राम मंदिर चंदा चोरी: सुप्रीम कोर्ट जज की निगरानी में जांच हो — कांग्रेस सांसद उज्ज्वल रमण सिंह
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद उज्ज्वल रमण सिंह ने 11 जुलाई 2026 को राम मंदिर चंदा चोरी मामले की जांच को लेकर केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सीबीआई जांच या एसआईटी गठन से सच्चाई सामने नहीं आएगी और निष्पक्ष जांच केवल सर्वोच्च न्यायालय के किसी वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में ही संभव है।
मुख्य आरोप और मांग
उज्ज्वल रमण सिंह ने कहा कि सीबीआई और एसआईटी जैसी एजेंसियों पर जनता का भरोसा कमज़ोर हो चुका है। उनके शब्दों में, 'सीबीआई ने जितनी जांचें की हैं, उनमें आज तक क्या निकला? अगर किसी को बचाना है तो मामला इन संस्थाओं को दे दीजिए, ये बचाकर आपको दे देंगी।' उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार मामले को दबाने और लीपापोती करने का प्रयास कर रही है।
किन लोगों पर एफआईआर की मांग
सांसद ने मांग की कि चंपत राय बंसल, अनिल मिश्रा, गोविंद देव गिरी सहित अन्य संबंधित ट्रस्टियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए। उन्होंने कहा कि इन लोगों की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं, फिर भी अब तक कोई ठोस कानूनी कार्रवाई नहीं हुई, जिससे जांच प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग रहा है।
साक्ष्य से छेड़छाड़ की आशंका
उज्ज्वल रमण सिंह ने उत्तर प्रदेश सरकार से यह भी मांग की कि उपलब्ध साक्ष्यों को तत्काल सुरक्षित किया जाए। उन्होंने आशंका जताई कि जनता के बीच यह संशय गहरा रहा है कि एसआईटी सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब मामले की जांच की दिशा को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट निगरानी क्यों जरूरी
सांसद ने तर्क दिया कि यदि सर्वोच्च न्यायालय के किसी सिटिंग न्यायाधीश की निगरानी में जांच नहीं कराई गई, तो इस मामले से जुड़े तथ्यों का सामने आना मुश्किल होगा। उनका कहना है कि ऐसी निगरानी ही जनता के मन में उम्मीद की किरण जगा सकती है और जांच प्रक्रिया को वास्तविक विश्वसनीयता दे सकती है।
आगे क्या
गौरतलब है कि राम मंदिर चंदा चोरी मामला राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील है और विपक्ष इसे लगातार केंद्र व राज्य सरकार के खिलाफ मुद्दा बना रहा है। अब देखना यह होगा कि सरकार विपक्ष की इस मांग पर कोई प्रतिक्रिया देती है या नहीं, और सर्वोच्च न्यायालय स्वयं इस मामले में कोई संज्ञान लेता है।