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क्या बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर में 30वीं अनुसंधान परिषद बैठक का उद्घाटन हुआ?

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क्या बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर में 30वीं अनुसंधान परिषद बैठक का उद्घाटन हुआ?

सारांश

बिहार कृषि विश्वविद्यालय में 30वीं अनुसंधान परिषद बैठक का उद्घाटन हुआ, जिसमें प्रमुख वैज्ञानिकों और महिला कृषकों ने अपने अनुभव साझा किए। इस बैठक में कृषि अनुसंधान और विकास के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। जानिए इस खास कार्यक्रम में क्या कुछ खास हुआ।

मुख्य बातें

30वीं अनुसंधान परिषद बैठक का आयोजन हुआ।
बिहार कृषि विश्वविद्यालय की अनुसंधान प्रगति पर चर्चा हुई।
महिला कृषकों की भागीदारी को प्रोत्साहित किया गया।
अनेक उन्नत प्रजातियों का विकास किया गया है।
कृषि अनुसंधान के भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए।

भागलपुर, 29 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। बिहार कृषि विश्वविद्यालय (सबौर) के मुख्य सभागार में शनिवार को रबी 2025-26 की 30वीं अनुसंधान परिषद बैठक (आरसीएम) का उद्घाटन कुलपति डॉ. डीआर सिंह की अध्यक्षता में हुआ। उद्घाटन सत्र में जीबीपीयूएटी, पंतनगर के वैज्ञानिक डॉ. राम भजन सिंह, आईसीएआर–आईएआरआई, नई दिल्ली के प्रिंसिपल साइंटिस्ट, डॉ. वाईएस शिवाय, और राज्य के तीन कृषि-जलवायु क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाली प्रगतिशील महिला कृषक, सीमा सिन्हा, कटिहार (जोन-टू), रिंकू देवी, बांका (जोन-थ्री ए), और अन्नू कुमारी, पटना (जोन-थ्री बी), विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।

उद्घाटन सत्र की शुरुआत में निदेशक अनुसंधान, डॉ. एके सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा विभिन्न फसलों में 48 उन्नत प्रजातियां विकसित की गई हैं। 5 उत्पादों को जीआई टैग प्राप्त हो चुका है तथा 30 उत्पाद प्रक्रियाधीन हैं। विश्वविद्यालय को अब तक 31 पेटेंट, 20 कॉपीराइट और 1 ट्रेडमार्क प्राप्त हुए हैं। 174 स्टार्ट-अप्स को एसएबीएजीआरआई के तहत प्रशिक्षित किया गया है, जिनमें से 71 को फंडिंग मिली है। उन्होंने कहा कि 17 प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ एमओयू किए गए हैं।

सत्र में तीनों प्रगतिशील महिला कृषकों ने अपने-अपने क्षेत्रों में खेती के अनुभव साझा किए। इस दौरान सीमा सिन्हा ने बताया कि वे पिछले 15 वर्षों से जूट की खेती और जूट उत्पादों के निर्माण में कार्यरत हैं, और उन्हें जूट अनुसंधान केंद्र एवं बीपीएसएसी पूर्णिया से सहयोग मिलता रहा है। अन्नू कुमारी ने औषधीय पौधों की खेती के अनुभव साझा किए तथा एआरआई पटना से प्राप्त सहयोग का उल्लेख किया। रिंकू देवी ने सब्जी उत्पादन से संबंधित अपनी प्रगति और अनुभव बताए।

पंतनगर के प्रोफेसर डॉ. राम भजन सिंह ने विश्वविद्यालय द्वारा लगभग सभी महत्वपूर्ण शोध क्षेत्रों को प्रभावी रूप से संबोधित करने की सराहना की। उन्होंने कहा कि महिला कृषकों की भागीदारी अन्य किसानों के लिए प्रेरणादायक है और विश्वविद्यालय राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान बनाने की ओर अग्रसर है।

डॉ. वाईएस शिवाय ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के लिए कृषि इनक्यूबेशन, शोध एवं शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला। साथ ही किसानों की समृद्धि में जीआरएम, एनआरएम और एसआरएम की भूमिका बताते हुए संसाधन प्रबंधन की आवश्यकता पर बल दिया।

बिहार कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. डीआर सिंह ने वैज्ञानिकों, अतिथियों एवं प्रगतिशील किसानों का स्वागत किया व अध्यक्षीय संबोधन में विश्वविद्यालय की अनुसंधान प्रगति, नवाचारों एवं विभिन्न विभागों के योगदान पर प्रकाश डाला और आगामी शोध दिशा पर आवश्यक सुझाव दिए।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर प्राप्त परियोजनाओं और एनएबीएल प्रयोगशालाओं के उत्कृष्ट कार्य से विश्वविद्यालय की पहचान मजबूत हो रही है।

एनएबीएल लैब जल्द ही रेफरल लैब के रूप में विकसित होंगी। छात्रों एवं युवा वैज्ञानिकों के लिए “लागत कम, उत्पादन ज्यादा” विषय पर लोगो प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। जोन आधारित परियोजनाओं और लोकेशन-विशिष्ट तकनीकों के विकास पर विशेष बल दिया जाना चाहिए। किशनगंज, बांका एवं नवादा जिलों में केवीके एवं एआईसीआरपी की मदद से उत्पादन बढ़ाने की संभावनाओं पर कार्य आवश्यक है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार कृषि विश्वविद्यालय में अनुसंधान परिषद बैठक का उद्देश्य क्या है?
इस बैठक का उद्देश्य कृषि अनुसंधान, नवाचार और विकास के मुद्दों पर चर्चा करना और महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देना है।
बैठक में कौन-कौन से विशेष अतिथि उपस्थित थे?
बैठक में जीबीपीयूएटी, पंतनगर के वैज्ञानिक डॉ. राम भजन सिंह, आईसीएआर–आईएआरआई के डॉ. वाईएस शिवाय और प्रगतिशील महिला कृषक उपस्थित थे।
किसी महिला कृषक ने अपने अनुभव साझा किए?
सीमा सिन्हा ने जूट की खेती में अपने अनुभव साझा किए और अन्नू कुमारी ने औषधीय पौधों की खेती का अनुभव बताया।
बैठक में क्या महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए?
बैठक में कृषि अनुसंधान के भविष्य और महिलाओं की भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
कृषि विश्वविद्यालय की पहचान कैसे मजबूत हो रही है?
राष्ट्रीय स्तर पर प्राप्त परियोजनाओं और एनएबीएल प्रयोगशालाओं के उत्कृष्ट कार्य से विश्वविद्यालय की पहचान मजबूत हो रही है।
राष्ट्र प्रेस
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