11 जुलाई 2026
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मेरठ में ललिता गौतम के परिजनों से मिले अखिलेश यादव, बोले — कमज़ोर धाराएँ लगाकर न्याय से हो रहा खिलवाड़

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मेरठ में ललिता गौतम के परिजनों से मिले अखिलेश यादव, बोले — कमज़ोर धाराएँ लगाकर न्याय से हो रहा खिलवाड़

सारांश

अखिलेश यादव मेरठ पहुँचे और दलित छात्रा ललिता गौतम के परिजनों से मिले। उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपियों पर कमज़ोर धाराएँ और आंदोलनकारियों पर गंभीर धाराएँ — यह दोहरा रवैया न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। 'पीडीए अब सहेगा नहीं' — यादव का सीधा संदेश BJP सरकार को।

मुख्य बातें

अखिलेश यादव ने 11 जुलाई 2026 को मेरठ में दलित छात्रा ललिता गौतम के परिजनों से मुलाकात कर न्याय का भरोसा दिया।
आरोप: नामज़द आरोपियों पर कमज़ोर धाराओं में मुकदमा, जबकि आंदोलनकारियों पर गंभीर धाराएँ लगाई गईं।
यादव ने उत्तर प्रदेश पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के वायरल वीडियो का हवाला देते हुए पुलिस की छवि पर चिंता जताई।
सपा अध्यक्ष ने BJP सरकार से पीड़ित परिवार की सभी माँगें तत्काल पूरी करने की माँग की।
' पीडीए अब सहेगा नहीं, कहेगा ' — यादव ने दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्ग को एकजुट रहने का आह्वान किया।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शनिवार, 11 जुलाई 2026 को मेरठ पहुँचकर दलित छात्रा ललिता गौतम के परिजनों से मुलाकात की और न्याय की लड़ाई में पूरी तरह साथ खड़े रहने का भरोसा दिया। उन्होंने माँग की कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पीड़ित परिवार की सभी माँगें तत्काल पूरी करे और मृतक छात्रा को न्याय दिलाए।

आरोप: कमज़ोर धाराएँ और दोहरा रवैया

अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि ललिता गौतम के साथ कथित अत्याचार और हत्या के मामले में नामज़द आरोपियों पर कमज़ोर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है, जबकि आंदोलन करने वालों पर गंभीर धाराएँ लगाई गई हैं। उन्होंने इसे 'नाइंसाफ़ी की पराकाष्ठा' बताते हुए कहा कि इस दोहरे रवैये से न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल

सपा अध्यक्ष ने उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली को भी कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि जिस पुलिस से न्याय की उम्मीद रखी जाती है, उसके वरिष्ठ अधिकारियों का व्यवहार आम जनता का भरोसा तोड़ने वाला है। यादव ने दावा किया कि एक पुलिस अधिकारी के व्यवहार का वीडियो देश-विदेश में वायरल होने से उत्तर प्रदेश पुलिस की छवि को नुकसान पहुँचा है और इससे कर्तव्यनिष्ठ एवं संवेदनशील पुलिसकर्मी भी असहज महसूस कर रहे होंगे।

महिला सुरक्षा पर चिंता

अखिलेश यादव ने कहा कि प्रदेश में महिलाओं के प्रति सरकार का रवैया चिंताजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोग ही शोकाकुल परिवारों के प्रति संवेदनशील नहीं हैं, तब पुलिस से न्याय की अपेक्षा करना और कठिन हो जाता है। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में दलित महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज़ हो रही है।

पीडीए का संदेश और राजनीतिक चेतावनी

यादव ने पीड़ित परिवार के साथ एकजुटता दिखाते हुए कहा, 'पीडीए अब सहेगा नहीं, कहेगा।' उन्होंने BJP सरकार पर निशाना साधते हुए जोड़ा कि जनता अब भाषण नहीं, बल्कि न्याय और जवाबदेही चाहती है। व्यंग्यात्मक अंदाज़ में उन्होंने कहा, 'जब वो खुद ही बेलगाम है, जिसके हाथ में लगाम है, तो फिर उनका क्या, जो उनके दरबार में दरबान हैं।' आने वाले दिनों में सपा इस मुद्दे को और तेज़ी से उठाने का संकेत दे रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

सुनियोजित राजनीतिक संदेश है — 'पीडीए' के बैनर तले दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्ग को BJP के खिलाफ एकजुट करने की कोशिश। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में दलित उत्पीड़न के मामलों में FIR की धाराओं को लेकर यह पहली बार विवाद नहीं उठा — आलोचक लंबे समय से कहते आए हैं कि कमज़ोर धाराएँ आरोपियों को ज़मानत दिलाने का रास्ता खोलती हैं। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूक जाती है वह यह है कि विपक्ष की माँगों के साथ-साथ न्यायिक निगरानी और स्वतंत्र जाँच की माँग क्यों नहीं उठाई जा रही — जो इस मामले में असली जवाबदेही तय कर सकती है।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ललिता गौतम कौन हैं और मेरठ मामला क्या है?
ललिता गौतम एक दलित छात्रा हैं जिनकी कथित अत्याचार और हत्या का मामला मेरठ में सामने आया है। इस मामले में नामज़द आरोपियों पर दर्ज FIR की धाराओं को लेकर विवाद है, जिसे विपक्ष कमज़ोर बता रहा है।
अखिलेश यादव ने मेरठ में क्या माँगें रखीं?
अखिलेश यादव ने BJP सरकार से पीड़ित परिवार की सभी माँगें तत्काल पूरी करने और मृतक छात्रा को न्याय दिलाने की माँग की। उन्होंने आरोपियों पर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करने और पुलिस की कार्यप्रणाली की जाँच की भी माँग की।
कमज़ोर धाराओं में FIR का क्या मतलब है और यह क्यों विवादास्पद है?
कमज़ोर धाराओं में FIR का अर्थ है कि आरोपियों पर हल्के आपराधिक प्रावधान लगाए गए हैं, जिससे उन्हें ज़मानत मिलना आसान हो जाता है। आलोचकों का कहना है कि गंभीर अपराधों में ऐसा करना पीड़ित पक्ष के लिए न्याय पाने की राह कठिन बनाता है।
अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश पुलिस पर क्या आरोप लगाए?
यादव ने दावा किया कि एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के व्यवहार का वीडियो देश-विदेश में वायरल हुआ, जिससे उत्तर प्रदेश पुलिस की छवि प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि ऐसे व्यवहार से आम जनता का पुलिस पर भरोसा टूटता है।
'पीडीए अब सहेगा नहीं' से अखिलेश यादव का क्या आशय है?
पीडीए यानी पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक — अखिलेश यादव की राजनीतिक रणनीति का केंद्र। इस नारे के ज़रिए उन्होंने संकेत दिया कि ये वर्ग अब अन्याय को चुपचाप नहीं सहेंगे और आगामी राजनीतिक लड़ाई में एकजुट होकर आवाज़ उठाएँगे।
राष्ट्र प्रेस
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