10 अगस्त 2026
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बिहार कृषि मंत्री विजय सिन्हा ने BAU सबौर में मधु प्रसंस्करण इकाई का उद्घाटन किया, क्षमता तीन गुना बढ़ी

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बिहार कृषि मंत्री विजय सिन्हा ने BAU सबौर में मधु प्रसंस्करण इकाई का उद्घाटन किया, क्षमता तीन गुना बढ़ी

सारांश

बिहार कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने BAU सबौर में मधु प्रसंस्करण क्षमता 2 क्विंटल से बढ़ाकर 6 क्विंटल प्रति छह घंटे की, शहद बॉटलिंग पूरी तरह स्वचालित हुई। 31वीं शोध परिषद् में उन्होंने किसानोपयोगी अनुसंधान, जहर मुक्त खेती और कुल भूमि के 25% हिस्से में प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान किया।

मुख्य बातें

बिहार कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने 20 जून 2026 को BAU सबौर में कई परियोजनाओं का उद्घाटन किया।
मधु प्रसंस्करण क्षमता 2 क्विंटल से बढ़कर 6 क्विंटल प्रति छह घंटे हुई — तीन गुना वृद्धि।
शहद की बॉटलिंग, कैपिंग, सीलिंग एवं लेबलिंग प्रक्रिया अब पूर्णतः स्वचालित , मानवीय संपर्क शून्य।
नई आणविक पादप रोग प्रयोगशाला का उद्घाटन, पादप रोग अनुसंधान को मिलेगी नई गति।
मंत्री ने किसानों को कुल भूमि के कम से कम 25% हिस्से में प्राकृतिक खेती अपनाने की सलाह दी।
BAU के 15 वर्षों में बिहार के कई उत्पादों को जीआई टैग दिलाकर राष्ट्रीय पहचान दिलाई गई।

बिहार सरकार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने 20 जून 2026 को बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU), सबौर में कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं और इकाइयों का उद्घाटन किया। इस दौरे में उन्होंने विश्वविद्यालय की विस्तारित मधु प्रसंस्करण इकाई, आणविक पादप रोग प्रयोगशाला सहित अनेक सुविधाओं का लोकार्पण किया और 31वीं शोध परिषद् बैठक में वैज्ञानिकों व किसानों को संबोधित किया।

पौधरोपण से हुई दौरे की शुरुआत

मंत्री के दौरे की शुरुआत प्रधानमंत्री के आह्वान पर संचालित अभियान 'एक पेड़ मां के नाम' के अंतर्गत पौधरोपण से हुई। इस अवसर पर विजय कुमार सिन्हा सहित अन्य अतिथियों ने सिंदूर के पौधे लगाए, जो पर्यावरण संरक्षण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।

मधु प्रसंस्करण क्षमता में तीन गुना वृद्धि

कृषि मंत्री ने BAU सबौर की विस्तारित एवं संवर्धित मधु प्रसंस्करण इकाई का उद्घाटन किया। इस विस्तार के बाद विश्वविद्यालय की शहद प्रसंस्करण क्षमता 2 क्विंटल प्रति छह घंटे से बढ़कर 6 क्विंटल प्रति छह घंटे हो गई है — यानी क्षमता में तीन गुना की वृद्धि। इसके साथ ही शहद की बॉटलिंग, कैपिंग, सीलिंग एवं लेबलिंग की पूरी प्रक्रिया अब पूर्णतः स्वचालित हो गई है। इस प्रक्रिया में किसी प्रकार का मानवीय संपर्क नहीं होगा, जिससे उत्पादित शहद की स्वच्छता, गुणवत्ता एवं खाद्य सुरक्षा मानकों में उल्लेखनीय सुधार सुनिश्चित होगा।

आणविक पादप रोग प्रयोगशाला का लोकार्पण

मंत्री ने विश्वविद्यालय में नवस्थापित आणविक पादप रोग प्रयोगशाला का भी उद्घाटन किया। यह प्रयोगशाला पादप रोगों की आधुनिक एवं वैज्ञानिक जांच तथा अनुसंधान गतिविधियों को नई गति प्रदान करेगी। गौरतलब है कि बिहार में पादप रोगों से होने वाले फसल नुकसान को कम करने के लिए इस प्रकार की सुविधा की लंबे समय से आवश्यकता महसूस की जा रही थी।

किसान ही सबसे बड़ा वैज्ञानिक: विजय सिन्हा

31वीं शोध परिषद् बैठक में वैज्ञानिकों और किसानों को संबोधित करते हुए विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि 'किसान सबसे बड़ा वैज्ञानिक होता है, जो मौसम के मिजाज और मिट्टी की नब्ज को समझता है।' उन्होंने वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि कृषि अनुसंधान पूरी तरह किसानोपयोगी होना चाहिए और कृषि विज्ञान की भाषा को सरल एवं देशज शब्दों पर आधारित बनाया जाए ताकि किसान उसे सहजता से समझ सकें।

उन्होंने कहा कि स्थापना के मात्र 15 वर्षों में BAU ने बिहार की कृषि को उन्नत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और विभिन्न उत्पादों को जीआई टैग दिलाकर बिहार के किसानों के उत्पादों को राष्ट्रीय पहचान और सम्मान प्रदान किया है। प्रधानमंत्री के 'लैब टू लैंड' मिशन को सफल बताते हुए उन्होंने कहा कि इसका प्रत्यक्ष लाभ किसानों तक पहुंच रहा है।

जहर मुक्त खेती और प्राकृतिक कृषि पर जोर

मंत्री ने कहा कि खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि हुई है, लेकिन रसायनों के अत्यधिक उपयोग का प्रतिकूल प्रभाव मानव स्वास्थ्य पर पड़ा है। उन्होंने जहर मुक्त खेती को वर्तमान समय की आवश्यकता बताते हुए किसानों को सलाह दी कि वे अपनी कुल भूमि के कम से कम 25 प्रतिशत हिस्से में प्राकृतिक खेती अपनाएं। उन्होंने अल नीनो के कृषि पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने वाली किस्मों एवं तकनीकों के विकास की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में छोटे एवं सीमांत किसानों की संख्या अधिक है और उनकी विशेष आवश्यकताओं के अनुरूप शोध की मांग बढ़ रही है। मंत्री ने आशा व्यक्त की कि BAU सबौर केवल आंकड़ों का केंद्र नहीं, बल्कि विकसित बिहार का ध्वजवाहक बनेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि इसका लाभ BAU परिसर से निकलकर बिहार के उन लाखों छोटे मधुमक्खी पालकों तक कब और कैसे पहुंचेगा। 'लैब टू लैंड' का नारा वर्षों से गूंज रहा है, पर राज्य में किसानों की औसत आय और कृषि उत्पादकता के आंकड़े बताते हैं कि विश्वविद्यालयी नवाचार और खेत की जमीनी हकीकत के बीच की खाई अभी पाटी नहीं गई है। प्राकृतिक खेती के लिए 25% भूमि का सुझाव सराहनीय है, लेकिन बिना आर्थिक सहायता और बाजार लिंकेज के सीमांत किसान इसे अपनाने में हिचकिचाएंगे।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर की नई मधु प्रसंस्करण इकाई में क्या बदला है?
BAU सबौर की मधु प्रसंस्करण क्षमता 2 क्विंटल प्रति छह घंटे से बढ़कर 6 क्विंटल प्रति छह घंटे हो गई है — यानी तीन गुना वृद्धि। इसके साथ ही शहद की बॉटलिंग, कैपिंग, सीलिंग और लेबलिंग की पूरी प्रक्रिया अब पूर्णतः स्वचालित है, जिससे स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा मानकों में सुधार होगा।
आणविक पादप रोग प्रयोगशाला से बिहार के किसानों को क्या फायदा होगा?
यह प्रयोगशाला पादप रोगों की आधुनिक एवं वैज्ञानिक जांच और अनुसंधान को नई गति देगी। इससे फसलों में रोग की पहचान जल्दी और सटीक होगी, जिससे किसानों को समय पर उपाय मिल सकेंगे और फसल नुकसान कम होगा।
कृषि मंत्री विजय सिन्हा ने प्राकृतिक खेती के बारे में क्या कहा?
कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने किसानों से आग्रह किया कि वे अपनी कुल भूमि के कम से कम 25 प्रतिशत हिस्से में प्राकृतिक खेती अपनाएं। उन्होंने रसायनों के अत्यधिक उपयोग को मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बताते हुए जहर मुक्त खेती को वर्तमान समय की जरूरत बताया।
BAU सबौर ने अपने 15 वर्षों में बिहार की कृषि में क्या योगदान दिया है?
कृषि मंत्री के अनुसार, स्थापना के 15 वर्षों में BAU ने बिहार की कृषि को उन्नत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। विश्वविद्यालय ने विभिन्न उत्पादों को जीआई टैग दिलाकर बिहार के किसानों के उत्पादों को राष्ट्रीय पहचान और सम्मान प्रदान किया है।
'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत BAU सबौर में क्या हुआ?
कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा के दौरे की शुरुआत प्रधानमंत्री के आह्वान पर चल रहे 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के अंतर्गत पौधरोपण से हुई। इस अवसर पर मंत्री सहित अन्य अतिथियों ने सिंदूर के पौधे लगाए।
राष्ट्र प्रेस
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