झारखंड शराब घोटाला: बाबूलाल मरांडी ने हाईकोर्ट में दायर की PIL, CBI जांच की माँग
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता बाबूलाल मरांडी ने झारखंड हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर कर चर्चित झारखंड शराब घोटाले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपने की माँग की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि मामला दर्ज होने के करीब 14 महीने बाद भी जांच अधूरी है और अदालत में अब तक आरोपपत्र (चार्जशीट) पेश नहीं किया गया है।
मुख्य घटनाक्रम
याचिका के अनुसार, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने वर्ष 2025 में इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी और कई आरोपियों को गिरफ्तार भी किया था। हालांकि, निर्धारित समय-सीमा के भीतर चार्जशीट दाखिल न होने के कारण सभी आरोपियों को डिफॉल्ट ज़मानत मिल गई। इनमें निलंबित आईएएस अधिकारी विनय चौबे सहित कई हाई-प्रोफाइल नाम शामिल हैं।
घोटाले की पृष्ठभूमि
वर्ष 2022 में छत्तीसगढ़ मॉडल के आधार पर झारखंड में नई शराब नीति लागू की गई थी। याचिका में आरोप है कि फर्जी बैंक गारंटी के आधार पर दो प्लेसमेंट एजेंसियों को काम दिया गया। इसके अलावा शराब कारोबार से जुड़ी कई निजी कंपनियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में बताई गई है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि होलोग्राम निर्माता कंपनी, मैनपावर आपूर्ति एजेंसी और थोक शराब ठेकेदार कंपनी की भूमिका की गहन जांच अभी बाकी है। आलोचकों का कहना है कि राज्य की एजेंसी द्वारा जांच में जानबूझकर ढिलाई बरती जा रही है।
याचिकाकर्ता की दलील
मरांडी ने अदालत में तर्क दिया है कि जांच में लगातार देरी और चार्जशीट न दाखिल होना, राज्य जांच एजेंसी की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उनका कहना है कि मामले की संवेदनशीलता और इसमें शामिल हाई-प्रोफाइल लोगों को देखते हुए CBI जांच ही एकमात्र विश्वसनीय विकल्प है।
क्या होगा आगे
झारखंड हाईकोर्ट में दायर इस PIL पर सुनवाई की तारीख अभी तय होनी है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब झारखंड में राजनीतिक तनाव पहले से ऊँचा है। गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब विपक्ष ने राज्य सरकार पर किसी बड़े घोटाले की जांच में देरी का आरोप लगाया हो। हाईकोर्ट के निर्देश पर यह तय होगा कि जांच का भविष्य क्या होगा।