अखिलेश की बेटी पर अभद्र पोस्ट: UP पुलिस ने FIR दर्ज की, दिनेश शर्मा बोले — बहू-बेटियों का सम्मान राजनीति से ऊपर
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव की बेटी के विरुद्ध सोशल मीडिया पर प्रसारित अभद्र और भ्रामक सामग्री के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सीधे निर्देश पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। यह मामला महिलाओं की डिजिटल गरिमा और राजनीतिक विमर्श की सीमाओं को लेकर एक बड़ी बहस का केंद्र बन गया है।
दिनेश शर्मा की कड़ी निंदा
भाजपा सांसद और पूर्व उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने इस कृत्य की तीखी भर्त्सना की। उन्होंने कहा, 'जिसने भी ऐसी हरकत की है, उसने शालीनता और मर्यादा की सभी सीमाएं लांघ दी हैं। परिवार की बहुओं और बेटियों का सम्मान हर परिस्थिति में होना चाहिए और उनके नाम का दुरुपयोग कर गलत जानकारी फैलाना किसी भी तरह से राजनीति का विषय नहीं, बल्कि महिलाओं की गरिमा से जुड़ा मामला है।' शर्मा ने मुख्यमंत्री के निर्देशों का समर्थन करते हुए स्पष्ट कहा कि दोषियों को किसी प्रकार की रियायत नहीं मिलनी चाहिए।
रामपुर से भी उठी निंदा की आवाज़
रामपुर में कारी मौलाना जमील हयात ने भी इस मामले को 'बेहद निंदनीय' करार दिया। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री रहे हैं और किसी की बेटी के बारे में इस तरह की भ्रामक और अपमानजनक पोस्ट करना अत्यंत घिनौनी हरकत है। उनके अनुसार, ऐसे कृत्य करने वाले लोग इंसानियत की सीमाओं से बाहर हैं और समाज में नफरत फैलाने का काम कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री योगी का पहले का बयान
कुछ दिन पूर्व आज़मगढ़ में एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस विषय पर अपना रुख स्पष्ट किया था। उन्होंने बताया था कि जैसे ही उन्हें सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही इस भ्रामक सामग्री की जानकारी मिली, उन्होंने तत्काल पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। सीएम ने यह भी कहा था कि किसी भी बेटी के सम्मान के विरुद्ध की गई टिप्पणी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सार्वजनिक संवाद में संयम की अपील
मुख्यमंत्री ने सभी राजनीतिक दलों और उनके समर्थकों से सार्वजनिक संवाद में संयमित भाषा अपनाने की अपील की थी। गौरतलब है कि यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर राजनेताओं के परिजनों को निशाना बनाने की घटनाएँ बढ़ती जा रही हैं। सत्तारूढ़ और विपक्षी दोनों पक्षों से इस मुद्दे पर एकमत निंदा, इसे महज राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक सरोकार का विषय बनाती है।