7 जुलाई 2026
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राम मंदिर चंदा चोरी कांड: दिनेश फलाहारी बोले — ट्रस्टों में सीसीटीवी निगरानी और पारदर्शिता अनिवार्य

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राम मंदिर चंदा चोरी कांड: दिनेश फलाहारी बोले — ट्रस्टों में सीसीटीवी निगरानी और पारदर्शिता अनिवार्य

सारांश

राम मंदिर ट्रस्ट में चंदा चोरी का मामला सामने आने के बाद अब संस्थागत सुधार की माँग उठने लगी है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि के हिंदू पक्षकार दिनेश फलाहारी ने सीसीटीवी निगरानी और ईमानदार ट्रस्टियों की नियुक्ति को अनिवार्य बताया — ताकि श्रद्धालुओं की आस्था और दान सुरक्षित रहे।

मुख्य बातें

दिनेश फलाहारी ने 7 जुलाई को मंदिर ट्रस्टों में सीसीटीवी निगरानी और पारदर्शिता की माँग की।
राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार किए गए।
फलाहारी ने कहा — ट्रस्ट में ऐसे लोगों की नियुक्ति हो जिनकी ईमानदारी और निष्पक्षता पर कोई सवाल न उठे।
चंदा चोरी रुकी नहीं तो राम मंदिर विरोधियों को राजनीतिक लाभ मिलने की आशंका जताई।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही कह चुके हैं — दोषी कितना भी प्रभावशाली हो, जेल जाएगा।

राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े चंदा चोरी मामले के बाद मंदिर प्रबंधन की जवाबदेही पर देशभर में बहस छिड़ गई है। इसी पृष्ठभूमि में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले के हिंदू पक्षकार दिनेश फलाहारी ने 7 जुलाई को मथुरा में मंदिर ट्रस्टों के संचालन में व्यापक पारदर्शिता, सख्त निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करने की माँग उठाई। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से व्यापक निगरानी तंत्र स्थापित किया जाना चाहिए।

ट्रस्ट की बैठक और इस्तीफे

दिनेश फलाहारी ने राम मंदिर ट्रस्ट की हालिया बैठक का उल्लेख करते हुए कहा कि बैठक में चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब ट्रस्ट में ऐसे व्यक्तियों की नियुक्ति होनी चाहिए जिनकी कार्यशैली, ईमानदारी और निष्पक्षता पर किसी को कोई संदेह न हो। उनके अनुसार, मंदिरों में आने वाला दान श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है और उसके उपयोग व सुरक्षा में किसी भी प्रकार की लापरवाही अस्वीकार्य है।

सीसीटीवी निगरानी की आवश्यकता

फलाहारी ने सुझाव दिया कि मंदिर परिसर और ट्रस्ट कार्यालयों में सीसीटीवी कैमरों के ज़रिए प्रत्येक गतिविधि का रिकॉर्ड रखा जाए। उनका मानना है कि यदि निगरानी व्यवस्था सुदृढ़ होगी तो चंदा चोरी जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी। उन्होंने कहा कि कुछ गलत प्रवृत्ति के लोगों की वजह से पूरे संगठन की साख दाँव पर लग जाती है, इसलिए ऐसी प्रणाली विकसित होनी चाहिए जो गड़बड़ी की संभावना को न्यूनतम करे।

राजनीतिक दुरुपयोग की आशंका

फलाहारी ने चेतावनी दी कि यदि चंदा चोरी जैसी घटनाओं पर समय रहते अंकुश नहीं लगाया गया तो उन लोगों को राम मंदिर पर अनावश्यक आरोप लगाने का अवसर मिलेगा जो पहले से ही इसके विरोध में रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियाँ नहीं बनने देनी चाहिए जिनका राजनीतिक या वैचारिक लाभ उठाया जा सके। इसलिए ट्रस्ट का संचालन पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ होना अनिवार्य है।

जाँच और कानूनी कार्रवाई

जाँच की प्रगति पर फलाहारी ने कहा कि जाँच एजेंसियाँ अपना काम कर रही हैं और जो भी दोषी होगा, वह कानून के शिकंजे से बच नहीं पाएगा। उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस बयान का हवाला दिया जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया था कि अपराध करने वाला व्यक्ति चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, कानून अपना काम करेगा और दोषी को जेल जाना ही पड़ेगा। यह मामला मंदिर प्रशासन में संस्थागत सुधार की आवश्यकता को नए सिरे से रेखांकित करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि देश के सबसे बड़े धार्मिक संस्थानों की प्रशासनिक खामियों का आईना है। दिनेश फलाहारी की सीसीटीवी और पारदर्शिता की माँग स्वागतयोग्य है, लेकिन असली सवाल यह है कि ट्रस्टियों की नियुक्ति प्रक्रिया में जवाबदेही कैसे सुनिश्चित होगी — क्योंकि तकनीक तभी कारगर है जब संस्थागत इच्छाशक्ति भी हो। यह भी विचारणीय है कि करोड़ों श्रद्धालुओं के दान से संचालित ट्रस्टों के लिए स्वतंत्र ऑडिट और सार्वजनिक वित्तीय रिपोर्टिंग की कोई बाध्यकारी व्यवस्था अब तक क्यों नहीं बनी। इस्तीफों और जाँच से आगे बढ़कर, मंदिर प्रशासन में संरचनात्मक सुधार की ज़रूरत है।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर ट्रस्ट चंदा चोरी मामला क्या है?
राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े चंदा चोरी के मामले में ट्रस्ट के भीतर दान की राशि के दुरुपयोग के आरोप सामने आए हैं। इस मामले में जाँच एजेंसियाँ सक्रिय हैं और ट्रस्ट के दो प्रमुख सदस्यों के इस्तीफे स्वीकार किए जा चुके हैं।
चंपत राय और अनिल मिश्रा ने इस्तीफा क्यों दिया?
दिनेश फलाहारी के अनुसार, राम मंदिर ट्रस्ट की हालिया बैठक में चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार किए गए। इस्तीफे का सीधा संबंध चंदा चोरी विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है, हालाँकि आधिकारिक कारण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
दिनेश फलाहारी ने मंदिर ट्रस्टों के लिए क्या सुझाव दिए?
फलाहारी ने मंदिर परिसर और ट्रस्ट कार्यालयों में सीसीटीवी कैमरों के ज़रिए व्यापक निगरानी, ईमानदार और निष्पक्ष ट्रस्टियों की नियुक्ति, तथा संपूर्ण पारदर्शिता के साथ ट्रस्ट संचालन की माँग की। उनका कहना है कि श्रद्धालुओं के दान की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया है कि दोषी व्यक्ति चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, कानून अपना काम करेगा और उसे जेल जाना ही पड़ेगा। यह बयान मामले की गंभीरता और राज्य सरकार की कार्रवाई के इरादे को दर्शाता है।
इस मामले का राजनीतिक प्रभाव क्या हो सकता है?
दिनेश फलाहारी ने आशंका जताई है कि यदि चंदा चोरी जैसी घटनाओं पर रोक नहीं लगी तो राम मंदिर का विरोध करने वाले इसे राजनीतिक या वैचारिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। इसीलिए उन्होंने ट्रस्ट के पारदर्शी संचालन को राजनीतिक दुरुपयोग से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय बताया।
राष्ट्र प्रेस
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