10 जुलाई 2026
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झारखंड में ₹1 लाख करोड़ के 14 एमओयू पर मरांडी का सवाल: निवेशक क्यों नहीं आ रहे?

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झारखंड में ₹1 लाख करोड़ के 14 एमओयू पर मरांडी का सवाल: निवेशक क्यों नहीं आ रहे?

सारांश

झारखंड सरकार के ₹1 लाख करोड़ के निवेश दावों पर विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने तीखे सवाल उठाए हैं — एमओयू की लंबी सूची, वित्त मंत्री की कथित अनुपस्थिति और बिगड़ती कानून-व्यवस्था को निवेशकों के न आने की असली वजह बताया।

मुख्य बातें

झारखंड सरकार ने नई दिल्ली में 'नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन 2026' में 14 एमओयू पर हस्ताक्षर किए और ₹1 लाख करोड़ के प्रस्तावित निवेश का दावा किया।
विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने कहा कि हेमंत सोरेन सरकार पहले भी ऐसे दावे कर चुकी है, लेकिन धरातल पर कोई ठोस परिणाम नहीं आया।
मरांडी ने कार्यक्रम में वित्त मंत्री की कथित अनुपस्थिति पर सवाल उठाए, जिसे उन्होंने सरकार की गंभीरता पर संदेह का संकेत बताया।
निवेश न आने की सबसे बड़ी वजह राज्य की बिगड़ती कानून-व्यवस्था बताई — हत्या, रंगदारी और अपहरण की घटनाओं का हवाला दिया।
मरांडी ने कहा कि सरकार का ध्यान प्रचार पर अधिक है, वास्तविक औद्योगिक विकास पर कम।

झारखंड विधानसभा में विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने 10 जुलाई 2026 को राज्य सरकार द्वारा नई दिल्ली में आयोजित 'नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन 2026' में हुए 14 समझौता ज्ञापनों (एमओयू) और करीब ₹1 लाख करोड़ के प्रस्तावित निवेश के दावों पर तीखे सवाल उठाए। मरांडी ने कहा कि सरकार पहले भी ऐसे बड़े-बड़े दावे करती रही है, लेकिन धरातल पर कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया।

एमओयू और दावों पर विपक्ष की आपत्ति

मरांडी ने कहा कि हेमंत सोरेन सरकार इससे पहले भी निवेश के नाम पर बड़ी घोषणाएँ कर चुकी है और विदेश यात्राएँ भी की गई हैं, लेकिन उन प्रयासों का कोई खास नतीजा राज्य को नहीं मिला। उन्होंने कहा, 'अब फिर बैठकें हो रही हैं, एमओयू पर हस्ताक्षर किए जा रहे हैं, लेकिन असली सवाल यह है कि इन समझौतों का धरातल पर कितना असर दिखाई देगा।' गौरतलब है कि झारखंड में निवेश सम्मेलनों और एमओयू की लंबी परंपरा रही है, लेकिन वास्तविक औद्योगिक रूपांतरण के आँकड़े अपेक्षाओं से पीछे रहे हैं।

वित्त मंत्री की कथित अनुपस्थिति पर सवाल

मरांडी ने कार्यक्रम में राज्य के वित्त मंत्री की कथित अनुपस्थिति को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि जानकारी के अनुसार वित्त मंत्री दिल्ली में मौजूद थे, लेकिन कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। उनके अनुसार, वित्त विभाग किसी भी निवेश प्रक्रिया में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और उनकी उपस्थिति निवेशकों के बीच सरकार की गंभीरता का सकारात्मक संदेश देती। मरांडी ने कहा कि 'उनकी अनुपस्थिति से ऐसा प्रतीत हुआ कि सरकार स्वयं इस निवेश अभियान को लेकर पूरी तरह गंभीर नहीं है।'

कानून-व्यवस्था: निवेश न आने की असली वजह

विपक्ष के नेता ने आरोप लगाया कि झारखंड में उद्योग न लगने की सबसे बड़ी वजह राज्य की बिगड़ती कानून-व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि राज्य में लगातार हत्या, चोरी, डकैती और अपहरण जैसी घटनाएँ हो रही हैं, जिससे निवेशकों का भरोसा कमज़ोर होता है। मरांडी के अनुसार, अपराधी विदेशों से फोन कर करोड़ों रुपए की रंगदारी माँग रहे हैं और सरकार मूकदर्शक बनी हुई है। उन्होंने कहा, 'निवेश वहीं आता है, जहाँ अमन-चैन और सुरक्षा का माहौल होता है।'

सुरक्षित माहौल के बिना निवेश संभव नहीं

मरांडी ने तर्क दिया कि उद्योग लगाने के लिए सबसे पहले सुरक्षित वातावरण ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि यदि राज्य में कानून-व्यवस्था मज़बूत होगी तो निवेशक स्वयं जमीन खरीदकर उद्योग स्थापित कर लेंगे। देश के जिन राज्यों में सुरक्षा और स्थिरता का माहौल है, वहाँ उद्योगपति बिना किसी विशेष प्रयास के निवेश करते हैं। आलोचकों का कहना है कि झारखंड की खनिज संपदा और भौगोलिक स्थिति के बावजूद औद्योगिक निवेश अपेक्षित गति से नहीं बढ़ पाया है।

प्रचार बनाम वास्तविकता

मरांडी ने तंज कसते हुए कहा कि निवेश की खबरें अखबारों की सुर्खियाँ ज़रूर बनती हैं और कुछ दिनों तक लोगों में उम्मीद जगाती हैं, लेकिन बाद में इन घोषणाओं का क्या हुआ, इसका कोई जवाब नहीं मिलता। उन्होंने कहा, 'सरकार का अधिक ध्यान प्रचार पर है, जबकि वास्तविक निवेश और औद्योगिक विकास पर अपेक्षित गंभीरता दिखाई नहीं देती।' यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड सरकार राज्य को निवेश के लिए प्रमुख गंतव्य के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश कर रही है। अब देखना होगा कि नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन 2026 के एमओयू वास्तविक औद्योगिक परियोजनाओं में बदलते हैं या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन वास्तविक औद्योगिक रूपांतरण के आँकड़े निराशाजनक रहे हैं। मरांडी का कानून-व्यवस्था वाला तर्क राजनीतिक रूप से सुविधाजनक है, लेकिन इसमें तथ्यात्मक आधार भी है — निवेशक सर्वेक्षण बार-बार सुरक्षा और नियामकीय स्थिरता को प्राथमिकता देते हैं। वित्त मंत्री की कथित अनुपस्थिति का मुद्दा छोटा लग सकता है, पर यह सांकेतिक है — निवेशक ऐसे संकेतों को गंभीरता से लेते हैं। असली परीक्षा यह है कि सरकार इन 14 एमओयू को समयबद्ध और सत्यापन-योग्य परियोजनाओं में बदल पाती है या नहीं।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन 2026 में झारखंड के लिए क्या हुआ?
नई दिल्ली में आयोजित इस कार्यक्रम में झारखंड सरकार ने 14 समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए और करीब ₹1 लाख करोड़ के प्रस्तावित निवेश का दावा किया। यह आयोजन राज्य में निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया था।
बाबूलाल मरांडी ने झारखंड में निवेश न आने की क्या वजह बताई?
मरांडी ने राज्य की बिगड़ती कानून-व्यवस्था को सबसे बड़ी वजह बताया — हत्या, चोरी, डकैती, अपहरण और विदेशों से रंगदारी की माँग जैसी घटनाओं का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि जिस राज्य में सुरक्षा का माहौल नहीं हो, वहाँ कोई उद्योगपति पूंजी लगाने का जोखिम नहीं उठाएगा।
वित्त मंत्री की अनुपस्थिति पर मरांडी ने क्यों सवाल उठाए?
मरांडी के अनुसार, वित्त मंत्री दिल्ली में मौजूद थे लेकिन कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। उनका कहना था कि वित्त विभाग किसी भी निवेश प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाता है और उनकी उपस्थिति निवेशकों को सरकार की गंभीरता का संदेश देती।
क्या झारखंड सरकार पहले भी ऐसे निवेश दावे कर चुकी है?
मरांडी के अनुसार, हेमंत सोरेन सरकार पहले भी बड़े निवेश के दावे कर चुकी है और विदेश यात्राएँ भी की गई हैं, लेकिन उन प्रयासों का कोई खास नतीजा राज्य को नहीं मिला। उन्होंने कहा कि इस बार भी वास्तविक निवेश होने का इंतजार करना होगा।
झारखंड में निवेश के लिए सबसे ज़रूरी क्या है?
मरांडी के अनुसार, उद्योग लगाने के लिए सबसे पहले सुरक्षित वातावरण ज़रूरी है — जमीन उपलब्ध कराना दूसरा विषय है। उन्होंने कहा कि यदि कानून-व्यवस्था मज़बूत हो तो निवेशक स्वयं जमीन खरीदकर उद्योग स्थापित कर लेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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