बिहार कृषि मंत्री विजय सिन्हा ने BAU सबौर में मधु प्रसंस्करण इकाई का उद्घाटन किया, क्षमता तीन गुना बढ़ी
सारांश
मुख्य बातें
बिहार सरकार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने 20 जून 2026 को बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU), सबौर में कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं और इकाइयों का उद्घाटन किया। इस दौरे में उन्होंने विश्वविद्यालय की विस्तारित मधु प्रसंस्करण इकाई, आणविक पादप रोग प्रयोगशाला सहित अनेक सुविधाओं का लोकार्पण किया और 31वीं शोध परिषद् बैठक में वैज्ञानिकों व किसानों को संबोधित किया।
पौधरोपण से हुई दौरे की शुरुआत
मंत्री के दौरे की शुरुआत प्रधानमंत्री के आह्वान पर संचालित अभियान 'एक पेड़ मां के नाम' के अंतर्गत पौधरोपण से हुई। इस अवसर पर विजय कुमार सिन्हा सहित अन्य अतिथियों ने सिंदूर के पौधे लगाए, जो पर्यावरण संरक्षण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
मधु प्रसंस्करण क्षमता में तीन गुना वृद्धि
कृषि मंत्री ने BAU सबौर की विस्तारित एवं संवर्धित मधु प्रसंस्करण इकाई का उद्घाटन किया। इस विस्तार के बाद विश्वविद्यालय की शहद प्रसंस्करण क्षमता 2 क्विंटल प्रति छह घंटे से बढ़कर 6 क्विंटल प्रति छह घंटे हो गई है — यानी क्षमता में तीन गुना की वृद्धि। इसके साथ ही शहद की बॉटलिंग, कैपिंग, सीलिंग एवं लेबलिंग की पूरी प्रक्रिया अब पूर्णतः स्वचालित हो गई है। इस प्रक्रिया में किसी प्रकार का मानवीय संपर्क नहीं होगा, जिससे उत्पादित शहद की स्वच्छता, गुणवत्ता एवं खाद्य सुरक्षा मानकों में उल्लेखनीय सुधार सुनिश्चित होगा।
आणविक पादप रोग प्रयोगशाला का लोकार्पण
मंत्री ने विश्वविद्यालय में नवस्थापित आणविक पादप रोग प्रयोगशाला का भी उद्घाटन किया। यह प्रयोगशाला पादप रोगों की आधुनिक एवं वैज्ञानिक जांच तथा अनुसंधान गतिविधियों को नई गति प्रदान करेगी। गौरतलब है कि बिहार में पादप रोगों से होने वाले फसल नुकसान को कम करने के लिए इस प्रकार की सुविधा की लंबे समय से आवश्यकता महसूस की जा रही थी।
किसान ही सबसे बड़ा वैज्ञानिक: विजय सिन्हा
31वीं शोध परिषद् बैठक में वैज्ञानिकों और किसानों को संबोधित करते हुए विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि 'किसान सबसे बड़ा वैज्ञानिक होता है, जो मौसम के मिजाज और मिट्टी की नब्ज को समझता है।' उन्होंने वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि कृषि अनुसंधान पूरी तरह किसानोपयोगी होना चाहिए और कृषि विज्ञान की भाषा को सरल एवं देशज शब्दों पर आधारित बनाया जाए ताकि किसान उसे सहजता से समझ सकें।
उन्होंने कहा कि स्थापना के मात्र 15 वर्षों में BAU ने बिहार की कृषि को उन्नत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और विभिन्न उत्पादों को जीआई टैग दिलाकर बिहार के किसानों के उत्पादों को राष्ट्रीय पहचान और सम्मान प्रदान किया है। प्रधानमंत्री के 'लैब टू लैंड' मिशन को सफल बताते हुए उन्होंने कहा कि इसका प्रत्यक्ष लाभ किसानों तक पहुंच रहा है।
जहर मुक्त खेती और प्राकृतिक कृषि पर जोर
मंत्री ने कहा कि खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि हुई है, लेकिन रसायनों के अत्यधिक उपयोग का प्रतिकूल प्रभाव मानव स्वास्थ्य पर पड़ा है। उन्होंने जहर मुक्त खेती को वर्तमान समय की आवश्यकता बताते हुए किसानों को सलाह दी कि वे अपनी कुल भूमि के कम से कम 25 प्रतिशत हिस्से में प्राकृतिक खेती अपनाएं। उन्होंने अल नीनो के कृषि पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने वाली किस्मों एवं तकनीकों के विकास की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में छोटे एवं सीमांत किसानों की संख्या अधिक है और उनकी विशेष आवश्यकताओं के अनुरूप शोध की मांग बढ़ रही है। मंत्री ने आशा व्यक्त की कि BAU सबौर केवल आंकड़ों का केंद्र नहीं, बल्कि विकसित बिहार का ध्वजवाहक बनेगा।