13 जुलाई 2026
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झारखंड शराब घोटाला: बाबूलाल मरांडी ने हाईकोर्ट में दायर की PIL, CBI जांच की माँग

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झारखंड शराब घोटाला: बाबूलाल मरांडी ने हाईकोर्ट में दायर की PIL, CBI जांच की माँग

सारांश

झारखंड शराब घोटाले में 14 महीने बाद भी चार्जशीट नहीं, सभी आरोपियों को डिफॉल्ट ज़मानत मिली। अब BJP नेता बाबूलाल मरांडी ने हाईकोर्ट में PIL दायर कर CBI जांच की माँग की है — निलंबित IAS विनय चौबे सहित हाई-प्रोफाइल नाम निशाने पर।

मुख्य बातें

बाबूलाल मरांडी ने झारखंड हाईकोर्ट में PIL दायर कर शराब घोटाले की CBI जांच की माँग की।
मामला दर्ज होने के 14 महीने बाद भी जांच अधूरी, अदालत में चार्जशीट पेश नहीं।
चार्जशीट समय पर दाखिल न होने से सभी आरोपियों को डिफॉल्ट ज़मानत मिली।
निलंबित आईएएस विनय चौबे सहित कई हाई-प्रोफाइल नाम मामले में शामिल।
वर्ष 2022 में छत्तीसगढ़ मॉडल पर आधारित नई शराब नीति लागू होने के बाद घोटाले के आरोप सामने आए।
होलोग्राम कंपनी, मैनपावर एजेंसी और थोक शराब ठेकेदार की भूमिका की जांच अभी बाकी।

झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता बाबूलाल मरांडी ने झारखंड हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर कर चर्चित झारखंड शराब घोटाले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपने की माँग की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि मामला दर्ज होने के करीब 14 महीने बाद भी जांच अधूरी है और अदालत में अब तक आरोपपत्र (चार्जशीट) पेश नहीं किया गया है।

मुख्य घटनाक्रम

याचिका के अनुसार, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने वर्ष 2025 में इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी और कई आरोपियों को गिरफ्तार भी किया था। हालांकि, निर्धारित समय-सीमा के भीतर चार्जशीट दाखिल न होने के कारण सभी आरोपियों को डिफॉल्ट ज़मानत मिल गई। इनमें निलंबित आईएएस अधिकारी विनय चौबे सहित कई हाई-प्रोफाइल नाम शामिल हैं।

घोटाले की पृष्ठभूमि

वर्ष 2022 में छत्तीसगढ़ मॉडल के आधार पर झारखंड में नई शराब नीति लागू की गई थी। याचिका में आरोप है कि फर्जी बैंक गारंटी के आधार पर दो प्लेसमेंट एजेंसियों को काम दिया गया। इसके अलावा शराब कारोबार से जुड़ी कई निजी कंपनियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में बताई गई है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि होलोग्राम निर्माता कंपनी, मैनपावर आपूर्ति एजेंसी और थोक शराब ठेकेदार कंपनी की भूमिका की गहन जांच अभी बाकी है। आलोचकों का कहना है कि राज्य की एजेंसी द्वारा जांच में जानबूझकर ढिलाई बरती जा रही है।

याचिकाकर्ता की दलील

मरांडी ने अदालत में तर्क दिया है कि जांच में लगातार देरी और चार्जशीट न दाखिल होना, राज्य जांच एजेंसी की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उनका कहना है कि मामले की संवेदनशीलता और इसमें शामिल हाई-प्रोफाइल लोगों को देखते हुए CBI जांच ही एकमात्र विश्वसनीय विकल्प है।

क्या होगा आगे

झारखंड हाईकोर्ट में दायर इस PIL पर सुनवाई की तारीख अभी तय होनी है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब झारखंड में राजनीतिक तनाव पहले से ऊँचा है। गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब विपक्ष ने राज्य सरकार पर किसी बड़े घोटाले की जांच में देरी का आरोप लगाया हो। हाईकोर्ट के निर्देश पर यह तय होगा कि जांच का भविष्य क्या होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि जांच तंत्र की गंभीर विफलता का संकेत है। सवाल यह है कि ACB ने निर्धारित समय में चार्जशीट क्यों नहीं दाखिल की — यह जवाबदेही राज्य सरकार को देनी होगी। CBI जांच की माँग राजनीतिक रूप से सुविधाजनक हो सकती है, लेकिन जब राज्य एजेंसी की विश्वसनीयता पर ही सवाल उठ रहे हों, तो न्यायपालिका का हस्तक्षेप ज़रूरी हो जाता है। हाईकोर्ट का रुख यह तय करेगा कि झारखंड में शासन की जवाबदेही महज़ कागज़ पर रहती है या अमल में भी उतरती है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड शराब घोटाला क्या है?
झारखंड शराब घोटाला वर्ष 2022 में लागू नई शराब नीति से जुड़ा एक कथित भ्रष्टाचार मामला है, जिसमें फर्जी बैंक गारंटी के आधार पर एजेंसियों को ठेके देने और निजी कंपनियों की संदिग्ध भूमिका के आरोप हैं। ACB ने 2025 में FIR दर्ज कर कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
बाबूलाल मरांडी ने हाईकोर्ट में PIL क्यों दायर की?
मरांडी ने PIL इसलिए दायर की क्योंकि मामला दर्ज होने के 14 महीने बाद भी जांच अधूरी है और चार्जशीट दाखिल नहीं हुई। उनका तर्क है कि राज्य जांच एजेंसी की निष्पक्षता संदिग्ध है और CBI जांच ही विश्वसनीय विकल्प है।
आरोपियों को डिफॉल्ट ज़मानत कैसे मिली?
कानूनी प्रावधानों के तहत यदि निर्धारित समय-सीमा में चार्जशीट दाखिल नहीं होती, तो आरोपी डिफॉल्ट ज़मानत के हकदार हो जाते हैं। ACB द्वारा समय पर चार्जशीट न दाखिल करने के कारण इस मामले में सभी गिरफ्तार आरोपियों को ज़मानत मिल गई।
इस मामले में कौन-कौन से हाई-प्रोफाइल नाम शामिल हैं?
याचिका के अनुसार, निलंबित आईएएस अधिकारी विनय चौबे सहित कई हाई-प्रोफाइल लोगों के नाम इस मामले में सामने आए हैं। इसके अलावा होलोग्राम निर्माता कंपनी, मैनपावर एजेंसी और थोक शराब ठेकेदार की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
हाईकोर्ट में PIL दायर होने के बाद आगे क्या होगा?
झारखंड हाईकोर्ट PIL पर सुनवाई की तारीख तय करेगा और राज्य सरकार व जांच एजेंसी से जवाब माँग सकता है। अदालत यदि CBI जांच का निर्देश देती है, तो मामले की दिशा पूरी तरह बदल सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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