11 जुलाई 2026
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राम मंदिर चंदा चोरी: सुप्रीम कोर्ट जज की निगरानी में जांच हो — कांग्रेस सांसद उज्ज्वल रमण सिंह

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राम मंदिर चंदा चोरी: सुप्रीम कोर्ट जज की निगरानी में जांच हो — कांग्रेस सांसद उज्ज्वल रमण सिंह

सारांश

राम मंदिर चंदा चोरी मामले में कांग्रेस सांसद उज्ज्वल रमण सिंह ने सीबीआई और एसआईटी जांच को 'लीपापोती' करार दिया और सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में निष्पक्ष जांच की मांग की। चंपत राय बंसल, अनिल मिश्रा और गोविंद देव गिरी के खिलाफ तत्काल एफआईआर की अपील की गई।

मुख्य बातें

कांग्रेस सांसद उज्ज्वल रमण सिंह ने 11 जुलाई 2026 को राम मंदिर चंदा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में जांच की मांग की।
उन्होंने सीबीआई और एसआईटी जांच को 'लीपापोती' बताते हुए इन एजेंसियों पर जनता के भरोसे को कमज़ोर बताया।
चंपत राय बंसल , अनिल मिश्रा और गोविंद देव गिरी सहित संबंधित ट्रस्टियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई।
सांसद ने आशंका जताई कि जांच के दौरान साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ हो सकती है और सबूत सुरक्षित रखने की अपील की।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार मामले को दबाने का प्रयास कर रही है।

कांग्रेस सांसद उज्ज्वल रमण सिंह ने 11 जुलाई 2026 को राम मंदिर चंदा चोरी मामले की जांच को लेकर केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सीबीआई जांच या एसआईटी गठन से सच्चाई सामने नहीं आएगी और निष्पक्ष जांच केवल सर्वोच्च न्यायालय के किसी वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में ही संभव है।

मुख्य आरोप और मांग

उज्ज्वल रमण सिंह ने कहा कि सीबीआई और एसआईटी जैसी एजेंसियों पर जनता का भरोसा कमज़ोर हो चुका है। उनके शब्दों में, 'सीबीआई ने जितनी जांचें की हैं, उनमें आज तक क्या निकला? अगर किसी को बचाना है तो मामला इन संस्थाओं को दे दीजिए, ये बचाकर आपको दे देंगी।' उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार मामले को दबाने और लीपापोती करने का प्रयास कर रही है।

किन लोगों पर एफआईआर की मांग

सांसद ने मांग की कि चंपत राय बंसल, अनिल मिश्रा, गोविंद देव गिरी सहित अन्य संबंधित ट्रस्टियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए। उन्होंने कहा कि इन लोगों की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं, फिर भी अब तक कोई ठोस कानूनी कार्रवाई नहीं हुई, जिससे जांच प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग रहा है।

साक्ष्य से छेड़छाड़ की आशंका

उज्ज्वल रमण सिंह ने उत्तर प्रदेश सरकार से यह भी मांग की कि उपलब्ध साक्ष्यों को तत्काल सुरक्षित किया जाए। उन्होंने आशंका जताई कि जनता के बीच यह संशय गहरा रहा है कि एसआईटी सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब मामले की जांच की दिशा को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट निगरानी क्यों जरूरी

सांसद ने तर्क दिया कि यदि सर्वोच्च न्यायालय के किसी सिटिंग न्यायाधीश की निगरानी में जांच नहीं कराई गई, तो इस मामले से जुड़े तथ्यों का सामने आना मुश्किल होगा। उनका कहना है कि ऐसी निगरानी ही जनता के मन में उम्मीद की किरण जगा सकती है और जांच प्रक्रिया को वास्तविक विश्वसनीयता दे सकती है।

आगे क्या

गौरतलब है कि राम मंदिर चंदा चोरी मामला राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील है और विपक्ष इसे लगातार केंद्र व राज्य सरकार के खिलाफ मुद्दा बना रहा है। अब देखना यह होगा कि सरकार विपक्ष की इस मांग पर कोई प्रतिक्रिया देती है या नहीं, और सर्वोच्च न्यायालय स्वयं इस मामले में कोई संज्ञान लेता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन संस्थागत सवाल वास्तविक हैं — सीबीआई की विश्वसनीयता पर पहले भी अदालतें और विपक्ष सवाल उठाते रहे हैं। असली परीक्षा यह है कि क्या विपक्ष केवल बयानबाज़ी तक सीमित रहेगा या सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर कर मांग को कानूनी ज़मीन देगा। राम मंदिर जैसे धार्मिक-राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामले में किसी भी जांच की प्रामाणिकता तभी स्थापित होगी जब प्रक्रिया पारदर्शी और स्वतंत्र हो — यह बात सरकार और विपक्ष दोनों पर समान रूप से लागू होती है।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर चंदा चोरी मामला क्या है?
राम मंदिर चंदा चोरी मामला अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए एकत्र किए गए दान में कथित अनियमितताओं से जुड़ा विवाद है। इस मामले में ट्रस्ट के कई पदाधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
उज्ज्वल रमण सिंह ने सुप्रीम कोर्ट निगरानी की मांग क्यों की?
कांग्रेस सांसद उज्ज्वल रमण सिंह का कहना है कि सीबीआई और एसआईटी जैसी जांच एजेंसियों पर जनता का भरोसा कमज़ोर हो चुका है। उनके अनुसार, केवल सर्वोच्च न्यायालय के किसी वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में जांच से ही निष्पक्षता सुनिश्चित हो सकती है।
किन ट्रस्टियों के खिलाफ एफआईआर की मांग की गई है?
उज्ज्वल रमण सिंह ने चंपत राय बंसल, अनिल मिश्रा और गोविंद देव गिरी सहित अन्य संबंधित ट्रस्टियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने की मांग उत्तर प्रदेश सरकार से की है।
क्या साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की आशंका है?
कांग्रेस सांसद ने आशंका जताई है कि एसआईटी जांच के दौरान सबूतों के साथ छेड़छाड़ हो सकती है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की है कि उपलब्ध साक्ष्यों को तत्काल सुरक्षित किया जाए।
इस मामले में सरकार की क्या भूमिका बताई जा रही है?
उज्ज्वल रमण सिंह ने आरोप लगाया है कि सरकार मामले की निष्पक्ष जांच कराने के बजाय उसे दबाने का प्रयास कर रही है। हालांकि, सरकार की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी तक सामने नहीं आई है।
राष्ट्र प्रेस
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