झारखंड ट्रेजरी घोटाला: मरांडी ने CM सोरेन को दूसरा पत्र लिखकर CBI जांच की मांग दोहराई, ₹130 करोड़ की अवैध निकासी का आरोप

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झारखंड ट्रेजरी घोटाला: मरांडी ने CM सोरेन को दूसरा पत्र लिखकर CBI जांच की मांग दोहराई, ₹130 करोड़ की अवैध निकासी का आरोप

सारांश

झारखंड में ट्रेजरी घोटाले की आंच अब 14 जिलों तक फैल चुकी है और ₹130 करोड़ की अवैध निकासी के आरोप हैं। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने CM सोरेन को दूसरा पत्र लिखकर CBI जांच की मांग दोहराई है — और चेताया है कि निष्क्रियता रही तो यह बिहार के चारा घोटाले जैसा रूप ले सकता है।

मुख्य बातें

बाबूलाल मरांडी ने 15 मई 2025 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को दूसरा पत्र लिखकर ट्रेजरी घोटाले की CBI जांच की मांग दोहराई।
करीब 14 जिलों के कोषागारों से लगभग ₹130 करोड़ की अवैध निकासी की जानकारी सामने आ चुकी है।
बोकारो के गिरफ्तार लेखपाल कौशल पांडे को अकेला आरोपी बताने पर मरांडी ने सवाल उठाए; ई-कुबेर प्रणाली में व्यापक छेड़छाड़ का आरोप।
मरांडी ने जैप-आईटी , डीएसपी व एसपी स्तर के अधिकारियों और तीन सरकारी विभागों की भूमिका की जांच की मांग की।
एक महीने पहले पत्र लिखे जाने के बावजूद राज्य सरकार की ओर से कोई ठोस पहल नहीं होने का आरोप।

झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने 15 मई 2025 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पुनः पत्र लिखकर राज्य के ट्रेजरी घोटाले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग दोहराई है। मरांडी के अनुसार, करीब एक महीने पहले इसी विषय पर पत्र भेजे जाने के बावजूद राज्य सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

घोटाले का दायरा और आरोप

मरांडी ने अपने पत्र में दावा किया है कि अब तक हजारीबाग, बोकारो, पलामू, गढ़वा, रांची, गुमला, देवघर, जमशेदपुर और साहिबगंज समेत करीब 14 जिलों के कोषागारों से लगभग ₹130 करोड़ की अवैध निकासी की जानकारी सामने आ चुकी है। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि राज्यव्यापी संगठित आर्थिक अपराध का उदाहरण है।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो झारखंड में भी बिहार के चारा घोटाले जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जिसमें अधिकारियों के साथ-साथ सरकार में बैठे जिम्मेदार लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।

ई-कुबेर प्रणाली में कथित छेड़छाड़

पत्र में बोकारो के गिरफ्तार लेखपाल कौशल पांडे को पूरे मामले का मुख्य आरोपी बताने पर सवाल उठाया गया है। मरांडी का तर्क है कि ई-कुबेर प्रणाली में छेड़छाड़ और करोड़ों रुपए की अवैध निकासी जैसा जटिल काम किसी एक व्यक्ति के बूते संभव नहीं लगता। उन्होंने बोकारो में तत्कालीन डीएसपी स्तर के अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच की मांग की है।

मरांडी ने यह भी मांग की है कि झारखंड सरकार की तकनीकी एजेंसी जैप-आईटी की भूमिका की जांच कराई जाए, ताकि तकनीकी स्तर पर हुई कथित हेराफेरी का खुलासा हो सके।

हजारीबाग और अन्य विभागों में कथित अनियमितताएं

नेता प्रतिपक्ष ने हजारीबाग ट्रेजरी मामले का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि पुलिस विभाग के कुछ कर्मियों ने मृतक पुलिसकर्मियों के आश्रितों के नाम पर खोले गए खातों का दुरुपयोग कर सरकारी राशि की अवैध निकासी की और उसे रिश्तेदारों एवं परिचितों के खातों में ट्रांसफर किया। उन्होंने ऊर्जा विभाग, पथ निर्माण विभाग और पेयजल एवं स्वच्छता विभाग में पूर्व में सामने आए कथित अवैध निकासी मामलों का भी जिक्र किया।

अधिकारियों की जवाबदेही पर जोर

मरांडी ने कहा कि विभिन्न जिलों में ट्रेजरी से होने वाली निकासी की निगरानी की जिम्मेदारी जिला स्तर के डीडीओ और पुलिस अधीक्षकों की होती है। ऐसे में पूरे मामले में डीएसपी और एसपी स्तर के अधिकारियों की भूमिका की गहन जांच जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि शुरुआत में यह मामला बोकारो और हजारीबाग तक सीमित माना जा रहा था, लेकिन जांच आगे बढ़ने के साथ कई अन्य जिलों में भी गड़बड़ियां सामने आईं, और जिस तेजी से नए खुलासे हो रहे हैं, उससे घोटाले का दायरा और बड़ा होने की आशंका है।

राज्य सरकार की ओर से मरांडी के आरोपों पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह मामला आने वाले दिनों में झारखंड की राजनीति में और अधिक गरमाने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि प्रणालीगत विफलता है। ई-कुबेर जैसी डिजिटल प्रणाली में सेंध का मतलब है कि तकनीकी निगरानी तंत्र या तो कमज़ोर था या जानबूझकर नज़रअंदाज़ किया गया — और यह सवाल सिर्फ विपक्ष का नहीं, लोकहित का है। राज्य सरकार का एक महीने तक चुप रहना जवाबदेही की दृष्टि से चिंताजनक है। बिना स्वतंत्र और समयबद्ध जांच के, यह घोटाला झारखंड की वित्तीय साख पर स्थायी धब्बा बन सकता है।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड ट्रेजरी घोटाला क्या है?
झारखंड ट्रेजरी घोटाला राज्य के कोषागारों से ई-कुबेर प्रणाली में कथित छेड़छाड़ के जरिए की गई अवैध निकासी का मामला है। अब तक 14 जिलों में लगभग ₹130 करोड़ की अनधिकृत निकासी की जानकारी सामने आई है।
बाबूलाल मरांडी ने CBI जांच की मांग क्यों की है?
मरांडी का कहना है कि घोटाले की व्यापकता और जटिलता — जिसमें ई-कुबेर प्रणाली में तकनीकी हेराफेरी और कई जिले शामिल हैं — राज्य एजेंसियों की जांच से परे है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एक महीने पहले पत्र लिखने के बाद भी राज्य सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
इस मामले में कौशल पांडे कौन हैं?
कौशल पांडे बोकारो के एक लेखपाल हैं जिन्हें इस मामले में गिरफ्तार किया गया है और उन्हें मुख्य आरोपी बताया जा रहा है। हालांकि मरांडी ने सवाल उठाया है कि इतने बड़े और तकनीकी रूप से जटिल घोटाले को अकेले एक व्यक्ति अंजाम नहीं दे सकता।
जैप-आईटी की जांच की मांग क्यों की जा रही है?
जैप-आईटी झारखंड सरकार की तकनीकी एजेंसी है जो ई-कुबेर जैसी प्रणालियों के रखरखाव से जुड़ी है। मरांडी का आरोप है कि तकनीकी स्तर पर हुई कथित हेराफेरी की जांच के लिए इस एजेंसी की भूमिका की भी पड़ताल जरूरी है।
इस घोटाले से कौन-कौन से जिले प्रभावित हैं?
मरांडी के पत्र के अनुसार हजारीबाग, बोकारो, पलामू, गढ़वा, रांची, गुमला, देवघर, जमशेदपुर और साहिबगंज समेत करीब 14 जिलों के कोषागार इस मामले में संदेह के दायरे में हैं। शुरुआत में यह मामला केवल बोकारो और हजारीबाग तक सीमित माना जा रहा था।
राष्ट्र प्रेस
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