राम मंदिर ट्रस्ट के चंदे पर सीबीआई जांच और सीएजी ऑडिट की मांग, इलाहाबाद हाई कोर्ट में पीआईएल दाखिल
सारांश
मुख्य बातें
इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में 13 जून 2026 को एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका (पीआईएल) दाखिल की गई है, जिसमें अयोध्या स्थित राम मंदिर ट्रस्ट में कथित वित्तीय अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच और व्यापक ऑडिट की माँग की गई है। अधिवक्ता मोहित अशोक द्वारा दायर इस याचिका में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से गहन जांच और भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) से ट्रस्ट के वित्तीय लेन-देन का विस्तृत ऑडिट कराने की अपील की गई है।
याचिका में क्या हैं मुख्य माँगें
अधिवक्ता मोहित अशोक ने बताया कि पीआईएल में दो प्रमुख माँगें की गई हैं। पहली माँग यह है कि सीबीआई जैसी किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी से पूरे मामले की प्रारंभिक एवं गहन जांच कराई जाए। यदि जांच में किसी व्यक्ति या संस्था की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है, तो उसके विरुद्ध विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
दूसरी माँग यह है कि सीएजी द्वारा राम मंदिर ट्रस्ट के चंदे और समस्त वित्तीय लेन-देन का विस्तृत ऑडिट कराया जाए। याचिकाकर्ता का कहना है कि मंदिर निर्माण प्रारंभ होने से अब तक प्राप्त दान राशि और उसके व्यय का पूरा लेखा-जोखा सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
चंदे के दुरुपयोग के कथित आरोप
अधिवक्ता मोहित अशोक ने कहा कि मीडिया रिपोर्टों और विभिन्न सूत्रों से ऐसी जानकारियाँ सामने आई हैं, जिनमें कुछ व्यक्तियों पर चंदे की राशि के दुरुपयोग और उससे निजी संपत्ति अर्जित करने के आरोप कथित तौर पर लगाए गए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, कुछ ऐसे नाम भी सामने आए हैं जिन्होंने कथित तौर पर बड़े भूखंड और अन्य संपत्तियाँ खरीदी हैं। हालाँकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी नहीं हुई है।
करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा मामला
याचिकाकर्ता ने इस पूरे प्रकरण को करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास से जोड़ा है। उनका तर्क है कि लाखों भक्त अपनी मेहनत की कमाई का एक हिस्सा मंदिर निर्माण और धार्मिक कार्यों के लिए दान करते हैं, इसलिए उन्हें यह जानने का अधिकार है कि उनके योगदान का उपयोग किस प्रकार किया गया।
गौरतलब है कि राम मंदिर ट्रस्ट ने देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं से बड़ी मात्रा में दान राशि एकत्र की है। ऐसे में पारदर्शिता की माँग को लेकर यह पहली बड़ी कानूनी पहल मानी जा रही है।
पारदर्शिता से विश्वास होगा मजबूत
अधिवक्ता मोहित अशोक का कहना है कि यदि जांच और ऑडिट के ज़रिये सभी तथ्य सार्वजनिक हो जाते हैं, तो इससे लोगों का विश्वास और मज़बूत होगा तथा भविष्य में किसी भी प्रकार की अनियमितताओं पर अंकुश लगाने में सहायता मिलेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि याचिका का उद्देश्य संस्था को कमज़ोर करना नहीं, बल्कि पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ अब इस याचिका पर सुनवाई की तारीख तय करेगी, जिस पर सबकी निगाहें टिकी हैं।