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राम मंदिर दान विवाद: सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच और FIR की मांग, अधिवक्ता अनूप अवस्थी ने CJI को लिखा पत्र

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राम मंदिर दान विवाद: सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच और FIR की मांग, अधिवक्ता अनूप अवस्थी ने CJI को लिखा पत्र

सारांश

सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अनूप अवस्थी ने CJI को पत्र लिखकर राम मंदिर दान दुरुपयोग मामले में FIR और शीर्ष अदालत की निगरानी में जांच की माँग की है। उनका कहना है कि UP की एसआईटी अपर्याप्त है और लाखों श्रद्धालुओं की आस्था दाँव पर है।

मुख्य बातें

सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अनूप अवस्थी ने 15 जून 2026 को मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर राम मंदिर दान दुरुपयोग मामले में स्वत: संज्ञान लेने की माँग की।
माँग है कि पहले एफआईआर दर्ज हो, फिर सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में स्वतंत्र जांच हो।
उत्तर प्रदेश सरकार की एसआईटी को अवस्थी ने अपर्याप्त बताया; संवैधानिक अदालत की देखरेख को अनिवार्य बताया।
अवस्थी के अनुसार, मंदिर प्रशासन से जुड़े कुछ लोगों की संपत्ति में संदिग्ध वृद्धि हुई है — ये आरोप अभी सत्यापित नहीं हैं।
यह मामला लाखों श्रद्धालुओं की आस्था और दान की पारदर्शिता से सीधे जुड़ा है।

सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अनूप अवस्थी ने 15 जून 2026 को भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दान और चढ़ावे के कथित दुरुपयोग मामले में स्वत: संज्ञान लेने की मांग की है। अवस्थी ने माँग की है कि पहले एफआईआर दर्ज की जाए और फिर सर्वोच्च न्यायालय की देखरेख में एक स्वतंत्र जांच कराई जाए।

मुख्य घटनाक्रम

अवस्थी ने अपने पत्र में कहा है कि राम मंदिर की दान निधि में कथित अनियमितताओं, दुरुपयोग या चोरी की हालिया खबरों ने भारत और विदेशों में लाखों श्रद्धालुओं के बीच गहरी चिंता उत्पन्न की है। उन्होंने यह भी कहा कि लोगों का विश्वास बनाए रखने के लिए अदालत की निगरानी में जांच अनिवार्य है।

एसआईटी पर्याप्त नहीं: अवस्थी

उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। हालाँकि, अवस्थी का कहना है कि एसआईटी का गठन अपने आप में अपर्याप्त है। उनके अनुसार, जब तक किसी संवैधानिक न्यायालय की देखरेख में जांच नहीं होती, तब तक श्रद्धालुओं के एक बड़े वर्ग को इसकी निष्पक्षता पर संदेह बना रह सकता है।

अधिवक्ता की दलीलें

अवस्थी ने कहा कि पहले भी मंदिर को दान मिलता था, लेकिन कभी इस पर सवाल नहीं उठे। उन्होंने कहा, 'पूजा शुरू हो जाने के बाद जिस तरह से प्रश्न उठ रहे हैं, उससे कहा जा सकता है कि इसमें कुछ लोग शामिल हो सकते हैं।' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मंदिर प्रशासन से जुड़े कई लोगों के बड़े मकान बन गए हैं और 'जो व्यवस्था चल रही है, उसमें कोई न कोई बड़े स्तर पर दोषी है।' यह ध्यान देने योग्य है कि ये अवस्थी के व्यक्तिगत आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

आम श्रद्धालुओं पर असर

यह मामला लाखों श्रद्धालुओं की आस्था से सीधे जुड़ा है, जिन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए स्वेच्छा से दान दिया था। अवस्थी ने स्पष्ट किया कि उनकी माँग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई यह न समझे कि किसी को बचाने की कोशिश हो रही है।

आगे क्या होगा

अब यह देखना होगा कि सर्वोच्च न्यायालय इस पत्र याचिका पर स्वत: संज्ञान लेता है या नहीं। इस बीच, उत्तर प्रदेश एसआईटी की जांच जारी है। यह मामला धार्मिक संस्थाओं में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही के व्यापक सवाल भी उठाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि राज्य सरकार और मंदिर ट्रस्ट के बीच राजनीतिक निकटता किसी से छिपी नहीं है। सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी की माँग इसीलिए तार्किक है — लेकिन शीर्ष अदालत ने अतीत में धार्मिक संस्थाओं के आंतरिक प्रशासन में हस्तक्षेप को लेकर सावधानी बरती है। असली सवाल यह है कि क्या इस मामले में पारदर्शिता की जीत होती है, या यह विवाद भी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में दब जाता है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर दान दुरुपयोग मामला क्या है?
अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दान और चढ़ावे की राशि के कथित दुरुपयोग या अनियमितता की खबरें सामने आई हैं, जिससे भारत और विदेशों में श्रद्धालुओं के बीच चिंता फैली है। उत्तर प्रदेश सरकार ने एसआईटी गठित की है, लेकिन इसकी निष्पक्षता पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
अनूप अवस्थी ने CJI को पत्र क्यों लिखा?
सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अनूप अवस्थी का मानना है कि राज्य सरकार की एसआईटी इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए अपर्याप्त है। उन्होंने मुख्य न्यायाधीश से माँग की है कि सर्वोच्च न्यायालय स्वत: संज्ञान ले, एफआईआर दर्ज हो और अदालत की निगरानी में स्वतंत्र जांच हो।
उत्तर प्रदेश की एसआईटी को अपर्याप्त क्यों बताया जा रहा है?
अवस्थी के अनुसार, एसआईटी राज्य सरकार के अधीन है और जब तक किसी संवैधानिक न्यायालय की देखरेख में जांच नहीं होती, श्रद्धालुओं के एक बड़े वर्ग को इसकी निष्पक्षता पर संदेह बना रह सकता है।
क्या सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अभी कोई कार्रवाई की है?
अभी तक सर्वोच्च न्यायालय ने इस पत्र याचिका पर कोई औपचारिक संज्ञान नहीं लिया है। मामला अभी पत्र-याचिका के स्तर पर है और अदालत की प्रतिक्रिया का इंतजार है।
इस मामले से आम श्रद्धालुओं पर क्या असर पड़ेगा?
लाखों श्रद्धालुओं ने राम मंदिर निर्माण के लिए स्वेच्छा से दान दिया था। यदि दान राशि के दुरुपयोग की पुष्टि होती है, तो यह उनकी आस्था और भविष्य में धार्मिक संस्थाओं में दान की प्रवृत्ति दोनों को प्रभावित कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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