'मन की बात' के 134वें एपिसोड में बिहार का उल्लेख, CM सम्राट चौधरी ने PM मोदी का जताया आभार
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 31 मई 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' का 134वाँ एपिसोड सुना और बिहार का विशेष उल्लेख किए जाने पर प्रधानमंत्री के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। इस एपिसोड में पीएम मोदी ने बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक पेय सत्तू और राज्य के प्रसिद्ध जर्दालु आम की चर्चा करते हुए बिहार को राष्ट्रीय मंच पर विशेष पहचान दिलाई।
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री का यह संवाद देशवासियों को देश की विविधताओं और विशेषताओं से सीधे जोड़ता है। उन्होंने कहा कि बिहार की सांस्कृतिक धरोहर, कृषि उत्पादों और लोक परंपराओं का राष्ट्रीय मंच पर उल्लेख राज्यवासियों के लिए गर्व और सम्मान का विषय है। विशेष रूप से भीषण गर्मी के दौरान सत्तू जैसे पौष्टिक पारंपरिक पेय और जर्दालु आम की चर्चा ने बिहार की विशिष्ट पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर उजागर किया है।
किसानों और उद्यमियों को प्रोत्साहन
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री का यह उल्लेख बिहार के किसानों, उद्यमियों और आम नागरिकों के परिश्रम का सम्मान है। उनके अनुसार, इससे बिहार के स्थानीय उत्पादों को देश-विदेश में नई पहचान मिलेगी और किसान भी अधिक प्रोत्साहित होंगे। गौरतलब है कि जर्दालु आम को भौगोलिक संकेत (GI) टैग प्राप्त है और यह विदेशों में भी निर्यात किया जाता है।
भाजपा कार्यालय में सामूहिक श्रवण
भाजपा प्रदेश कार्यालय में बिहार के मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ 'मन की बात' का यह एपिसोड सुना। मंत्री सिन्हा ने कहा कि इस एपिसोड में पीएम मोदी ने भीषण गर्मी के दौरान जनस्वास्थ्य सावधानियों, भारत की आम संस्कृति और उसके वैश्विक निर्यात, खेल जगत में उभरती नई प्रतिभाओं, सामाजिक नवाचारों, सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण तथा पर्यावरण एवं जैव विविधता संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर देशवासियों का मार्गदर्शन किया।
मन की बात का व्यापक संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने इस एपिसोड में भारत की विविधता, युवाओं की प्रतिभा और जनभागीदारी की शक्ति को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार छोटे-छोटे प्रयास राष्ट्र निर्माण के बड़े संकल्पों को साकार करते हैं। यह कार्यक्रम अपने 134वें एपिसोड तक पहुँचते-पहुँचते देश के करोड़ों नागरिकों को जोड़ने वाला जनसंवाद का एक सशक्त मंच बन चुका है।
आगे भी बिहार की सांस्कृतिक और कृषि विरासत को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उभारने के प्रयास जारी रहेंगे, ऐसी उम्मीद राज्य सरकार ने जताई है।