भाजपा अपने ही समर्थकों के दिल-दिमाग से उतर रही है: अखिलेश यादव का तीखा हमला
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 24 जुलाई को जारी एक बयान में भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा प्रहार करते हुए दावा किया कि भाजपा के अपने समर्थक भी अब पार्टी की कार्यशैली से निराश और शर्मिंदा हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने अपने घरों, दुकानों और वाहनों से भाजपा के झंडे उतार दिए हैं, एक दिन यही पार्टी उनके दिल-दिमाग से भी उतर जाएगी।
मुख्य आरोप और दावे
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा और उसके सहयोगी कथित तौर पर अपने लोगों को प्रदर्शनकारियों के बीच भेजकर युवाओं को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब इन लोगों को 'भाजपाई' कहा जाता है तो वे खुद ही चिढ़ जाते हैं — जो पार्टी की घटती साख का प्रमाण है।
सपा प्रमुख ने कई घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि भाजपा समर्थक इनसे शर्मिंदा हैं — अयोध्या में कथित 'चढ़ावा-चंदा-दान चोरी', दिल्ली में बच्चियों पर कथित अत्याचार, युवाओं के खिलाफ हिंसा, मुंबई में आंदोलनकारियों को कथित रूप से ड्रग्स के झूठे मामलों में फंसाने की धमकी और लखनऊ अग्निकांड में मृतक बच्चे की माँ के साथ मुख्यमंत्री के कथित दुर्व्यवहार।
समर्थकों में बढ़ती चुप्पी
अखिलेश यादव के अनुसार, भाजपा के 'पेड और अनपेड' समर्थक अब जनाक्रोश को देखते हुए खुलकर सामने आने से बच रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि भाजपा समर्थकों के व्हाट्सएप समूह पहले की तरह सक्रिय नहीं हैं और वे सार्वजनिक स्थानों पर जाने से भी परहेज करने लगे हैं।
उन्होंने कहा कि पिछले 10-12 वर्षों में भाजपा के कट्टर समर्थकों ने हर मुद्दे पर पार्टी का बचाव किया और इसके लिए अपने मित्रों तथा परिचितों से भी विवाद मोल लिया। लेकिन अब पार्टी की कार्यशैली देखकर उन्हें अपनी गलती का एहसास हो रहा है।
लोकतांत्रिक संस्थाओं पर आरोप
सपा प्रमुख ने भाजपा पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने, सरकारी एजेंसियों के दुरुपयोग, महंगाई बढ़ाने, शिक्षा और भर्ती प्रक्रियाओं में धांधली, आरक्षण के खिलाफ कथित साजिश, विपक्ष पर झूठे मुकदमे दर्ज कराने तथा बुलडोजर और एनकाउंटर की कार्रवाई के दुरुपयोग जैसे कई गंभीर आरोप लगाए।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, विपक्षी दलों द्वारा सत्तारूढ़ पार्टी के आधार-मतदाताओं में दरार की बात उठाना चुनावी रणनीति का हिस्सा होता है। हालांकि, अखिलेश यादव के ये आरोप ऐसे समय में आए हैं जब उत्तर प्रदेश में युवा आंदोलनों और कई विवादास्पद घटनाओं को लेकर जनता में असंतोष की खबरें सामने आ रही हैं।
आगे क्या
अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा का 'असल चेहरा' अब उसके समर्थकों के सामने भी आ चुका है और इसी कारण पार्टी समर्थकों के लिए तथाकथित 'अमृतकाल' अब 'विषकाल' में बदल गया है। आने वाले समय में सपा इन मुद्दों को जनता के बीच और अधिक मुखरता से उठाने की रणनीति पर काम कर सकती है।