3 जुलाई 2026
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राम मंदिर चंदे में अनियमितता: दिग्विजय सिंह 5-6 जुलाई को अयोध्या कोर्ट जाएंगे, ₹1.11 लाख की रसीद दिखाई

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राम मंदिर चंदे में अनियमितता: दिग्विजय सिंह 5-6 जुलाई को अयोध्या कोर्ट जाएंगे, ₹1.11 लाख की रसीद दिखाई

सारांश

दिग्विजय सिंह ने भोपाल में ₹1.11 लाख की रसीद दिखाते हुए ऐलान किया कि वह 5-6 जुलाई को अयोध्या कोर्ट में राम मंदिर चंदे की कथित वित्तीय अनियमितताओं पर याचिका दाखिल करेंगे। उनका कहना है — श्रद्धालुओं को हिसाब जानने का हक है।

मुख्य बातें

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने 3 जुलाई 2026 को अयोध्या जिला न्यायालय में याचिका दाखिल करने की घोषणा की।
उन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए स्वयं ₹1.11 लाख दान दिए थे और रसीद व चेक की प्रति अपने पास सुरक्षित बताई।
5 या 6 जुलाई को वरिष्ठ अधिवक्ता से परामर्श के बाद अयोध्या जाकर मामला दायर किया जाएगा।
अदालत में अनियमितता साबित होने पर वह ₹1.11 लाख वापस माँगकर किसी मान्यता प्राप्त धार्मिक संस्था या शंकराचार्य ट्रस्ट को दान करेंगे।
RSS, VHP और राम मंदिर ट्रस्ट की वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल उठाए; धर्म-विरोधी आरोपों को नकारा।
घर के बाहर 'चंदा चोरों का प्रवेश वर्जित' पट्टिका लगाने की भी घोषणा।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने 3 जुलाई 2026 को घोषणा की कि वह राम मंदिर निर्माण के लिए संग्रहीत चंदे में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर अयोध्या जिला न्यायालय, उत्तर प्रदेश में याचिका दायर करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि करोड़ों श्रद्धालुओं को यह जानने का अधिकार है कि उनके द्वारा दिया गया दान किस मद में और कैसे खर्च हुआ।

कहाँ और कैसे हुई घोषणा

यह ऐलान भोपाल के माता मंदिर के समीप मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस द्वारा आयोजित 'सद्बुद्धि यज्ञ' और सामूहिक उपवास कार्यक्रम के दौरान किया गया। यह कार्यक्रम राम मंदिर चंदे में कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के विरोध में आयोजित था। इस मौके पर पूर्व मंत्री पी.सी. शर्मा, महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष रीना बोरासी सेठिया और बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

दिग्विजय सिंह का दावा और अदालती योजना

दिग्विजय सिंह ने सभा को संबोधित करते हुए कहा, 'मैंने राम मंदिर निर्माण के लिए ₹1.11 लाख का दान दिया था। मेरे पास उसकी रसीद और चेक की कॉपी आज भी मौजूद है। मैं 5 या 6 जुलाई को अपने वरिष्ठ अधिवक्ता से सलाह लेने के बाद अयोध्या जाऊंगा और अदालत में मामला दायर करूंगा।' उन्होंने अपनी रसीद और चेक की प्रति सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत करते हुए इसे अपनी विश्वसनीयता का आधार बताया।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि अदालत यह मानती है कि दान की राशि के उपयोग में अनियमितता हुई है, तो वह अपने ₹1.11 लाख वापस माँगेंगे और उस राशि को किसी मान्यता प्राप्त धार्मिक संस्था अथवा किसी शंकराचार्य के ट्रस्ट को दान कर देंगे।

पारदर्शिता की माँग और संगठनों पर सवाल

दिग्विजय सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS), विश्व हिंदू परिषद (VHP) और राम मंदिर ट्रस्ट की वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल उठाए। उनका कहना था, 'लोगों ने भगवान राम के नाम पर पूरी श्रद्धा के साथ दान दिया था। यदि उस धन का दुरुपयोग हुआ है तो निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों को सजा मिलनी चाहिए।'

उन्होंने यह भी घोषणा की कि वह अपने घर के बाहर एक पट्टिका लगवाएंगे, जिस पर लिखा होगा — 'मेरे घर में चंदा चोरों का प्रवेश वर्जित है।' साथ ही उन्होंने आमजन से धार्मिक चंदे के उपयोग में अधिक पारदर्शिता की माँग करने की अपील की।

धर्म-विरोधी आरोपों का खंडन

दिग्विजय सिंह ने अपने ऊपर लगने वाले धर्म-विरोधी होने के आरोपों को सिरे से नकारा। उन्होंने कहा कि वह सदैव सनातन परंपरा का पालन करते रहे हैं, नियमित धार्मिक अनुष्ठान करते हैं और नर्मदा परिक्रमा भी कर चुके हैं। गौरतलब है कि राम मंदिर निर्माण के लिए देशभर में करोड़ों श्रद्धालुओं से व्यापक स्तर पर चंदा संग्रह किया गया था, और चंदे के उपयोग की पारदर्शिता को लेकर यह कथित तौर पर पहली बड़ी न्यायिक चुनौती हो सकती है।

आगे क्या होगा

दिग्विजय सिंह के अनुसार, 5 या 6 जुलाई को वरिष्ठ अधिवक्ता से परामर्श के बाद याचिका का मसौदा तैयार होगा और अयोध्या जिला न्यायालय में दाखिल किया जाएगा। यह मामला राजनीतिक और धार्मिक दोनों धरातलों पर व्यापक बहस को जन्म दे सकता है, क्योंकि इसमें श्रद्धालुओं के दान के उपयोग की जवाबदेही का सवाल केंद्र में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इससे भी बड़ा सवाल यह है कि देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं के दान का ऑडिट सार्वजनिक क्यों नहीं हुआ। राम मंदिर ट्रस्ट एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है और उसकी वित्तीय पारदर्शिता की माँग किसी एक दल की नहीं, बल्कि हर दानकर्ता की वैध अपेक्षा है। आलोचकों का कहना है कि कांग्रेस इस मुद्दे को चुनावी हथियार बना रही है, जबकि भाजपा समर्थक इसे हिंदू भावनाओं पर हमला बता रहे हैं — दोनों पक्ष असली सवाल से भटक रहे हैं। पारदर्शिता की यह माँग यदि अदालत तक पहुँचती है, तो यह धार्मिक ट्रस्टों की जवाबदेही के लिए एक मिसाल बन सकती है।
RashtraPress
3 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिग्विजय सिंह राम मंदिर को लेकर अदालत क्यों जा रहे हैं?
दिग्विजय सिंह राम मंदिर निर्माण के लिए संग्रहीत चंदे में कथित वित्तीय अनियमितताओं की निष्पक्ष जाँच की माँग को लेकर अयोध्या जिला न्यायालय में याचिका दाखिल करने की तैयारी में हैं। उनका तर्क है कि करोड़ों श्रद्धालुओं को यह जानने का अधिकार है कि उनका दान किस मद में खर्च हुआ।
दिग्विजय सिंह अयोध्या कोर्ट कब जाएंगे?
उन्होंने 5 या 6 जुलाई 2026 को वरिष्ठ अधिवक्ता से परामर्श के बाद अयोध्या जाकर जिला न्यायालय में मामला दायर करने की घोषणा की है।
क्या दिग्विजय सिंह ने खुद राम मंदिर के लिए दान दिया था?
हाँ, दिग्विजय सिंह के अनुसार उन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए ₹1.11 लाख का दान दिया था और उनके पास रसीद तथा चेक की प्रति आज भी सुरक्षित है। उन्होंने यह दस्तावेज़ भोपाल के सार्वजनिक कार्यक्रम में प्रस्तुत किए।
यदि अदालत अनियमितता मानती है तो दिग्विजय सिंह क्या करेंगे?
उन्होंने घोषणा की है कि वह अपने ₹1.11 लाख वापस माँगेंगे और उस राशि को किसी मान्यता प्राप्त धार्मिक संस्था अथवा किसी शंकराचार्य के ट्रस्ट को दान कर देंगे।
दिग्विजय सिंह ने किन संगठनों पर पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए?
उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS), विश्व हिंदू परिषद (VHP) और राम मंदिर ट्रस्ट की वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि धार्मिक चंदे के उपयोग का पूरा हिसाब श्रद्धालुओं के सामने रखा जाना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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