28 जून 2026
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बीएयू सबौर में राष्ट्रीय आम समागम संपन्न: 8 राज्यों से 1,100 किस्में, 2,000 प्रविष्टियाँ प्रदर्शित

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बीएयू सबौर में राष्ट्रीय आम समागम संपन्न: 8 राज्यों से 1,100 किस्में, 2,000 प्रविष्टियाँ प्रदर्शित

सारांश

भागलपुर के बीएयू सबौर में दो दिवसीय राष्ट्रीय आम समागम संपन्न हुआ जहाँ 8 राज्यों से 1,100 से अधिक किस्मों की 2,000 प्रविष्टियाँ प्रदर्शित हुईं। राज्यपाल और कृषि मंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से संबोधित किया। कुलपति ने बिहार को देश का नंबर-एक आम उत्पादक राज्य बनाने का संकल्प दोहराया।

मुख्य बातें

बीएयू सबौर, भागलपुर में दो दिवसीय राष्ट्रीय आम समागम-सह-कार्यशाला का 28 जून 2026 को समापन हुआ।
देश के 8 राज्यों से आम की 1,100 से अधिक किस्मों की 2,000 से ज्यादा प्रविष्टियाँ प्रदर्शनी में शामिल हुईं।
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन और कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने भागलपुर हवाई अड्डे पर खराब दृश्यता के कारण वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से संबोधित किया।
भागलपुर का जर्दालू आम वैश्विक पहचान प्राप्त कर चुका है; बीएयू की भूमिका को कृषि मंत्री ने सराहा।
प्रगतिशील आम उत्पादकों, महिला उद्यमियों और प्रदर्शनी के उत्कृष्ट प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया।
सिंह ने बिहार को देश का नंबर-एक आम उत्पादक राज्य बनाने का लक्ष्य दोहराया।

बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर, भागलपुर में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय आम समागम-सह-कार्यशाला का 28 जून 2026 को सफलतापूर्वक समापन हुआ। देश के आठ राज्यों से आम की 1,100 से अधिक किस्मों की 2,000 से ज्यादा प्रविष्टियाँ इस राष्ट्रीय प्रदर्शनी में शामिल की गईं, जो आम अनुसंधान और संरक्षण के क्षेत्र में देश के सबसे बड़े आयोजनों में से एक मानी जा रही है।

कार्यक्रम का स्वरूप और उद्देश्य

इस दो दिवसीय समागम में किसानों को आम उत्पादन, संरक्षण, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन से जुड़े वैज्ञानिक एवं व्यावसायिक पहलुओं की विस्तृत जानकारी विशेषज्ञों द्वारा दी गई। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, आयोजन का मुख्य उद्देश्य उत्कृष्ट आम किस्मों का संरक्षण करना, किसानों को गुणवत्तापूर्ण उत्पादन के लिए प्रेरित करना और आम-आधारित उद्यमिता तथा मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देना था। आम ज्ञान प्रतियोगिता और 'आम खाओ प्रतियोगिता' के विजेताओं को भी पुरस्कार प्रदान किए गए।

राज्यपाल और कृषि मंत्री का संबोधन

समापन समारोह में बिहार के राज्यपाल सह कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन और राज्य के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने पटना स्थित लोक भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किसानों और प्रतिभागियों को संबोधित किया। दोनों नेताओं को कार्यक्रम में प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित होना था, लेकिन भागलपुर हवाई अड्डे पर खराब दृश्यता के कारण विमान की लैंडिंग संभव नहीं हो सकी और उन्हें पटना वापस लौटना पड़ा।

राज्यपाल हसनैन ने अपने संबोधन में कहा कि बिहार आम उत्पादन की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का केंद्र रहा है और बिहार आने के बाद उन्हें महसूस हुआ कि यहाँ के आम गुणवत्ता और विविधता के मामले में देश में सर्वश्रेष्ठ हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय की सराहना करते हुए कहा कि इस स्तर का आयोजन देश में विरले ही देखने को मिलता है और अगले वर्ष वे स्वयं इसमें शामिल होने का प्रयास करेंगे।

कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि भागलपुर का जर्दालू आम आज वैश्विक पहचान बना चुका है, जिसमें बिहार कृषि विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने विश्वविद्यालय को कृषि नवाचार और अनुसंधान के क्षेत्र में हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।

उपस्थित प्रमुख अतिथि

कार्यक्रम में भागलपुर के सांसद अजय मंडल, विधायक रोहित पांडेय, सुल्तानगंज के विधायक ललित नारायण मंडल, पीरपैंती के विधायक मुरारी पासवान, आईसीएआर, नई दिल्ली के सहायक निदेशक (उद्यानिकी) डॉ. विश्वबंधु पटेल तथा बीएयू के कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित रहे।

कुलपति की दृष्टि: बिहार बनेगा नंबर-एक

कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित यह कार्यक्रम आम अनुसंधान और संरक्षण के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में बिहार देश का नंबर-एक आम उत्पादक राज्य बनेगा। समारोह के दौरान प्रगतिशील आम उत्पादकों, महिला उद्यमियों और राष्ट्रीय आम प्रदर्शनी के उत्कृष्ट प्रतिभागियों को भी सम्मानित किया गया।

आगे की राह

यह आयोजन ऐसे समय में हुआ है जब बिहार सरकार कृषि निर्यात को बढ़ावा देने पर ज़ोर दे रही है और जर्दालू आम जैसी GI-टैग प्राप्त किस्में अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में अपनी पहचान बना रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मंच किसानों को वैज्ञानिक तकनीकों से जोड़ने और आम-आधारित उद्योगों को नई गति देने में सहायक होंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

100 से अधिक किस्मों की यह प्रदर्शनी महज एक कृषि मेले से कहीं अधिक है — यह बिहार की उस कोशिश का प्रतीक है जो आम को निर्यात-केंद्रित नकदी फसल के रूप में स्थापित करना चाहती है। जर्दालू को GI टैग मिलने के बाद वैश्विक बाज़ार में माँग तो बढ़ी है, लेकिन किसानों तक मूल्य संवर्धन का लाभ पहुँचाने की व्यवस्था अभी भी अधूरी है। इस आयोजन में महिला उद्यमियों को सम्मान देना सकारात्मक कदम है, पर असली परीक्षा यह है कि कार्यशाला में दी गई जानकारी छोटे और सीमांत किसानों तक किस हद तक पहुँचती है। बिहार को नंबर-एक आम उत्पादक राज्य बनाने का संकल्प तब तक अधूरा रहेगा जब तक शीत-भंडारण, प्रसंस्करण इकाइयाँ और निर्यात लॉजिस्टिक्स में ठोस निवेश नहीं होता।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बीएयू सबौर का राष्ट्रीय आम समागम क्या है?
यह बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुर द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय आम समागम-सह-कार्यशाला है, जिसमें 8 राज्यों से 1,100 से अधिक आम किस्मों की 2,000 से ज्यादा प्रविष्टियाँ प्रदर्शित की गईं। इसका उद्देश्य आम अनुसंधान, संरक्षण, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देना है।
राज्यपाल और कृषि मंत्री कार्यक्रम में प्रत्यक्ष रूप से क्यों नहीं पहुँच सके?
भागलपुर हवाई अड्डे पर खराब दृश्यता के कारण विमान की लैंडिंग संभव नहीं हो सकी, जिससे राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन और कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा को पटना वापस लौटना पड़ा। दोनों ने लोक भवन, पटना से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम को संबोधित किया।
भागलपुर का जर्दालू आम क्यों खास है?
जर्दालू आम भागलपुर की विशेष पहचान है और इसे भौगोलिक संकेत (GI) टैग प्राप्त है, जिससे यह अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में वैश्विक पहचान बना चुका है। कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने इस उपलब्धि में बिहार कृषि विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।
इस आम समागम में किसे सम्मानित किया गया?
समारोह में प्रगतिशील आम उत्पादकों, महिला उद्यमियों और राष्ट्रीय आम प्रदर्शनी के उत्कृष्ट प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। इसके अलावा आम ज्ञान प्रतियोगिता और 'आम खाओ प्रतियोगिता' के विजेताओं को भी पुरस्कार दिए गए।
बिहार कृषि विश्वविद्यालय का आम उत्पादन को लेकर क्या लक्ष्य है?
बीएयू के कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह ने विश्वास जताया है कि आने वाले वर्षों में बिहार देश का नंबर-एक आम उत्पादक राज्य बनेगा। विश्वविद्यालय का लक्ष्य आम अनुसंधान, किस्मों के संरक्षण और आम-आधारित उद्यमिता को वैज्ञानिक आधार पर आगे बढ़ाना है।
राष्ट्र प्रेस
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