बारुईपुर नाबालिग दुष्कर्म-हत्या और फुटबॉल विवाद में युवक की मौत पर रिजु दत्ता का बड़ा बयान
सारांश
मुख्य बातें
टीएमसी के निलंबित प्रवक्ता रिजु दत्ता ने 7 जुलाई 2026 को पश्चिम बंगाल की कानून-व्यवस्था, पंचायत प्रशासन और हालिया आपराधिक घटनाओं को लेकर तीखी टिप्पणियाँ कीं। उन्होंने बारुईपुर में एक नाबालिग बच्ची के कथित सामूहिक दुष्कर्म एवं हत्या तथा फुटबॉल मैच विवाद में 17 वर्षीय युवक की हत्या को राज्य में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति का प्रमाण बताया।
प्रशासनिक भेदभाव का आरोप
रिजु दत्ता ने दावा किया कि लालबाजार स्थित कोलकाता पुलिस मुख्यालय में एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी ने उनसे स्पष्ट शब्दों में कहा था — 'जब आप सत्ता में होते हैं, तब 80 प्रतिशत सुविधाएँ मिलती हैं और जब सत्ता में नहीं होते, तब केवल 20 प्रतिशत।' उनके अनुसार यह बयान दर्शाता है कि राज्य में प्रशासनिक सहयोग सत्ता-समीकरण पर निर्भर करता है।
पंचायत व्यवस्था पर चिंता
दत्ता ने पंचायत स्तर पर जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति को भी गंभीर मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि अनेक पंचायत प्रतिनिधि नियमित रूप से कार्यालय नहीं आ रहे, जिससे ग्रामीण विकास कार्य बाधित हो रहे हैं और आम नागरिकों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
इसी संदर्भ में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता दिलीप घोष के उस बयान का उल्लेख किया जिसमें घोष ने कथित तौर पर कहा था कि काम पर न आने वालों को 'अंडों की जगह पत्थर मारे जाएंगे।' हालाँकि, दत्ता ने स्पष्ट किया कि वे व्यक्तिगत रूप से इस प्रकार की हिंसक भाषा का समर्थन नहीं करते, भले ही घोष के प्रति उनके मन में सम्मान है।
बारुईपुर की आपराधिक घटनाएँ
बारुईपुर में एक नाबालिग बच्ची के कथित सामूहिक दुष्कर्म और हत्या की घटना ने पूरे राज्य में आक्रोश की लहर पैदा की है। इसी क्षेत्र में एक फुटबॉल मैच को लेकर हुए विवाद में 17 वर्षीय एक युवक की हत्या ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया। दत्ता के अनुसार ये घटनाएँ राज्य में कानून-व्यवस्था की कमज़ोरी को उजागर करती हैं।
नई सरकार के सामने चुनौती
रिजु दत्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के सामने सबसे बड़ी परीक्षा कानून-व्यवस्था को नियंत्रण में रखने की होगी। उन्होंने कहा कि बंगाल एक बड़ा और राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्य है जहाँ दशकों से सामाजिक एवं राजनीतिक हिंसा की जड़ें गहरी हैं। ऐसे में किसी भी सरकार के लिए विकास और सुरक्षा — दोनों मोर्चों पर एक साथ काम करना अनिवार्य होगा।
आगे क्या
बारुईपुर की घटनाओं पर विपक्षी दलों का दबाव बढ़ रहा है और राज्य पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए जा रहे हैं। रिजु दत्ता जैसे टीएमसी के भीतर से उठती आवाज़ें यह संकेत देती हैं कि पार्टी के अंदर भी असंतोष पनप रहा है। आने वाले दिनों में राज्य सरकार की प्रतिक्रिया और जाँच की दिशा पर सबकी नज़रें टिकी रहेंगी।