4 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

दिग्विजय सिंह के राम मंदिर चढ़ावा बयान पर संतों का पलटवार, बोले- कांग्रेस को बोलने का हक नहीं

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
दिग्विजय सिंह के राम मंदिर चढ़ावा बयान पर संतों का पलटवार, बोले- कांग्रेस को बोलने का हक नहीं

सारांश

राम मंदिर चढ़ावे में कथित गबन का आरोप लगाकर दिग्विजय सिंह के कोर्ट जाने के ऐलान ने अयोध्या के संत समाज को भड़का दिया। रामदल ट्रस्ट के पंडित कल्कि राम और महंत वेदांती ने एकजुट होकर कांग्रेस पर सनातन धर्म विरोधी राजनीति का आरोप लगाया — और यह विवाद धार्मिक ट्रस्टों की जवाबदेही की बहस को नई धार दे रहा है।

मुख्य बातें

दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर निर्माण के लिए दिए ₹1 लाख 11 हज़ार के चंदे को वापस लेने के लिए अयोध्या में मुकदमा दायर करने की घोषणा की।
उनका आरोप है कि मंदिर निर्माण के लिए एकत्रित धन का गबन हुआ है।
रामदल ट्रस्ट के अध्यक्ष पंडित कल्कि राम ने कहा कि कांग्रेस का अस्तित्व ही राम मंदिर के विरोध पर रहा है।
महंत सत्येंद्र दास वेदांती ने कहा कि जो लोग राम को काल्पनिक बताते थे, वही आज सवाल उठा रहे हैं।
साकेत भवन महंत सीताराम दास ने बयान को 'मानसिक असंतुलन' का परिचायक बताया।
धर्मदास महाराज ने बद्रीनाथ-केदारनाथ धामों पर सरकारी नियंत्रण का विरोध किया।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह द्वारा राम मंदिर चढ़ावे में कथित गबन का आरोप लगाते हुए अपना ₹1 लाख 11 हज़ार का दान वापस लेने के लिए न्यायालय जाने की घोषणा के बाद अयोध्या में संत समाज ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। रामदल ट्रस्ट के अध्यक्ष पंडित कल्कि राम, महंत सत्येंद्र दास वेदांती और अन्य प्रमुख संतों ने 4 जुलाई को एकजुट होकर कांग्रेस पर सनातन धर्म विरोधी राजनीति का आरोप लगाया।

दिग्विजय सिंह का विवादित बयान

दिग्विजय सिंह ने घोषणा की कि वे अयोध्या में मुकदमा दायर कर अपने दान की वापसी की माँग करेंगे। उनका तर्क है कि उन्होंने यह राशि भगवान राम में आस्था और भव्य मंदिर निर्माण की भावना से दी थी, किंतु अब सामने आ रही शिकायतें बताती हैं कि उस धन का गबन हुआ है। उन्होंने इसे श्रद्धालुओं के विश्वास के साथ विश्वासघात बताया।

संतों की कड़ी प्रतिक्रिया

रामदल ट्रस्ट के अध्यक्ष पंडित कल्कि राम ने पलटवार करते हुए कहा, 'कांग्रेसियों को राम मंदिर पर बोलना ही नहीं चाहिए, क्योंकि अखिल ब्रह्मांड नायक, मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम चंद्र जी के जन्मस्थान पर बनने वाले मंदिर निर्माण में सबसे बड़ा अगर कोई अवरोधक था तो वो कांग्रेस थी।' उन्होंने कहा कि कांग्रेस का अस्तित्व ही राम मंदिर के विरोध पर रहा और अब जब मंदिर बन गया है तो यह नाटक हो रहा है।

पंडित कल्कि राम ने कलश स्थापना न होने के आरोपों को भी खारिज किया और कहा कि पूरी दुनिया ने देखा कि सरयू से श्री राम मंदिर तक हज़ारों माताओं ने अपने हाथों में कलश थामे रखे थे।

महंत वेदांती और अन्य संतों के आरोप

महंत सत्येंद्र दास वेदांती ने कहा कि जो लोग कभी भगवान राम को काल्पनिक बताते थे, वही आज सवाल खड़े कर रहे हैं। उनके अनुसार यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि विधि-विधान के साथ राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा हो जाने के बाद भी कुछ राजनीतिक दल इस पर राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंदिर निर्माण के दौरान वैदिक परंपराओं के अनुसार सभी अनुष्ठान पूरे किए गए और हज़ारों श्रद्धालुओं की सहभागिता रही।

साकेत भवन महंत सीताराम दास ने दिग्विजय सिंह की टिप्पणियों को 'मानसिक असंतुलन और भ्रम की स्थिति' का परिचायक बताया। उन्होंने कहा कि राम भक्तों की आस्था पर सवाल उठाना गलत है और इससे समाज में अनावश्यक तनाव पैदा होता है। उन्होंने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाते हुए कहा कि राम जन्मभूमि आंदोलन को कमज़ोर करने के प्रयास पहले भी होते रहे हैं।

बद्रीनाथ-केदारनाथ चढ़ावे पर भी उठे सवाल

इसी संदर्भ में बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिरों में चढ़ावे की कथित अनियमितताओं पर भी संतों ने अपनी राय रखी। महंत सत्येंद्र दास वेदांती ने कहा कि मंदिरों के संचालन में पूर्ण पारदर्शिता होनी चाहिए और दान-चढ़ावे का लेखा-जोखा सार्वजनिक किया जाना चाहिए ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे।

धर्मदास महाराज ने कहा कि बद्रीनाथ-केदारनाथ धामों पर सरकारी नियंत्रण नहीं होना चाहिए, क्योंकि उनके अनुसार परंपरागत रूप से ब्राह्मण और धार्मिक समुदाय ही इन धामों की व्यवस्था बेहतर तरीके से संभालते रहे हैं।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब राम मंदिर ट्रस्ट की वित्तीय पारदर्शिता को लेकर देशभर में बहस तेज़ हो रही है। दिग्विजय सिंह का मुकदमा दायर होने की स्थिति में यह मामला न्यायालय के समक्ष जाएगा, जहाँ ट्रस्ट को अपना पक्ष रखना होगा। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी राजनेता ने धार्मिक ट्रस्टों की जवाबदेही पर सवाल उठाए हों — भविष्य में यह विवाद धार्मिक संस्थाओं में पारदर्शिता की माँग को और बल दे सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन चढ़ावे में पारदर्शिता की माँग को केवल राजनीतिक षड्यंत्र कहकर खारिज करना श्रद्धालुओं के वैध सवालों को दबाना होगा। बद्रीनाथ-केदारनाथ जैसे धामों में कथित अनियमितताओं की चर्चा यह दर्शाती है कि यह विवाद सिर्फ राम मंदिर तक सीमित नहीं — धार्मिक संस्थाओं में ऑडिट और सार्वजनिक लेखा-जोखा की व्यवस्था की माँग अब व्यापक होती जा रही है।
RashtraPress
4 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिग्विजय सिंह राम मंदिर चंदा वापसी के लिए कोर्ट क्यों जा रहे हैं?
दिग्विजय सिंह का कहना है कि उन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए ₹1 लाख 11 हज़ार का दान भगवान राम में आस्था की भावना से दिया था, लेकिन अब सामने आ रही शिकायतें बताती हैं कि उस धन का गबन हुआ है। इसीलिए वे अयोध्या में मुकदमा दायर कर अपनी राशि वापस माँगना चाहते हैं।
संतों ने दिग्विजय सिंह के बयान पर क्या कहा?
रामदल ट्रस्ट के अध्यक्ष पंडित कल्कि राम ने कहा कि कांग्रेस का अस्तित्व ही राम मंदिर के विरोध पर रहा है, इसलिए उन्हें इस पर बोलने का अधिकार नहीं। महंत सत्येंद्र दास वेदांती ने कहा कि जो लोग पहले राम को काल्पनिक बताते थे, वही आज सवाल उठा रहे हैं।
राम मंदिर ट्रस्ट पर चढ़ावे के गबन के आरोप क्या हैं?
दिग्विजय सिंह सहित कुछ लोगों ने आरोप लगाया है कि राम मंदिर निर्माण के लिए एकत्रित दान और चढ़ावे का सही उपयोग नहीं हुआ। हालाँकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामला न्यायालय में जाने की स्थिति में है।
बद्रीनाथ-केदारनाथ चढ़ावा विवाद से इस मामले का क्या संबंध है?
संतों ने इसी संदर्भ में बद्रीनाथ-केदारनाथ धामों में कथित अनियमितताओं का ज़िक्र किया। महंत वेदांती ने माँग की कि मंदिरों के दान का लेखा-जोखा सार्वजनिक हो, जबकि धर्मदास महाराज ने इन धामों पर सरकारी नियंत्रण का विरोध किया।
क्या दिग्विजय सिंह का मुकदमा कानूनी रूप से सफल हो सकता है?
यह मामला अभी प्रारंभिक चरण में है और दिग्विजय सिंह ने केवल अयोध्या में मुकदमा दायर करने की घोषणा की है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, धार्मिक ट्रस्ट को दिए गए दान की वापसी का दावा जटिल कानूनी प्रक्रिया से गुज़रेगा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 8 मिनट पहले
  2. 42 मिनट पहले
  3. 3 घंटे पहले
  4. 19 घंटे पहले
  5. 6 दिन पहले
  6. 3 सप्ताह पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 3 महीने पहले