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राम मंदिर दान विवाद: वकील शशांक शेखर त्रिपाठी ने दिग्विजय सिंह को भेजा ₹1.11 लाख लौटाने का कानूनी नोटिस

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राम मंदिर दान विवाद: वकील शशांक शेखर त्रिपाठी ने दिग्विजय सिंह को भेजा ₹1.11 लाख लौटाने का कानूनी नोटिस

सारांश

वाराणसी के वकील शशांक शेखर त्रिपाठी ने दिग्विजय सिंह को कानूनी नोटिस भेजा — प्रस्ताव यह कि राम मंदिर व्यवस्था पर सवाल उठाने के बाद अब उनका ₹1,11,000 का दान वापस ले लें। राम भक्ति और राजनीतिक विरोधाभास के बीच यह मामला अयोध्या विवाद का नया अध्याय बन गया है।

मुख्य बातें

वाराणसी के वकील शशांक शेखर त्रिपाठी ने 7 जुलाई 2026 को कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह को कानूनी नोटिस भेजा।
त्रिपाठी ने अपनी व्यक्तिगत कमाई से ₹1,11,000 वापस करने का प्रस्ताव रखा — वही राशि जो दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर निर्माण के लिए दान की थी।
यह कदम दिग्विजय सिंह के उस बयान के विरोध में उठाया गया जिसमें उन्होंने राम मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाए थे।
नोटिस ईमेल (सुबह व दोपहर) और डाक — तीन माध्यमों से भेजा गया।
दिग्विजय सिंह या कांग्रेस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

वाराणसी के वकील शशांक शेखर त्रिपाठी ने 7 जुलाई 2026 को कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह को कानूनी नोटिस भेजकर प्रस्ताव रखा कि वे अयोध्या के श्री राम मंदिर निर्माण के लिए दिग्विजय सिंह द्वारा दिए गए ₹1,11,000 के दान की राशि अपनी व्यक्तिगत कमाई से वापस करने को तैयार हैं। त्रिपाठी ने यह कदम दिग्विजय सिंह के उस हालिया बयान के विरोध में उठाया, जिसमें उन्होंने राम मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाए थे।

विवाद की पृष्ठभूमि

कथित तौर पर राम मंदिर परिसर में कुछ गणना कर्मियों की संलिप्तता वाली चोरी की घटना सामने आने के बाद दिग्विजय सिंह ने मंदिर की समग्र व्यवस्था पर आरोप लगाए थे। त्रिपाठी के अनुसार, इस बयान से सनातन धर्म की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा, "दिग्विजय सिंह ने पूरी राम मंदिर व्यवस्था पर आरोप लगाकर यह साबित करने का प्रयास किया कि राम मंदिर की पूरी संरचना और व्यवस्था सनातन धर्म पर सवाल खड़े करती है। इससे सनातन धर्म को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है।"

वकील का व्यक्तिगत जुड़ाव

त्रिपाठी ने अपने राम मंदिर आंदोलन से जुड़े अनुभव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, "मैं भगवान राम का भक्त हूं और हम लोगों ने बचपन से ही राम मंदिर आंदोलन को देखा है। उस आंदोलन के दौरान हमें चोटें भी लगी थीं। हम उस समय बच्चे थे, इसलिए गिरफ्तार नहीं हुए, लेकिन पुलिस लाठीचार्ज के दौरान लगी चोटों के निशान आज भी मेरे शरीर पर हैं।" यह बयान उनके इस कदम के पीछे की भावनात्मक प्रेरणा को रेखांकित करता है।

नोटिस में क्या कहा गया

त्रिपाठी ने बताया कि उन्होंने 7 जुलाई की सुबह 6 बजे ईमेल के माध्यम से पहला नोटिस भेजा, इसके बाद दोपहर में दूसरा और फिर डाक से भी नोटिस प्रेषित किया गया। नोटिस में दिग्विजय सिंह से कहा गया है कि वे आकर ₹1,11,000 वापस ले लें और इस संबंध में कोई दावा या मुकदमा आगे न बढ़ाएं।

त्रिपाठी ने अपने तर्क को स्पष्ट करते हुए कहा, "जो दान देवता को दिया जाता है, वह देवता की संपत्ति होती है। देवता की संपत्ति की संरक्षक सरकार होती है, लेकिन देवता के प्रति हर भक्त भी अपनी जिम्मेदारी समझता है। मैंने निर्णय लिया कि मैं राम भक्त होने के नाते अपनी व्यक्तिगत कमाई से वह ₹1,11,000 रुपये वापस करूंगा।"

दिग्विजय सिंह के दान का संदर्भ

गौरतलब है कि जब देशभर से हिंदू समाज ने श्री राम मंदिर निर्माण के लिए अरबों रुपये का दान दिया था, तब दिग्विजय सिंह ने भी ₹1,11,000 का योगदान दिया था। त्रिपाठी के अनुसार, उन्होंने खुद को ओरछा के राजा से जोड़ते हुए श्रीराम का वंशज बताकर यह दान दिया था। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि कांग्रेस पार्टी और दिग्विजय सिंह ने लंबे समय तक राम मंदिर और भगवान राम के अस्तित्व को लेकर सवाल उठाए, जिससे उनके दान और वर्तमान बयान के बीच विरोधाभास उभरता है।

आगे की स्थिति

अभी तक दिग्विजय सिंह या कांग्रेस पार्टी की ओर से इस कानूनी नोटिस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह मामला राम मंदिर प्रशासन और राजनीतिक बयानबाजी के व्यापक विवाद का हिस्सा बन गया है, जो आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी असली परत राजनीतिक प्रतीकवाद की है — दिग्विजय सिंह का दान देना और फिर मंदिर प्रशासन पर सवाल उठाना, इस विरोधाभास को उजागर करने की कोशिश है। आलोचकों का कहना है कि कांग्रेस नेताओं का राम मंदिर के प्रति रवैया वर्षों से अस्पष्ट रहा है — कभी समर्थन, कभी संदेह। ₹1,11,000 की यह राशि प्रतीकात्मक रूप से छोटी है, लेकिन इसे वापस करने का प्रस्ताव एक बड़ा राजनीतिक संदेश देता है। असली सवाल यह है कि राम मंदिर में कथित चोरी की घटना की जाँच कहाँ तक पहुँची — वह मूल मुद्दा इस नोटिस-विवाद में दब न जाए।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शशांक शेखर त्रिपाठी ने दिग्विजय सिंह को कानूनी नोटिस क्यों भेजा?
वकील शशांक शेखर त्रिपाठी ने दिग्विजय सिंह के उस बयान के विरोध में नोटिस भेजा जिसमें उन्होंने राम मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाए थे। त्रिपाठी का तर्क है कि यह बयान सनातन धर्म को कमजोर करने का प्रयास है, इसलिए उन्होंने दिग्विजय सिंह का ₹1,11,000 का दान अपनी कमाई से वापस करने का प्रस्ताव रखा।
दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर के लिए कितना दान दिया था?
दिग्विजय सिंह ने अयोध्या में श्री राम मंदिर निर्माण के लिए ₹1,11,000 का दान दिया था। उन्होंने खुद को ओरछा के राजा से जोड़ते हुए श्रीराम का वंशज बताकर यह योगदान दिया था।
कानूनी नोटिस में दिग्विजय सिंह से क्या माँगा गया है?
नोटिस में दिग्विजय सिंह से कहा गया है कि वे आकर ₹1,11,000 वापस ले लें और इस संबंध में कोई दावा या मुकदमा आगे न बढ़ाएं। यह नोटिस ईमेल और डाक — दोनों माध्यमों से भेजा गया है।
राम मंदिर में चोरी की घटना क्या थी जिसका उल्लेख इस विवाद में हुआ?
कथित तौर पर राम मंदिर परिसर में कुछ गणना कर्मियों की संलिप्तता वाली एक चोरी की घटना सामने आई थी। इसी घटना के बाद दिग्विजय सिंह ने मंदिर की समग्र व्यवस्था पर सवाल उठाए, जो इस कानूनी नोटिस विवाद का मूल कारण बना।
क्या दिग्विजय सिंह ने इस नोटिस पर कोई प्रतिक्रिया दी है?
अभी तक दिग्विजय सिंह या कांग्रेस पार्टी की ओर से इस कानूनी नोटिस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामला अयोध्या राम मंदिर से जुड़े व्यापक राजनीतिक विवाद का हिस्सा बन गया है।
राष्ट्र प्रेस
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