बाबूलाल मरांडी ने राज्यपाल से की सीबीआई जांच की मांग, शराब घोटाले का मामला तूल पकड़ता
सारांश
Key Takeaways
- बाबूलाल मरांडी ने राज्यपाल से सीबीआई जांच की मांग की।
- शराब घोटाले की राशि 750 करोड़ रुपए से अधिक है।
- भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की भूमिका संदिग्ध बताई गई।
- आरोपियों को समय पर चार्जशीट नहीं दाखिल करने से कानूनी राहत मिली।
- 14 आरोपी जमानत पर बाहर आ चुके हैं।
रांची, 31 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड में भाजपा के नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मंगलवार को राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से मुलाकात करते हुए राज्य में कथित 750 करोड़ रुपए के शराब घोटाले की सीबीआई से जांच कराने की मांग की। इस सिलसिले में उन्होंने राज्यपाल को एक ज्ञापन भी सौंपा।
ज्ञापन में बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि राज्य के उत्पाद विभाग से जुड़ा यह बहुचर्चित मामला भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की भूमिका पर प्रश्नचिह्न लगाता है। उन्होंने कहा कि इस एजेंसी ने निष्पक्ष जांच करने के बजाय आरोपियों को बचाने का प्रयास किया है।
उनका कहना है कि वर्ष 2022 में उत्पाद नीति में बदलाव के माध्यम से एक सिंडिकेट को फायदा पहुंचाया गया, जिससे राज्य के राजस्व को बड़ा नुकसान हुआ। प्रारंभ में घोटाले की राशि 38 करोड़ आंकी गई थी, जो अब बढ़कर 750 करोड़ से अधिक हो चुकी है।
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि एंटी करप्शन ब्यूरो ने कुछ गिरफ्तारियां की हैं, लेकिन समय पर चार्जशीट दाखिल नहीं कर पाने के कारण आरोपियों को कानूनी राहत मिली है।
राज्यपाल को दिए गए ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि मई 2025 में तत्कालीन उत्पाद सचिव आईएएस विनय कुमार चौबे और संयुक्त उत्पाद आयुक्त गजेंद्र सिंह समेत अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी हुई थी। इसके बावजूद चार्जशीट दाखिल नहीं होने के कारण अधिकांश आरोपियों को ‘डिफॉल्ट बेल’ मिल गई।
उन्होंने कहा कि अब तक 8 महीने से अधिक समय गुजर चुका है, फिर भी एसीबी एक भी चार्जशीट दाखिल नहीं कर सकी है, जिससे घोटाले में गिरफ्तार 17 में से 14 आरोपी जमानत पर बाहर आ चुके हैं।
मरांडी ने इसे जांच एजेंसी की लापरवाही या मिलीभगत करार दिया। ज्ञापन में उन्होंने छत्तीसगढ़ के एक शराब कारोबारी के मामले का भी जिक्र किया, जो गिरफ्तारी के बाद फरार हो गया है।
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्यपाल से निवेदन किया कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें और एसीबी को शीघ्र चार्जशीट दाखिल करने का निर्देश दें, साथ ही पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की सिफारिश करें, ताकि दोषियों को सजा मिल सके और जनता का विश्वास फिर से बहाल हो सके।