मिजोरम विश्वविद्यालय का प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय बना भारत का 21वाँ नामित भंडार
सारांश
मुख्य बातें
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 19 जून 2025 को मिजोरम विश्वविद्यालय, आइजोल स्थित प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय (एनएचएम) को जैव विविधता अधिनियम, 2002 की धारा 39 के अंतर्गत नामित भंडार के रूप में अधिसूचित किया। इस अधिसूचना के साथ एनएचएम भारत का 21वाँ नामित भंडार बन गया है, जो देश के जैव विविधता संरक्षण ढाँचे को एक नई वैज्ञानिक मज़बूती देता है।
अधिसूचना की पृष्ठभूमि
मंत्रालय के अनुसार, यह निर्णय राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) की सिफारिश और प्रस्ताव की विधिवत जाँच के बाद लिया गया। नामित भंडार जैव विविधता अधिनियम के तहत प्रमाणित जैविक नमूनों के दीर्घकालिक संरक्षण के लिए भारत के जैव विविधता शासन ढाँचे का एक अहम घटक माने जाते हैं। गौरतलब है कि एनएचएम को यह दर्जा मिलने से पहले ही वह 500 से अधिक नमूने एकत्र और संरक्षित कर चुका था, जिनमें हर्बेरियम शीट और जल-संरक्षित संग्रह शामिल हैं।
संग्रहालय में क्या संरक्षित होगा
एनएचएम में वनस्पति जगत से टेरिडोफाइट्स और मैक्रोफंगी सहित चुनिंदा वनस्पतियों के प्रमाणित नमूने रखे जाएंगे। जीव-जगत में सरीसृप, उभयचर, मछलियाँ, पतंगे, भृंग और तितलियों के नमूने संग्रहीत होंगे। इसके अतिरिक्त, यह संस्थान क्षेत्र में हाल ही में खोजी गई प्रजातियों के टाइप नमूनों के लिए भी नामित भंडार के रूप में कार्य करेगा — जो किसी प्रजाति की वैज्ञानिक पहचान के लिए आधारभूत संदर्भ बिंदु होते हैं।
वैज्ञानिक और संरक्षण महत्व
मंत्रालय के बयान के अनुसार, ये प्रमाणित संग्रह प्रजातियों की पहचान, पता लगाने की क्षमता और वैज्ञानिक अनुसंधान को सुदृढ़ करेंगे। साथ ही, पर्यावास के नुकसान, प्राकृतिक आपदाओं या प्रजातियों की संख्या में कमी की स्थिति में ये भविष्य की पारिस्थितिक बहाली में भी सहायक सिद्ध होंगे। एनएचएम की बहु-विषयक वैज्ञानिक टीम में मिजोरम विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ शामिल हैं।
राष्ट्रीय नेटवर्क को मिलेगी मज़बूती
बयान में कहा गया है कि यह पदनाम जैविक नमूनों को उनके स्रोत के निकट संरक्षित करने, वैज्ञानिक प्रलेखन में सुधार और रसद संबंधी चुनौतियों को कम करने में सहायक होगा। यह मिजोरम राज्य जैव विविधता बोर्ड और क्षेत्रीय अनुसंधान संस्थानों के साथ सहयोग को भी सुगम बनाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर भारत जैव विविधता अनुसंधान के एक उभरते केंद्र के रूप में तेज़ी से पहचान बना रहा है। आगे चलकर इस नेटवर्क का विस्तार देश की जैव विविधता सुरक्षा नीति की दिशा तय करेगा।