27 जून 2026
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बीएयू सबौर में राष्ट्रीय आम समागम: 1,000 से अधिक किस्में प्रदर्शित, जर्दालू और मियाजाकी बने आकर्षण का केंद्र

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बीएयू सबौर में राष्ट्रीय आम समागम: 1,000 से अधिक किस्में प्रदर्शित, जर्दालू और मियाजाकी बने आकर्षण का केंद्र

सारांश

भागलपुर के बीएयू सबौर में राष्ट्रीय आम समागम में 1,000 से अधिक किस्में प्रदर्शित हुईं — जापान का मियाजाकी से लेकर ढाई किलो का गदाधार तक। जहाँ 1951 में दुनिया की पहली हाइब्रिड आम किस्म बनी, वही सबौर आज बिहार की कृषि पहचान का केंद्र बन रहा है।

मुख्य बातें

बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर में 27 जून 2026 से दो दिवसीय राष्ट्रीय आम समागम-सह-कार्यशाला शुरू हुई।
देशभर से लाई गई 1,000 से अधिक आम किस्मों की प्रदर्शनी लगाई गई, जिसमें जापान का मियाजाकी , गदाधार (ढाई किलो) और थाईलैंड की रेड इनोवरी जैसी दुर्लभ किस्में शामिल हैं।
सबौर में 1951 में विश्व की पहली हाइब्रिड आम किस्म विकसित हुई थी; जर्दालू आम को जीआई टैग प्राप्त है।
बिहार आम उत्पादन में सातवें से तीसरे स्थान पर पहुँचा।
बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के चार उत्कृष्ट आम उत्पादकों को सम्मानित किया गया।
दूसरे दिन राज्यपाल सैयद अता हसनैन और कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा के शामिल होने का कार्यक्रम है।

बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर, भागलपुर में 27 जून 2026 को दो दिवसीय राष्ट्रीय आम समागम-सह-कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। देशभर से संकलित 1,000 से अधिक आम किस्मों की प्रदर्शनी ने किसानों, वैज्ञानिकों और आम प्रेमियों को एक साझा मंच पर ला खड़ा किया। इस भव्य आयोजन ने विश्वविद्यालय परिसर को सही मायनों में 'आममय' बना दिया।

उद्घाटन और मुख्य अतिथि

कार्यक्रम का उद्घाटन बिहार सरकार के ग्रामीण विकास एवं सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री श्रवण कुमार ने किया। इस अवसर पर भागलपुर के सांसद अजय मंडल, विधायक रोहित पांडे, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के सहायक निदेशक (उद्यानिकी) डॉ. विश्वबंधु पटेल और एआईसीआरपी बेंगलुरु के कार्यक्रम समन्वयक डॉ. प्रकाश पाटिल सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। कुलपति डॉ. डीआर सिंह ने अतिथियों को अंगवस्त्र, जर्दालू आम के पौधे एवं फल भेंट कर उनका स्वागत किया।

सबौर की ऐतिहासिक भूमिका और बिहार की छलांग

कुलपति डॉ. डीआर सिंह ने बताया कि सबौर आम अनुसंधान की ऐतिहासिक भूमि रही है — विश्व की पहली संकर (हाइब्रिड) आम किस्म वर्ष 1951 में यहीं विकसित की गई थी। विश्वविद्यालय के अथक प्रयासों की बदौलत भागलपुर के जर्दालू आम को प्रतिष्ठित जीआई टैग भी प्राप्त हुआ है। उन्होंने यह भी बताया कि बिहार आम उत्पादन में देशभर में सातवें स्थान से उठकर अब तीसरे स्थान पर पहुँच चुका है — यह कृषि नीति और अनुसंधान का मिला-जुला परिणाम है।

प्रदर्शनी में दुर्लभ और विदेशी किस्में

प्रदर्शनी में जापान का विश्वप्रसिद्ध मियाजाकी आम, नूरजहां, आइसक्रीम आम, एप्पल मैंगो, लगभग ढाई किलोग्राम वजन वाला गदाधार आम, क्यूज़म मैंगो, काजू आम और थाईलैंड की रेड इनोवरी जैसी दुर्लभ किस्में दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण रहीं। इनके साथ ही जर्दालू, केसर, फाजली, मालदह, हिमसागर, गुलाबखास और आम्रपाली सहित देसी किस्मों की भी भरपूर प्रदर्शनी लगाई गई।

सम्मान और प्रतियोगिताएँ

आयोजन में बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के चार उत्कृष्ट आम उत्पादकों को सम्मानित किया गया। कृषि विज्ञान केंद्र, सबौर को उत्कृष्ट प्रदर्शनी के लिए विशेष सम्मान प्राप्त हुआ। आगंतुक प्रदर्शनी स्थल से विभिन्न किस्मों के आम और पौधे सीधे खरीद भी सकते हैं। इसके अलावा चर्चित 'आम खाओ प्रतियोगिता' में सर्वाधिक आम खाने वाले प्रतिभागी को पुरस्कृत किया जाएगा।

दूसरे दिन का कार्यक्रम

समागम के दूसरे दिन बिहार के राज्यपाल सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन और कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा के शामिल होने का कार्यक्रम है, जो उत्कृष्ट प्रतिभागियों को सम्मानित करेंगे। मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि बीएयू की शोध गति बिहार की वैश्विक कृषि पहचान को और सुदृढ़ करेगी, जबकि सांसद अजय मंडल ने भागलपुर को 'सिल्क सिटी' के साथ-साथ अब 'जर्दालू सिटी' के रूप में उभरती नई पहचान देने की बात कही। यह आयोजन भारत के आम अनुसंधान और किसान-वैज्ञानिक संवाद की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली प्रश्न यह है कि जीआई टैग और पुरस्कारों से आगे बढ़कर क्या किसानों को बाज़ार-मूल्य और निर्यात-श्रृंखला तक वास्तविक पहुँच मिल रही है। जर्दालू को 'जर्दालू सिटी' का दर्जा देने की बात राजनीतिक दृष्टि से आकर्षक है, परंतु कोल्ड-चेन अवसंरचना और प्रसंस्करण इकाइयों के बिना यह पहचान केवल सुर्खियों तक सीमित रह सकती है।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्रीय आम समागम 2026 कहाँ और कब आयोजित हो रहा है?
राष्ट्रीय आम समागम-सह-कार्यशाला 27 जून 2026 से बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर, भागलपुर में आयोजित हो रही है। यह दो दिवसीय कार्यक्रम है जिसमें देशभर की 1,000 से अधिक आम किस्मों की प्रदर्शनी लगाई गई है।
जर्दालू आम को जीआई टैग कैसे मिला?
बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के शोध और प्रयासों की बदौलत भागलपुर के जर्दालू आम को भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग प्राप्त हुआ। यह टैग किसी उत्पाद की विशिष्ट भौगोलिक उत्पत्ति और उससे जुड़ी गुणवत्ता को मान्यता देता है।
प्रदर्शनी में कौन-सी दुर्लभ और विदेशी किस्में शामिल हैं?
प्रदर्शनी में जापान का मियाजाकी, थाईलैंड की रेड इनोवरी, ढाई किलोग्राम वजन का गदाधार, नूरजहां, आइसक्रीम आम, एप्पल मैंगो और काजू आम जैसी दुर्लभ किस्में शामिल हैं। इनके अलावा जर्दालू, केसर, फाजली, मालदह, हिमसागर और आम्रपाली जैसी देसी किस्में भी प्रदर्शित की गई हैं।
बिहार आम उत्पादन में किस स्थान पर है?
कुलपति डॉ. डीआर सिंह के अनुसार बिहार आम उत्पादन में देश में सातवें स्थान से आगे बढ़कर अब तीसरे स्थान पर पहुँच चुका है। यह प्रगति कृषि अनुसंधान और नीतिगत समर्थन का परिणाम बताई जा रही है।
समागम के दूसरे दिन क्या होगा?
दूसरे दिन बिहार के राज्यपाल सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन और कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा कार्यक्रम में शामिल होंगे। वे उत्कृष्ट प्रतिभागियों को सम्मानित करेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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