ललिता गौतम हत्याकांड: काशी टोल प्लाजा पर रोका गया कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल, इमरान मसूद बोले — 27 को दिल्ली में प्रदर्शन
सारांश
मुख्य बातें
मेरठ में ललिता गौतम हत्याकांड की पीड़िता के परिवार से मुलाकात करने जा रहे कांग्रेस के एक सात सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को 13 जुलाई को काशी टोल प्लाजा पर पुलिस ने रोक दिया। इस प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस सांसद इमरान मसूद, एक विधायक और चार अन्य पदाधिकारी शामिल थे। घटनाक्रम के बाद एसपी सिटी विनायक भोसले ने पत्रकारों के समक्ष पुलिस का पक्ष रखा।
पुलिस का पक्ष: क्यों रोका गया प्रतिनिधिमंडल
एसपी सिटी विनायक भोसले ने बताया कि जब कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल पहुँचा, तो अधिकारियों ने उनसे संवाद स्थापित किया और उनकी माँगें सुनीं। उन्होंने कहा कि इससे पहले हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान कई एंबुलेंस रास्ते में फँसी रहीं और दो दिनों तक आम लोगों की आवाजाही बाधित रही।
भोसले के अनुसार, एक राजपत्रित अधिकारी ने लगातार पाँच-छह घंटे तक प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की, लेकिन कुछ लोग सड़क पर लेट गए और हटने से इनकार कर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शन में शामिल कुछ व्यक्तियों का आपराधिक इतिहास था और आयोजकों ने पुलिस प्रशासन से पूर्व अनुमति नहीं ली थी।
पुलिस की चिंता: भीड़ और विदेशी तत्वों का हवाला
एसपी सिटी ने कहा कि 'भीड़ का कोई चेहरा नहीं होता' और ऐसी स्थितियों में अराजक तत्व घुसपैठ कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कथित तौर पर कुछ 'विदेशी तंत्र' इस तरह की भीड़ का हिस्सा बनकर भ्रामक जानकारी फैलाने का काम करते हैं। पुलिस का कहना है कि कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को इन सभी तथ्यों से अवगत कराने के बाद वे अपने-अपने स्थानों के लिए रवाना हो गए।
कांग्रेस का पक्ष: इमरान मसूद ने जताई आपत्ति
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने पुलिस के इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि प्रशासन ने उन्हें पीड़ित परिवार से मिलने की अनुमति नहीं दी। उन्होंने कहा, 'हमारे प्रतिनिधिमंडल में सात लोग थे — चार सदस्य और एक विधायक — फिर भी हमें रोका गया।' मसूद ने घोषणा की कि अब कांग्रेस 27 तारीख को दिल्ली में प्रदर्शन करेगी।
ललिता गौतम हत्याकांड: पृष्ठभूमि
यह मामला मेरठ में हुई ललिता गौतम की हत्या से जुड़ा है, जिसने राज्य में राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है। विपक्षी दलों ने पीड़ित परिवार से मिलने और न्याय की माँग उठाने की कोशिश की है, जबकि पुलिस प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है। गौरतलब है कि इस तरह के हत्याकांडों में विपक्षी प्रतिनिधिमंडलों को रोकने की घटनाएँ उत्तर प्रदेश में पहले भी सामने आती रही हैं।
आगे क्या होगा
कांग्रेस के 27 तारीख के दिल्ली प्रदर्शन से यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर उठने की संभावना है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कानून-व्यवस्था की दृष्टि से जो भी कदम उठाए गए, वे उचित थे। पीड़ित परिवार को न्याय मिलने और मामले की जाँच की दिशा पर सभी की नज़रें टिकी हैं।