा यह क्षेत्र आज मंदी की चपेट में है, जबकि महज 20 किलोमीटर दूर ओडिशा का बड़बिल क्षेत्र समय पर नीलामी और उत्पादन वृद्धि के कारण तेजी से विकसित हुआ है। उन्होंने तर्क दिया कि दोनों क्षेत्रों के बीच का अंतर संसाधनों का नहीं, बल्कि नीतियों और प्रशासनिक इच्छाशक्ति का है।
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2018-19 से 2024-25 के बीच ओडिशा का लौह अयस्क उत्पादन 120 मिलियन टन से बढ़कर 180 मिलियन टन हो गया, जबकि झारखंड का उत्पादन लगभग 23 मिलियन टन पर स्थिर रहा। राजस्व के मोर्चे पर भी यह खाई स्पष्ट है — वर्ष 2025-26 में झारखंड को खनन क्षेत्र से लगभग ₹22,000 करोड़ का राजस्व मिला, जबकि कम खनिज संसाधन वाले ओडिशा ने करीब ₹46,000 करोड़ अर्जित किए।
डीएमएफटी फंड पर पारदर्शिता के सवाल
मरांडी ने पश्चिमी सिंहभूम में जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) के फंड उपयोग पर भी गंभीर सवाल उठाए। उनके दावे के अनुसार, वर्ष 2016 से 2026 के बीच जिले में करीब ₹3,700 करोड़ DMFT मद में जमा हुए, लेकिन वार्षिक रिपोर्ट, बजट और परियोजनाओं का विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया। उन्होंने बताया कि संबंधित वेबसाइट पर अंतिम अपडेट वर्ष 2018 का है, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।
अन्य प्रभावित क्षेत्र और माँगें
मरांडी ने यह भी कहा कि नोआमुंडी क्षेत्र की अधिकांश पत्थर खदानें बंद हैं और झींकपानी स्थित एसीसी संयंत्र के बंद होने से लगभग 1,600 परिवार प्रभावित होंगे। उनका कहना था कि सरकार निवेश और औद्योगिक विकास के दावे कर रही है, जबकि ज़मीनी हकीकत इसके विपरीत है।
नेता प्रतिपक्ष ने राज्य सरकार से बंद खदानों की शीघ्र नीलामी, खनन गतिविधियाँ पुनः शुरू करने की समयबद्ध कार्ययोजना, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार सृजन और DMFT फंड के उपयोग का पूरा विवरण सार्वजनिक करने की माँग की। उन्होंने स्पष्ट किया कि खनिज संपदा पर पहला अधिकार राज्य की जनता का है — और सरकार को बताना होगा कि प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध क्षेत्रों के लोग आज भी बुनियादी सुविधाओं और विकास से वंचित क्यों हैं।